Friday, 28 December 2018

Top 10 Moral Stories in Hindi | बच्चों की दस प्रेरक कहानियां

दोस्तों यहाँ दस सबसे अच्छी कहानियों का कलेक्शन हैं, जिसे रीडर्स ने बहुत पसंद किया हैं।  यह सभी कहानियाँ इसी वेबसाइट की हैं, लेकिन आप उसे यहाँ एक ही लेख में पढ़ सकते हैं।

Top 10 Moral Stories in Hindi


   1. अपने अंदर की खासियत को जानें  

Top 10 Moral Stories in Hindi - एक जंगल में एक कौआ रहता था, एक दिन उसने एक हंस को देखा तो उसने 
सोचा की हंस कितना सुंदर हैं। उसके पंख कितने अच्छे हैं। 

Top 10 Moral Stories in Hindi

कौआ ने जब हंस के पास गया और उसकी तारीफ की तो हंस बोला - नहीं मित्र में तो हमेशा सोचता हूँ की मुझ से सुंदर तोता हैं। 

क्यों की वह इंसानों जैसी आवाज भी निकाल लेता हैं , उसके पास दो रंग हैं। 

अब कौआ तोता से मिलने गया और कहा - मित्र तुम कितने सुंदर हो, क्या में भी तुम्हारे जैसा बन सकता हूँ ?

तोते ने कहा - मित्र में तो समझता हूँ की मुझ से सुंदर मोर हैं उसके पास बहुत सुंदर पंख हैं, और मोर नाच भी सकता हैं जिसे देखने बहुत से लोग आते हैं। 

अब कौआ मोर के पास गया और बोला - मित्र तुम कितने सुंदर हो तुम जैसा दिख सकता हूँ। 

मोर ने कहा - मित्र में तो सोचता था की इस जंगल का सबसे अच्छा पक्षी कौआ हैं...क्यों की कौआ जहाँ चाहे उड़ कर जा सकता हैं , कौआ मजबूत पक्षी होता हैं, और अगर देखा जाए तो सभी पक्षियों में कौआ ही अकेला पक्षी हैं जिसे पिंजरे में नहीं रखा जाता हैं। 

अब कौए को बात समझ आ गयी, और उसने मोर को धन्यवाद दिया और वहाँ से उड़ गया। 


सीख - दोस्तों हम हमेशा दुसरे की खासियत को देखते रहते हैं, हमारे अंदर जो खासियत मौजूद हैं वो हमे नहीं दिखता, इस कहानी का मतला यह बताना है की हमें दूसरों से पहले अपने अंदर की खासियत को समझना चहिये। 

***

 2. खरगोश का विश्वास 


Top 10 Moral Stories in Hindi - एक समय की बात है। किसी गांव में खरगोश, बकरी, घोड़ा और गधा इन चारों में बहुत अधिक मित्रता थी, वे एक साथ एक ही मैदान में घास चरने के लिये जाया करते थे।

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इन सभी जानवरों में सबसे छोटा और सबका नन्हा दोस्त था खरगोश। खरगोश का पेट तो थोड़े से घास से ही भर जाता था, बाकि तीनों जानवरों को अधिक घास खाना होता था। 

इसलिये जब खरगोश का पेट भर जाता तब वह सभी जानवरों के साथ खूब खेलता था।  

वह कभी घोड़े की पुँछ पकड़कर उसके पीठ पर बैठ जाता था। तो कभी बकरी के कान पकड़कर खींच देता, और कभी गधे को पीठ पर बैठकर कूदने लगता था।


एक दिन की बात है, उस मैदान में एक शिकारी कुत्ता आया, उसने जैसे ही खरगोश को देखा वह तुरंत खरगोश का शिकार करने के लिए दौरा।

उस दिन तो खरगोश दौड़कर झाड़ियों में भाग गया, लेकिन वह कुत्ता उसका शिकार करना चाहता था, खरगोश को देखते ही वह दौड़कर उसे पकड़ना चाहता था। 

खरगोश ने अब मैदान जाना और घास खाना छोड़ दिया, अब वह जंगल की थोड़ी सी पत्तियाँ खाता और जंगल में ही रहता था। 

बहुत दिन तक खरगोश मैदान नहीं गया, उसे अपने दोस्तों की याद आ रही थी। एक दिन वह शिकारी कुत्ते से बचकर मैदान गया, उसे देखते ही जानवरों ने पूछा - तुम इतने दिनों से घास चरने क्यों नहीं आते थे। 

खरगोश ने कहा - एक शिकारी कुत्ता इस मैदान में आया है, वह मुझे मार डालना चाहता है, इसलिए में अब मैदान में नहीं आता हूँ। अब तुम सब ही मेरी मदद कर सकते हो। 

खरगोश ने पहले घोड़े से कहा - दोस्त तुम तो इतने बड़े और ताकतवर हो, जब वह शिकारी कुत्ता यहाँ आये तो तुम उसे अपने टाप से मार डालना।

घोड़ा ने कहा - दोस्त में तो घोड़ा हूँ, में बस दौड़ना जनता हूँ, और टाप तो में रुकने के लिए मारता हूँ, में उस कुत्ते को नहीं मार सकता, वह एक शिकारी कुत्ता है अगर वह टाप से बच गया तो मुझे काट लेगा। 

अब खरगोश गधा के पास गया और बोला - दोस्त तुम मेरी मदद कर सकते हो, तुम्हे लात मारना आता है। जैसे वह कुत्ता यहाँ आये तुम उसे लात मारना, तुम्हारे लात मारने के बाद वह यहाँ नहीं आयेगा।


गधे ने कहा - दोस्त में तो गधा हूँ।  में बस काम करना समझता हूँ, अगर वह कुत्ता मेरी लात से बच गया तो मुझे काट लेगा। इसलिए में उसे लात नहीं मार सकता हूँ। 

अब खरगोश तीसरे दोस्त बकरी के पास गया और उससे कहा - दोस्त तुम्हारे पास नुकीली सींग है, जब वह कुत्ता यहाँ आये तो तुम उसे अपनी नुकीली सींग से मार देना।

बकरी ने कहा - दोस्त में तो बस एक बकरी हूँ। जब घोडा, गधा उससे नहीं नहीं भगा सकते तो में उसे कैसे भगा सकती हूँ। खरगोश उन सभी की बात सुनकर बहुत उदास हुआ और वह उदास होकर बैठ गया। 

फिर खरगोश ने खुद से पूछा - मेरे पास इतने मजबूत पैर है की में सबसे तेज दौर सकता हूँ।  खरगोश से तेज  कोई भी जानवर नहीं दौर सकता है, फिर में खुद पर ही विश्वास को नही करता हूँ। 

उसके बाद खरगोश खुद पर विश्वास करने लगा, वह रोज मैदान आता और सभी के साथ घास खाता था, जैसे ही उसे वह शिकारी कुत्ता दिखाई देता वह तुरंत तेज दौड़कर भाग जाता था। 

इस तरह वह कुत्ता कभी भी उस खरगोश को नहीं पकड़ पाया, अंत में थककर वह खुद ही मैदान से दूर भाग गया। 

उस खरगोश की जीत हुयी, उसके सभी दोस्त बहुत प्रसन्न थे, वे चारो पहले की तरह मैदान में आने लगे और घास खाने लगे। खरगोश भी खूब खेलने लगा।

सीख - दोस्तों इस कहानी से हमें सीख मिलती है की हमें भी सबसे पहले खुद पर विश्वास करना चाहिये। खुद पर विश्वास करने वालों की कभी हार नहीं होती है। 

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3. किसान के चार बेटों की कहानी 


Top 10 Moral Stories in Hindi - सुंदरपुर गाँव में एक बूढ़ा किसान रहता था। उसका नाम मोहनलाल था। उसके चार बेटे थे। वह बहुत सुखी सम्पन्न था। उसके पास किसी चीज की कमी नहीं थी, उसकी गिनती गांव के धनी लोगो में होती थी।

isan ke char bete ki kahani
किसान और उसके चार बेटों की कहानी

मोहनलाल के पास बहुत सारा खेत था, वह अपनी मेहनत से बहुत अनाज उगाता था। उसके अनाजों से गांव की मंडी भरी रहती थी। लेकिन किसान जब भी घर आता वह अपने चारों बेटे को आपस में लड़ते - झगड़ते देखता था।

इस बात से किसान को बहुत दुख होता था। वह अपने चारों बेटों को समझाता लेकिन किसी एक के भी बात समझ में नहीं आती थी।  किसान जैसे ही बाहर जाता वे आपस में झगरने लगते थे।

किसान ने अपने बेटों को समझाने के लिये एक उपाय सोचा, एक दिन की बात हैं, किसान अपने घर एक बड़ा सा लकड़ी का गट्ठर लेकर आया और उसनें अपने चारो बेटों को बुलाया।

किसान ने कहा : तुम्हें इस लकड़ी के गट्ठर को बिना अलग किये एक साथ तोड़ना हैं।

उसके चारों बेटों ने पूरी ताकत से लकड़ी के गट्ठर को तोड़ने का प्रयास किया लेकिन किसी से भी वह गट्ठर टूट नहीं सका। सब थककर बैठ गये। 

अब किसान ने उस गट्ठर को खोल दिया और गट्ठर की एक - एक लकड़ी सबके देते हुये बोला - यह लो एक एक लकड़ी और अब इसे तोड़ दो। 

इस बार चारों ने एक, एक लकड़ी उठायी और उसे बड़े ही आसानी से तोड़ दिया।

लेकिन उसके बेटों को बात समझ में नहीं आयी और एक ने किसान से पूछ लिया , पिताजी आपने हमें ऐसा करने के लिये क्यो कहा...?

किसान ने कहा - जब सभी लकड़ी एक थी। वे आपस में बंधे हुए थे। तो तुमने कितना भी कोशिस किया लेकिन तोड़ नहीं सके।

जैसे ही लकड़ी को अलग कर दिया गया, तो तुमने उसे बड़ी ही आसानी से तोड़ दिया।

ठीक उसी लकड़ी के समान तुम चारों भी हो.......तुम हमेशा आपस में झगड़ते रहते हो तुम्हारे अंदर जरा सी भी एकता नहीं हैं।

तुम ऐसे ही आपस में अलग होकर रहोगे तो किसी भी समस्या में फंस कर हार जाओगे।

लेकिन अगर चारों एक होकर रहोगे, आपस में कभी झगड़ा नहीं करोगे तो तुमें कोई भी नहीं हरा पायेगा।  जैसी तुम उस लकड़ी के गट्ठर को तोड़ नहीं पाए थे। 

अगर तुम आपस में मिलजुल कर रहोगे तो कैसी भी समस्या को तुम आसानी से सुलझा सकते हो।

अब तुम्हें सोचना हैं कि तुम आपस में प्यार से एक होकर रहना चाहते हो कि झगड़ते हुए अलग रहना चाहते हो..?

उसके चारों बेटों को बात समझ में आ गयी। उन्होंने किसान से वादा किया आज के बाद हम भी आपस में कभी भी झाडृ नहीं करेंगे , हम भी मिलजुल कर रहेंगे। 

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 4. अंगूर खट्टे हैं 


Top 10 Moral Stories in Hindi - किसी जंगल में एक लोमड़ी रहती थी, वह भूखी प्यासी भोजन की तलाश में यहाँ वहाँ घूम रही थी। 

तभी अचानक उसकी नजर अंगूर के एक झब्बे पर पड़ी, झब्बे में बहुत सारे अंगूर लटक रहे थे।  अंगूर को देख लोमड़ी के मुह में पानी आ गया। 

वह अंगूर खाने के लिये उछली, लेकिन अंगूर तक न पहुँच सकी, क्यों की अंगूर की झाड़ी एक पेड़ की डाली से लगी हुयी थी।

Angoor Khatte Hain
अंगूर खट्टे हैं
वह फिर से उछली, लेकिन इस बार भी वह अंगूर तक न पहुँच सकी।  वह बार - बार उछलती और नीचे गिर जाती थी, मगर एक बार भी वह अंगूर नही तोड़ पायी। 

अंत में हारकर लोमड़ी ने एक बहुत ही अच्छा बहाना बनाया उसने कहा - में क्या करुँगी यह अंगूर खा कर यह अंगूर खट्टे हैं। और वह लोमड़ी वहाँ से चली गयी। 

सीख - इस कहानी से हमें यह सीख मिलती हैं की हमें अपना काम छोड़कर बहाना नहीं बनाना चाहिये। 

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 5. राजा और मकड़ी की कहानी 



Top 10 Moral Stories in Hindi - एक समय की बात हैं। सुन्दर नगर नामक एक राज्य था। वहाँ वीरकेतु नामक एक राजा राज्य करता था।

एक दिन उसने अपने सभी मंत्रिको बुलाया और कहा कि ऐसी कोई चीज का पता लगाये जो किसी काम का नहीं हैं। जिसका कोई महत्व नहीं हैं।

जिसका कोई उपयोग नहीं होता हैं, और जो राज्य के विकास में कोई योगदान नहीं करते हैं।

अपने राजा की बात सुन राज्य के सभी मंत्री और सेनापति इस काम में जुट गये, वे दिन - रात ऐसी किसी चीज का पता लगाने लगे जिसका कोई उपयोग नहीं होता हैं।

जब भी कोई एक मंत्री कोई ऐसी चीज ढूंढता तो अन्य मंत्री उस चीज का महत्व बता देते थे।

This is an image of Raja Aaur Makdi
राजा और मकड़ी की कहानी

राजा को भी इस कार्य में बहुत आनंद आ रहा था। राज्य के सभी मंत्री राजा के सामने अपनी जीत चाहते थे।

इसी तरह एक महीना बीत गया, फिर अंत में सभी मंत्री एक बात पर सहमत हो गये। उन्हें ऐसी चीज मिल गयी जिसका कोई महत्व नहीं था।

सभी मंत्री राजा के पास पहुँचे और बोले :- महाराज ऐसी दो चीजें हैं। जिनका कोई उपयोग नहीं होता हैं। और ना ही उसका कुछ महत्व हैं।

राजा वीरकेतु ने पूछा :-  क्या हैं वह चीज जल्दी बताओ।

मंत्रियों ने कहा :- महाराज......मक्खी और मकड़ी, इन दोनों का कोई उपयोग नही हैं।

यह दोनों ना तो राज्य के किसी काम आते हैं और ना ही इन छोटे - मोटे किट पतंग का कुछ महत्व हैं।

राजा वीरकेतु बोला :- तब तो हमें मकड़ी और जंगली मक्खियों को समाप्त कर देना चाहिए।

सैनिकों जाओ और सभी मकड़ियो और मक्खियों को मार दो, या उन्हें राज्य से बाहर निकाल दो।

राज्य के सभी सैनिक इस काम में जुट गएवे कहीं आग जलाकर तो कहीं धुआँ फैलाकर इन मक्खियों और मकड़ियों को भगाने लगे।

उसी समय पड़ोस के दुश्मन राजा को खबर मिली की इस राजा के सारे सैनिक मकड़ी और मक्खियों को मारने में व्यस्त हैं।

सने अच्छा मौका पाकर इस राज्य पर बहुत सारी सेनाओं के साथ आक्रमण कर दिया।

राजा वीरकेतु के सभी सैनिक पूरे राज्य में बिखरे हुए थे, उनके सैनिक छोटी - छोटी टुकड़ियाँ बनाकर राज्य में मक्खी और मकड़ियों को मारने में व्यस्त थे।

राजा वीरकेतु ने बहुत कम सैनिकों के साथ दुश्मन सैनिकों को रोकने का प्रयास किया, लेकिन दुश्मन राजा के पास बहुत बड़ी सेना थी।

वीरकेतु के मंत्रियों ने उसे किले से दूर निकल जाने की सलाह दी, उनकी बात मान राजा किले से सुरक्षित स्थान पर निकल गया। 

वह भागते - भागते एक पेड़ के नीचे पहुँचा और बैठ गया, थके होने की वजह से उसे नींद आ गयी।

कुछ देर बाद एक जंगली मक्खी ने राजा को जोर का डंक मारा और राजा की नींद अचानक खुल गयी।

राजा की नींद खुल तब उसे याद आया की दुश्मन सैनिक उसका पीछा कर रहे हैं। इस तरह खुले में सोना खतरों से खाली नहीं हैं। 

वह उठा और जंगल की तरफ भाग गया, वहां उसने एक पुरानी गुफा देखी, वह गुफा को सुरक्षित समझ उसमें छुप गया।

राजा के गुफा में जाने के बाद मकड़ियों ने द्वार पर जाल बुन दिया।

कुछ समय बाद दुश्मन सैनिक उसे खोजते - खोजते वहां भी पहुँच गए, उनकी आवाज सुन राजा घबरा गया।

वे गुफा में घुसने वाले थे, लेकिन तभी उनके सेनापति की नजर उस मकड़ी के जाल पर गयी, जाल गुफा के द्वार पर बना हुआ था।

सेनापति बोला :- सैनिकों वीरकेतु यहाँ नहीं आया होगा, अंदर मत जाओ क्यों कि अगर राजा यहाँ गया होता तो गुफा के द्वार पर बना यह मकड़ी का जाल टूट जाता था।

यह बोल सभी दुश्मन सैनिक गुफा के बाहर से ही लौट गये, उनकी बात गुफा के अंदर छुपा राजा सुन रहा था।

अबतक राज्य के सभी सैनिक को यह खबर हो गयी थी की उसके राज्य पर आक्रमण हुआ हैं।

उन्होंने एकजुट होकर युद्ध लड़ा और अपनी एकता के कारण कुछ ही दिन में वे जीत गए, सभी दुश्मन सैनिक भाग चुके थे।

राजा वीरकेतु वापस अपने महल लौटा उसने अपने सभी सैनिकों को धन्यवाद किया, उन्हें बहुत सारा ईनाम दिया।

फिर उसने सबको यह बात बताई की कैसे मुश्किल में मक्खी और मकड़ी ने उसकी सहायता की और दुश्मन सैनिकों से उसकी जान बचाई।

अगर मक्खी और मकड़ियों ने उसकी सहायता नहीं किया होता तो शायद आज राजा दुश्मन सैनिकों से कैद में होता और उसकी पूरी सेना हार जाती थी।

अब राजा सभी छोटे - छोटे चीजों का महत्व समझ गया था। उसे अपनी गलती समझ आ चुकी थी।

सीख - इस कहानी का उद्देश्य लोगों को यह बताना हैं कि सभी चीजों का अपना एक अलग महत्व होता हैं। चाहे वह चीज छोटी हो या बड़ी इस दुनिया में ऐसा कोई भी चीज नही  जिसका कोई उपयोग या महत्व नहीं हैं।

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6. ईमानदारी का फल 


Top 10 Moral Stories in Hindi - एक गांव में एक गरीब लकड़हारा रहता था, वह जंगल से सुखी लकड़ियाँ काटकर उसे बाजार में बेचता और उससे अपना घर चलता था।

उसका पड़ोसी उसे रोज कहता की तुम पेड़ की हरी टहनियाँ काटकर बाजार में बेचो उससे तुम्हें अधिक धन मिलेगा सुखी लकड़ियाँ हलकी होती हैं।

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बच्चों की नई कहानियां - जादुई कुल्हाड़ी

लेकिन वह लकड़हारा बहुत ईमानदार था, वह यह बात समझता था की हरी टहनियाँ काटने से पेड़ों को तकलीफ होती है, इसलिए वह हमेशा सुखी टहनियों को ही काटता था।

एक दिन की बात है, लकड़हारा जंगल में बहुत देर से लकड़ी काट रहा था, दोपहर का समय हो गया था, उसने थोड़ा खाना खाया और उसी पेड़ के निचे आराम करने लगा।

हवा ठंडी चल रही थी, लकड़हारे को नींद आ गयी, कुछ ही देर बाद उसने सपने में देखा की पेड़ से एक वन देवता निचे उतरे हैं।

वन देवता ने लकड़हारे से कहा - में तुम्हारी ईमानदारी से प्रसन्न हूँ, दूसरे लकड़हारे पेड़ की हरी टहनियों को काटते हैं, लेकिन तुम सिर्फ सुखी टहनियाँ काटते हो जिससे पेड़ बहुत प्रसन्न होते हैं।

आज में तुम्हें जादुई कुल्हाड़ी दे रहा हूँ, जिससे तुम बहुत ही जल्दी बहुत सारी सुखी टहनियाँ काट सकते हो, लेकिन कभी भी इस कुल्हाड़ी से हरी टहनी मत काटना, यह एक जादुई कुल्हाड़ी हैं।

इतना बोलकर उस वन देवता ने लकड़हारे को जादुई कुल्हाड़ी दिया, उसी समय लकड़हारा की नींद टूटी उसने देखा की वहाँ सच में एक जादुई कुल्हाड़ी थी।  

लकड़हारा ने उस जादुई कुल्हाड़ी से लकड़ी काटना शुरू किया, उससे लकड़ियाँ तुरंत कट जाया करती थी, आज लकड़हारा ने बहुत साड़ी लकड़ी काटकर बाजार में बेचा और उसे बहुत पैसा मिला। 

अब लकड़हारा रोज उस जादुई कुलहारी से खूब सारी लकड़ी काटता और उसे बाजार में बेचता, जिससे उसे बहुत से पैसे मिलते थे। 

इस तरह कुछ ही दिनों में वह लकड़हारा धनी हो गया, यह बात उसके पड़ोसियों को समझ नहीं आ रही थी। 

एक दिन लकड़हारा उस जादुई कुल्हाड़ी के बारे में बातें कर रहा था, तभी उसके पडोसी ने उसकी बातें छुपकर सुन ली, उसने सोचा की में इसकी जादुई कुल्हाड़ी चुरा लूंगा और उससे में भी बहुत ही जल्दी धनी बन जाऊंगा।

रात में लकड़हारा सोया हुआ था, पड़ोसी लकड़हारा ने छुपकर उसकी जादुई कुल्हारी चुरा लिया और उसके जगह एक वैसी ही नकली कुल्हाड़ी रख दिया। 

अगले दिन जब ईमानदार लकड़हारा कुल्हाड़ी लेकर लकड़ी काटने जंगल गया तो आज उसकी कुल्हाड़ी से लकड़ी पहले की तरह नही कट रही थी। 

ईमानदार लकड़हारा को कुछ समझ में नहीं आया, वह सुखी लकड़ियाँ काटने में लग गया, अचानक उसे एक आवाज सुनाई दिया, उसका पड़ोसी लकड़हारा उसे बुला रहा था। 

वह आवाज की तरफ गया, उसने देखा की उसका पड़ोसी लकड़हारा एक पेड़ के साथ चिपक गया हैं, वह पेड़ की हरी टहनी को कुल्हाड़ी से काट रहा है। 

पड़ोसी लकड़हारे ने कहा - मैंने तुम्हारी जादुई कुल्हाड़ी चुरा लिया था, और जैसे ही मैंने उससे लकड़ी काटना शुरू किया की में इस पेड़ से चिपक गया हूँ, मुझे माफ करदो और मुझे इस पेड़ से छुड़ा दो। 

ईमानदार लकड़हारा सबकुछ समझ चूका था, उसने उसे माफ कर दिया, उसके माफ करते ही वह पडोसी लकड़हारा पेड़ से छूट गया। 

ईमानदार लकड़हारे को उसकी जादुई कुल्हाड़ी वापस मिल गयी, जादुई कुल्हाड़ी से कुछ ही दिनों में वह धनी हो गया, और उसे देख सभी लकड़हारे ने पेड़ों ही हरी टहनियाँ काटना छोड़ दिया। 

सीख - दोस्तों इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है की हमें भी अपना काम पूरी ईमानदारी से करना चाहिये।

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 7. साहसी बालक की कहानी 



Top 10 Moral Stories in Hindi - सुंदरपुर नाम का एक छोटा सा गांव था। उस गांव में पूर्णचन्द्र नाम का एक बालक था। वो प्रतिदिन अपने गाँव की पाठशाला में पढ़ने जाया करता था।

पाठशाला में वह खूब मन लगाकर पढाई करता था, शिक्षक जो भी कार्य देते वो घर आकर उसे समय पर पूरा कर लेता और फिर अपना कार्य समाप्त होने के बाद गांव के बच्चों के साथ खेलने लग जाता था। 

sahasi balak ki kahani
साहसी बालक की कहानी

एक दिन की बात हैं, पूर्णचन्द्र पाठशाला से आकर अपना सारा पढाई का कार्य पूरा कर लिया फिर वह दूसरे बच्चों के साथ खेलने लगा, कुछ देर खेलने के बाद वह घर आ गया। 

घर आकर उसने खाना खाया और थोड़ा आराम करने लगा, वह थका तो था ही उसे जल्दी ही गहरी नींद आ गयी, नींद में उसे कुछ लोगों के भागने और चिल्लाने की आवाज सुनाई दी।

पूर्णचन्द्र घबराकर उठ गया, उसने देखा कि सचमुच लोग भाग रहे थे, उसके गाँव में आग लग गयी थी।

आग पूरे गाँव में फैल चुकी थी, पूर्णचन्द्र के विद्यालय के नजदीक के झोपड़ी में भी आग लगी हुयी थी।

इतने में एक जलती हुई लकड़ी विद्यालय के ऊपर गिरी, पाठशाला का दरबाजा बन्द था, उसपर ताला लगा हुआ था।

पूर्णचन्द्र ने कुछ सोचा और वह एक बांस के सहारे पाठशाला की छत पर चढ़ गया, पाठशाला की छत फुस की थी।

लेकिन छत में आग पकड़ती उससे पहले ही पूर्णचन्द्र ने जलती लकड़ी नीचे फेंक दिया। लकड़ी बुझ गयी

पूर्णचन्द्र के इस साहसी कार्य ने लोगों को प्रेरित कर दिया, लोगों ने जब एक बालक को इस तरह से अपने पाठशाला की सुरक्षा करते देखा तो वो भी भागना छोड़ आग बुझाने में जुट गये।

इस तरह पूरे गाँव के लोग जो अबतक इधर से उधर भाग रहे थे। उन्होंने भागना छोड़कर आग पर पानी डालना शुरू कर दिया, और सबकी एकजुट प्रयास से देखते ही देखते आग पूरी तरह से बुझ गयी। 

सीख - इस तरह एक साहसी बालक के कारण पूरा गाँव जलने से बच गया, गाँव के लोगों ने पूर्णचन्द्र की तारीफ की, उसे पाठशाला की तरफ से इनाम मिला।


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7. किसान के आलसी बेटे की कहानी 


Top 10 Moral Stories in Hindi - किसी गाँव में एक किसान रहता था। उसके चार बेटे थे, लेकिन चारों बहुत आलसी थे।

किसान अपने बेटों से परेशान रहता था, एक दिन किसान ने सोचा की इनको मेहनती बनाने के लिए कोई उपाय सोचना पड़ेगा।

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एक दिन किसान सुबह उठा और उसने अपने बेटों से कहा - में तीर्थ पर रहा हूँ , वापस कुछ महीने बाद लौटूंगा।

अगर तुम्हें धन की जरुरत पड़े तो खेत में खोदना वहाँ तुम्हें एक घड़ा मिलेगा जिसमें बहुत सारा धन हैं, क्यों कि मैंने चोर के डर से अपना सारा धन एक घड़ा में रखकर, खेत में छुपाया हैं।

किसान के जाने के कुछ दिन बाद उसके बेटों ने सोचा की चलो आज खेत से धन को निकालते हैं।

चारों बेटे हाथ में कुदाल लेकर गए और पूरा खेत खोदा, लेकिन उन्हें कहीं भी धन नहीं मिला।

वे उदास होकर बैठ गए, उनको उदास बैठा देख एक पड़ोसी किसान ने पूछा - क्या हुआ भाई आप चारों भाई क्यों उदास बैठे हो ?

उन्होंने खेत में धन ना मिलने की बात उस किसान को बतायी,  वह किसान बहुत ही समझदार था, वह समझ गया कि किसान ने अपने बेटों को मेहनती बनाने के लिए ये उपाय सोचा हैं।

वह बोला - तुमलोग उदास मत बैठो, जब तुमने इतना मेहनत किया ही हैं, तो जाओ और खेत में बीज डाल दो।

चारों भाइयों ने उस किसान की बात मान लिया और खेत में बीज बो दिया। 

उनके बीज बोने के कुछ दिन बाद खेत में पौधें उग गए, चारों भाइयों को बहुत खुशी हुई, धीरे - धीरे उन्हें काम करना अच्छा लगने लगा।

अब चारों भाई मेहनत करने लगे, वे खाद और पानी समय पर डालते खेत की रखवाली करते, देखते ही देखते उनका खेत बहुत हरा भरा हो गया।

कुछ समय के मेहनत के बाद उनके पौधों में अन्न लगने सुरु हो गए, जैसे - जैसे उनकी फसल तैयार हो रही थी, उन्हें अच्छा लग रहा था।

तीन महीने बाद उनकी फसल पक कर तैयार हो गई, उन्हें बहुत सारा अनाज मिला।

जब फसल के काटने का समय आया तो किसान भी तीर्थ से लौट आया, उसने बेटों से पूछा - क्या तुम्हें धन मिला ?

चारों बेटे किसान को अपने साथ ले गए और फसल से मिला अनाज दिखाकर कहा - हाँ पिताजी हमें बहुत धन मिला।

उन्हें देख किसान बहुत खुश हुआ, उसने अपने चारों बेटों को गले लगा लिया, अब किसान के चारों बेटें मेहनती हो गए थे।

***

8. शिक्षा के महत्व की कहानी 


Top 10 Moral Stories in Hindi एक छोटा सा गाँव था। उस गाँव में दो दोस्त रहते थे। एक का नाम था अरुण और दूसरे का नाम था मोहन।

अरुण के पिता एक कपड़े के व्यापारी थे। गाँव के लोगों के बीच उनका अच्छा सम्मान था। अपने पिता को देख उनका बेटा अरुण भी शिक्षा से अधिक पैसा को महत्व देता था।


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मोहन के पिताजी एक शिक्षक थे, वे गाँव के विद्यालय में बच्चों को पढ़ते थे। अपने पिता की तरह मोहन शिक्षा को सबसे महत्वपूर्ण मानता था।

कुछ साल बाद...मोहन को आगे की पढ़ाई के लिए शहर जाना था, मोहन के अपने दोस्त अरुण से भी शहर चलने को कहा।

इसपर अरुण ने कहा : जिंदगी के लिए जो शिक्षा जरूरी मैंने किया। अब आगे की पढ़ाई तुम ही जारी रखो।

आज अरुण ने मोहन की बहुत हँसी उड़ाई, और बात ही बात में पढ़ा लिखा मूर्ख भी कह दिया।

अब मोहन को अकेले ही शहर जाना पड़ा। वह शहर जाकर अपनी पढ़ाई जारी रखा।

इधर अरुण ने कपड़े का व्यापार में अपना समय देने लगा।

इसी तरह कुछ वर्ष बीत गए, अब मोहन की पढ़ाई पूरी हो चुकी थी, और उसे एक कंपनी में नौकरी मिल गयी।

इधर अरुण को व्यापार में नुकसान होता रहा, उसे ना तो समय पर किसीसे पैसा मिलता था और ना ही वह किसी को पैसा दे पाता था।

अरुण के पिता ने उससे कहा : बेटा अब व्यापार को बंद हो चुका हैं। अब तुम यहाँ रहकर कुछ कर नहीं रहे हो।

इसलिए तुम शहर चले जाओ, वहाँ कोई नौकरी ढूंढ़ना जब कुछ पैसा मिल जाये तब फिर से व्यापार के बारें में सोचेंगे।

अरुण अब शहर चला जाता हैं। उसने नौकरी के लिए बहुत जगह आवेदन दिया लेकिन शहर में उसे कहीं नौकरी नहीं मिल रही थी।

बहुत कोशिश करने के बाद फिर एक दिन उसे एक कंपनी में इंटरव्यू के लिये बुलाया गया।

अरुण अगले ही दिन कंपनी में इंटरव्यू देने गया, उसे इंटरव्यू के लिये मैनेजर ने अपने ऑफिस में अंदर बुलाया।

आज अरुण का पहला इंटरव्यू था, उसे अंदर से बहुत संकोच हो रहा था।

कुछ देर बाद वह मैनेजर के ऑफिस के अंदर दाखिल हुआ। मैनेजर एक बड़ी सी कुर्सी पर बैठा हुआ था। सामने एक कंप्यूटर भी रखा था।

मैनेजर ने अरुण से कहा : मुझे पता चला हैं कि आप बहुत दिन से नौकरी की तलाश में थे।

अरुण : जी सर।

मैनेजर : अच्छा लेकिन आप नौकरी क्यों ढूंढ़ रहे हैं। मुझे बताया गया हैं कि आपका अपना कपड़ों का व्यापार था।

अरुण का पहला इंटरव्यू था। मैनेजर के इस सवाल पर वह भावुक हो गया। उसने कहा : जी सर मेरा अपना एक छोटा सा व्यापार था।

लेकिन जब मेरे पिताजी ने मुझे व्यापार सौंपा तो मुझे उसकी कुछ खास जानकारी नहीं थी।

मेरे अंदर बहुत अधिक घमण्ड था, जिसके कारण मेरे सभी ग्राहकों ने मेरे साथ खरीदारी करने बंद कर दिया।

में जिससे कपड़ा खरीदता था, वह भी अब उधार देने से मना कर रहा था। दरअसल मेरे अंदर बचपन से ही यह घमण्ड था। 

मैनेजर भी उसकी बातों को चुपचाप सुन रहा था। उसे बहुत दिन दिन बाद कोई ऐसा व्यक्ति मिला था।

बचपन में मेरा एक दोस्त था, उसका नाम था मोहन वह भी मेरे ही साथ पढ़ाई करता था। वह शिक्षा को बहुत महत्व देता था।

जब भी स्कूल में छूट्टी रहती थी, वो पढ़ाई करता और में सारा दिन घूमने में बीतता था। आज वह भी इसी शहर में रहता हैं, वह अच्छी नौकरी कर रहा हैं।

मैनेजर : तब आपको उसके पास जाना चाहिये था, वह नौकरी ढूंढने में आपकी मदद कर सकता है।

अरुण ने कहा : नहीं अब में उससे बात नहीं सकता क्यों कि जब उसने मुझे शहर में पढ़ाई करने के लिये कहा था तब मैंने उसका मजाक बनाया था।

यह सुन मैनेजर का चेहरा बदल गया। वह अपनी कुर्शी से उठा और उसने अरुण को गले गया लिया।

मैनेजर : अरे पगले, बस इतनी सी बात के लिये, तू मुझसे बात करना छोड़ देगा। में वही तेरा बचपन का दोस्त मोहन हूँ।

मोहन (मैनेजर) ने भावुक स्वर में कहा : जब में पिछले साल गांव गया तो तुझसे मिलने गया था। लेकिन तेरे पिताजी ने मुझे बताया कि तू व्यापार के काम से बाहर गया हैं। 

अरुण (उदास होकर) : नहीं दोस्त, उस दिन में गांव में ही था। मेरे घर की आर्थिक स्थिति खराब थी। में तेरा स्वागत नहीं कर सकता था। इसलिये मेरे पिताजी ने तुम्हें ऐसा कहा था।

मोहन : चल दोस्त घर पर चलते हैं। वहीं आराम से बात करेंगे, आज में छूट्टी ले लेता हूँ।

उसके बाद मोहन ने अरुण को अपने कंपनी में नौकरी पर नहीं रखा बल्कि उसे व्यापार करना सिखाया, उसे व्यापार के बारे में जानकारी दिया।

अब अरुण व्यापार के बारे में सबकुछ समझ गया था, वह वापस गांव आ गया उसने पैसा इकट्ठा किया और दोबारा कपड़े का व्यापार शुरू किया।

इसबार उसका व्यापार बहुत सफल हुआ। वह एक अच्छा व्यापारी बन गया। अब वह शिक्षा का महत्व समझ गया था।

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9. चित्रकार की गलती 


Top 10 Moral Stories in Hindi
एक समय की बात है, किसी शहर में एक चित्रकार रहता था।  वह बहुत अच्छे चित्र बनाता था, उसके द्वारा बनाये गये चित्रों की लोग बहुत तारीफ करते थे। 

एक दिन की बात हैं, चित्रकार के मन में यह बात आयी की उसकी चित्र सच में अच्छी होती हैं या लोग बस ऐसे ही उसके मुंह पर उसकी तारीफ करते हैं।

Short Stories In Hindi With Moral
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यह सोचकर उसने अपनी एक सबसे अच्छी चित्रकारी शहर के एक चौराहे पर लगा दी और उसके निचे लिख दिया - " जिसे भी इस तस्वीर में कोई कमी दिखे वह वहाँ एक निशान लगा दे "

जब शाम को वह अपनी पेंटिंग देखने गया, तो वह चौंक गया, उसकी पेंटिंग्स में बहुत सारे निशान लगे हुये थे, उसकी पेंटिंग्स पूरी तरह खराब हो गयी थी। 

उसने अपनी वह पेंटिंग उठायी और उसे चुपचाप अपने घर ले आया। उसके बाद उसका मन पेंटिंग बनाने का नहीं कर रहा था। 

उसने अब पेंटिंग बनाना छोड़ दिया, क्यों की जिस पेंटिंग में लोगों ने इतने सारे निशान लगाये थे वह उस चित्रकार की सबसे अच्छी पेंटिंग्स में से एक थी। 

बहुत दिन तक वह अपने घर में उदास बैठा रहा, कुछ दिन बाद उससे मिलने उसका एक दोस्त आया, वह भी चित्रकार था। 

उसने पूछा - दोस्त क्या हुआ हैं, अब तुम चित्र क्यों नहीं बनाते हो..? मैंने तुम्हें बहुत दिनों से एक भी चित्र बनाते नहीं देखा हैं ?

चित्रकार ने अपने दोस्त को वह पेंटिंग्स की बात बतायी और वह ख़राब हो चुकी पेंटिंग्स भी दिखायी। 

उसके दोस्त ने उसने कहा - शायद लोगों ने ऐसे ही निशान लगा दिया होगा।  अब तुम एक और चित्र उस चौराहे पर लगाओ, देखते हैं की इसबार लोग क्या कहते हैं। 

चित्रकार ने एक और चित्र उस चौराहे पर लगाने के लिए लाया, और चित्र पर पहले की तरह लिखने लगा। 

इसबार उसके दोस्त ने उसे रोका और उसने वहाँ निशान लगाने के बदले यह लिख दिया की "जिसे भी इस तस्वीर में कोई कमी दिखे वह उसे ठीक कर दे "

शाम को जब चित्रकार अपने दोस्त के साथ वहाँ गया तो वह फिर चौक गया - आज किसी ने भी उसके चित्र में कोई गलती नहीं निकाली थी। उसके चित्र में एक भी जगह कमीं नहीं थी। 

वह दोस्त ने उस चित्रकार से कहा - देखो दोस्त जिससे तुम अपने चित्र के बारे में सलाह माँग रहे थे, वे चित्रकारी के बारे में कुछ नहीं जानते थे, वे बस ऐसे ही निशान लगाकर चले जाते थे। 

गलती तुम्हारे पेंटिंग्स में नहीं थी, गलती तो उनलोगों से सलाह माँगने में थी, जिन्हें चित्रकारी के बारे में कुछ मालूम नहीं हैं। 

अब चित्रकार को अपनी गलती समझ में आयी, उसने वह पेंटिंग्स उठाकर अपने घर ले आया और उसके बाद उसने बहुत अच्छी - अच्छी चित्रकारी बनायी, जिसे लोगों ने बहुत पसंद किया। 

सीख - इस कहानी से हम यह सीख सकते हैं की सलाह हमेशा उसी से लेना चाहिये जिसे उस काम के बारे में कुछ जानकारी हो, बिना जानकारी वाले लोगों से सलाह लेना भी एक गलती ही हैं। 


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10. सबसे बड़ा रोग क्या कहेंगे लोग 

Top 10 Moral Stories in Hindi एक बहुत ही बड़ा जंगल था। उस जंगल में बहुत से जंगली जानवर और पक्षी रहते थे, उस जंगल में एक चूहा रहता था। लेकिन उसकी एक खास बात यह थी की उसे दस पूंछ था, जिसके वजह से जब भी वह जंगल निकलता था, उसे सभी चूहे छोटे जानवर और पक्षी सब उसका मजाक उड़ाते थे। 


Story -  Sabase bada rog , kya kahenge log

बेचारा चूहा बहुत दुखी और उदास रहता था, एक दिन उसने अपना एक पूंछ काट लिया, लेकिन फिर भी सब उसका मजाक उड़ाते थे " नौ पूंछ वाला चूहा "


कुछ दिन बाद उसने अपना एक और पूंछ काट लिया और जंगल में गया , इसबार सब उसे आठ पूंछ वाला चूहा कहने लगे। 


धीरे धीरे उसने अपना नौ पूंछ काट लिया, अब वो जंगल में गया और सबसे मिला...इसबार उसे सब देख कहने लगे "एक पूंछ वाला चूहा",


उस चूहे को बहुत गुस्सा आया और उसने अपना सारा पूंछ काट लिया...और जंगल में गया , इस बार उसे देख
सभी जोर जोर से हँसने लगे "बिना पूंछ का चूहा"



"कहानी का मतलब यही हैं की कहने वाले लोग कहते ही रहेंगे....दुनियाँ का सबसे बड़ा रोग , क्या कहेंगे लोग"

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