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Wednesday, 22 August 2018

साहसी बालक की कहानी - (Sahasi Balak ki Kahani)



साहसी बालक की कहानी


सुंदरपुर नाम का एक छोटा सा गांव था। उस गांव में पूर्णचन्द्र नाम का एक बालक था। वो प्रतिदिन अपने गाँव की पाठशाला में पढ़ने जाया करता था।

पाठशाला में वह खूब मन लगाकर पढाई करता था, शिक्षक जो भी कार्य देते वो घर आकर उसे समय पर पूरा कर लेता और फिर अपना कार्य समाप्त होने के बाद गांव के बच्चों के साथ खेलने लग जाता था। 

sahasi balak ki kahani
साहसी बालक की कहानी

एक दिन की बात हैं, पूर्णचन्द्र पाठशाला से आकर अपना सारा पढाई का कार्य पूरा कर लिया फिर वह दूसरे बच्चों के साथ खेलने लगा, कुछ देर खेलने के बाद वह घर आ गया।