शेखीबाज मक्खी | Moral Stories in Hindi For Class 3



Moral Stories in Hindi For Class 3


Moral Stories in Hindi For Class 3 - एक घना जंगल था। उस जंगल में एक शेर भोजन करके पेड़ के नीचे आराम कर रहा था। इतने में ही एक मक्खी उड़ती - उड़ती वहाँ आयी, शेर ने दो चार दिनों से स्नान नहीं किया था। 

वह मक्खी शेर के कानों के पास आकर भिनभिनाने करने लगी, उस शेर को बहुत मुश्किल से नींद आयी थी। उसने नींद में ही पंजा उठाया, मक्खी वहाँ से उड़ गयी।

Moral Stories In Hindi For Class 3
Moral Stories in Hindi For Class 3

लेकिन फिर से मक्खी शेर के कानों के पास आकर भिन भिन करने लगी, अब शेर को गुस्सा आया वह बोला - अरे मुर्ख मक्खी दूर हट जा नहीं तो तुझे अभी जान से मार दूँगा। 

मक्खी धीरे से बोली - छी छी जंगल के राजा के मुँह से यह बातें अच्छी नहीं लगती। 

शेर ने कहा - एक तो तू मुझे सोने नहीं देती और दूसरी मुझसे जबाब करती हैं, चुप हो जा वरना। 

मक्खी बोली - वरना क्या, में तुमसे डरती नहीं हूँ, में तुमसे भी लड़ सकती हूँ। हिम्मत है तो आओ।  

शेर आगबबूला हो गया, उसने कान के पास जोर का पंजा मारा, मक्खी तो उड़ गयी लेकिन शेर का कान छील गया। 

मक्खी उड़कर शेर के नाम पर बैठ गयी, शेर ने फिर पंजा मारा, मक्खी फिर उड़ गयी लेकिन शेर का नाक छील गया। 

इस तरह मक्खी कभी शेर के माथे पर बैठती तो कभी उसके मुँह पर और कभी उसके गर्दन पर शेर पंजा मारता जाता और खुद ही गया होता जाता था। मक्खी तो तुरंत उड़ जाती थी। 

अंत में शेर थक गया वह बोला - मक्खी में हारा और तुम जीत गयी, अब यह लड़ाई बंद करो। 

मक्खी घमंड में चूर होकर उड़ती हुयी आगे बढ़ी। उसे रास्ते में एक हाथी मिला। मक्खी बोली - अरे हाथी मुझे प्रणाम कर, मैंने अभी - अभी जंगल के राजा शेर को हराया हैं।

हाथी ने सोचा की इस मक्खी से बहस करना मूर्खता हैं, उसने मक्खी को प्रणाम किया और आगे बढ़ गया। 

झाड़ियों में बैठी एक लोमड़ी यह सब देख हँसने लगी, इतने में ही मक्खी उड़ती हुयी लोमड़ी के पास आयी।  

मक्खी बोली - लोमड़ी मुझे प्रणाम कर मैंने अभी जंगल के राजा शेर और इतने बड़े हाथी को हराया हैं। 

लोमड़ी ने मक्खी को प्रणाम किया और कहा - मक्खी तुम धन्य हो, तुमने शेर और हाथी को हराया हैं, इस जंगल में सभी को तुम हरा सकती हो, लेकिन वह मकड़ी को देखो वह अभी तुम्हें भला बुरा, कह रही थी। 

यह सुन मक्खी घमंड में गुस्से से आगबबूला हो गयी, वह बोली - में इस मकड़ी को चुटकी में सबक सिखाती हूँ। 

यह कहते मक्खी मकड़ी के तरफ बढ़ी, और जैसे ही वह मकड़ी पर झपटी उसके जाल में उलझ गयी, अब तो बस वह मकड़ी के जाल में उलझ कर रह गयी, उसे समझ आ गया की घमंड नहीं करना चाहिये। 

सीख - दोस्तों इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है की हमें घमंड नहीं करना चाहिये।

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