Thursday, 17 January 2019

किस्मत : दो बच्चों की कहानी | Two Children Story In Hindi


TWO CHILDREN STORY IN HINDI


Two Children Story In Hindi
Two Children Story In Hindi 

यह कहानी हैं दो बच्चे की दोनों एक शहर में रहते थे। उनमें से एक अरबपती का बच्चा था और दूसरा मिडिल क्लास फैमिली से बिलोंग करता था, उसके पापा एक छोटी सी कंपनी में काम करते थे। 

मगर एक खास बात यह थी की उस बिजनेसमैन का बच्चा और उस साधारण नौकरी करने वाले के बच्चे का स्कुल का समय एक ही था। 

वो जो पहला बच्चा था एक बहुत बड़ी मर्सिडीज कार से अपने स्कुल जाता था। उसी समय वह दूसरा बच्चा अपने पापा के स्कूटर के पीछे बैठकर स्कुल जाता था, सप्ताह में बहुत दिन दोनों एक ही समय गुजरते थे। 

यह देख लोगों के मन में यही चलता था, जो साधारण आदमी का बच्चा हैं उसकी किस्मत कितनी बुरी हैं और जो अरबपति का बच्चा जो मर्सिडीज में जा रहा हैं इसकी किस्मत कितनी अच्छी हैं। 

लेकिन रुकिए अब हम असली में देखते है।  वह जो अरबपती का बच्चा हैं उसके घर में एक बहुत ही बड़ी खिड़की हैं और वह रोज शाम को दो घंटे के लिये उस खिड़की में आकर खड़ा हो जाता हैं। 

वह बच्चा रोज अपनी खिड़की से खड़े होकर उस बच्चों को खेलता हुआ देखता हैं. क्यों की उसे वहाँ जाने की अनुमति नहीं हैं। 

एक बच्चा बनकर इस दुनियाँ को देखने की कोशिश करें तो एक बच्चें को खेल से ज्यादा प्यारा क्या हैं। लेकिन वही उससे नहीं खेलने दिया जा रहा हैं। 

उसके पास हर काम के लिये नौकर लगे हुये हैं। लेकिन इन सबसे उसे क्या लेना - देना वह तो रोज शाम को उन बच्चों को देखता हैं और अंदर से रोता रहता हैं। उसकी किस्मत अच्छी नहीं हैं।  क्यों की उसके हजारो खिलौने हैं लेकिन उसके पास खेलौनो का क्रेज नहीं है। 

लेकिन उस दूसरे बच्चें के पास चार खिलौने हैं लेकिन वह उन खेलौनो से खूब खेलता है, उसके पास उन चार खेलौनो का क्रेज हैं। 

यह है यहाँ तक की कहानी। लेकिन अब हम इस कहानी की दूसरी तरफ से देखते हैं। 

वह जो दूसरा बच्चा है वह खेलते - खेलते बीच में थोड़ा थक जाता हैं या कभी उसकी पारी नहीं होती तो वह बैठा रहता हैं और हमेशा वह उस पहले वाले बच्चे को देखता रहता हैं और सोचता है की उसकी किस्मत कितनी अच्छी हैं।

वह उस बड़े घर में रहता हैं। उसके पास कितनी अच्छी गाड़ी हैं मेरे पापा के पास स्कूटर क्यों हैं।  उसके पास कितने नौकर हैं, उसके पास कितने खिलौने हैं।  लेकिन यह सब मेरे पास क्यों नहीं हैं, मेरी किस्मत कितनी बुरी हैं।

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अब दोस्तों आप बतायें की किसकी किसमत अच्छी हैं और किसकी बुरी हैं। अगर हम गौर से देखें तो जबाब यही निकलता है की दोनों की किसमत अच्छी हैं और दोनों की किसमत बुरी हैं। 

जब हम उन चीजों के बारे में सोचते हैं जो हमारे पास में नहीं हैं और हम वह चाहते हैं तब हमारी किस्मत बुरी होती हैं। और जब हम उन चीजों के बारे में सोचते है जो हमारे पास में हैं....उस मोमेन्ट में हमारी किसमत अच्छी होती हैं। 

दोस्तों ये कहानी हम सबके मोटिवेशन संदीप माहेश्वरी सर ने इंडिया टूर  वाले सेमिनार में सुनायी थी, आशा है की आपको यह कहानी अच्छी लगी होगी, इस कहानी को संदीप माहेश्वरी सर के फैंस के फेसबुक ग्रुप में जरूर शेयर करें। आसान हैं...........................

सेमिनार देखें -  Sandeep Maheswari  (At 1:00 Minute Story will Starting )

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