Wednesday, 19 December 2018

जादुई संतरा की कहानी - Jadui Santra Ki Kahani, rajkumari ki kahani, jadui kahaniya

जादुई संतरा की कहानी


एक समय की बात है, सुंदरपुर की राजकुमारी बीमार हो गयी, उस राज्य के राजा रानी और सारी प्रजा राजकुमारी की तबियत ख़राब होने के कारण बहुत दुखी रहने लगे। 

राजा ने बहुत से विद्वान वैद्य से राजकुमारी का इलाज करवाया लेकिन राजकुमारी की तबियत ठीक नहीं हुयी। 

एक दिन की बात है, राजा से मिलने एक साधु आये। राजा ने साधु का बहुत स्वागत किया और बताया की राजकुमारी की तबियत बहुत ही ख़राब है।

जादुई संतरा की कहानी, जादुई कहानियाँ

साधु ने कहा - राजकुमारी उस जादुई संतरे से ठीक हो सकती हैं, जो पहाड़ पर मौजूद हैं। 

लेकिन उस जादुई संतरे की रखबाली एक राक्षस  करता हैं। जो मनुष्यों से तीन पहेली पूछता हैं और जो भी उसका सही जबाब नहीं देता, वह राक्षस उसे गुफा में कैद कर लेता हैं।

साधुकी बात सुनकर राजा ने तुरंत यह एलान करवा दिया की अगर कोई वह जादुई संतरा लाकर राजा को देगा उसे बहुत सारा इनाम दिया जायेगा। 

यह खबर सुनकर एक व्यक्ति ने उस जादुई संतरा को लाने का विचार किया, वह बहुत कोशिश करने के बाद उस पहाड़ पर चढ़ा और जैसे ही संतरा के पेड़ के पास पहुंचा उस राक्षस ने उसे रोका और उससे तीन सवाल किया।

वह व्यक्ति राक्षस के सवालों का जबाब नहीं दे पाया और उसने जल्दी ही एक गलत जबाब दे दिया, राक्षस ने उसे तुरंत कैद कर लिया। और उसे एक गुफा में बंद कर दिया।

कितने लोग जादुई संतरा उस राक्षस से लाने का प्रयास करते रहे....लेकिन कोई भी सफल नहीं हो पाया। 

अंत में उस राजा ने खुद ही वह संतरा लाने का विचार किया, वह बहुत कोशिश करके उस पहाड़ पर चढ़ गया और संतरा तोड़ने के लिए पेड़ की तरफ बढ़ा। 

राजा को आते देख राक्षस ने उसे रोका और कहा - राजा मेरे तीन सवालों के दिये बिना कोई भी यह संतरा नहीं तोड़ सकता। 

  • पहला पहेली -

सोने का पलंग नहीं, ना ही महल बनाये एक रूपया पास नहीं फिर भी राजा कहलाये...?

  • दूसरा पहेली  - 

फल भी कहलाऊँ, फूल भी कहलाऊँ और हूँ मिठाई तो जल्दी बताओ उसका नाम क्या है भाई...?

  • तीसरा पहेली -

हरा चोर लाल मकान, उसमें बैठा काला शैतान गर्मी में वह दिखता है, शर्दी में गायब हो जाता हैं...?

राजा ने राक्षस के कहा - पहली पहेली का उत्तर होगा - शेर। तुम्हारे दूसरे पहेली का उत्तेर होगा - गुलाबजामुन।  और तीसरी पहेली का उत्तर होगा - तरबूज। 

राक्षस ने कहा - बहुत अच्छे राजा में तुम्हारे उत्तेर से प्रसन्न हूँ, इतना बोलते ही वह राक्षस अपने असली रूप में आ गया, वह और कोई नहीं बल्कि वहीँ साधु बाबा थे। 

राजा ने कहा - साधु बाबा आपने राक्षस का रूप क्यों बनाया था और यह पहेलियाँ बुझाने की शर्त क्यों राखी थी। 

साधु बाबा ने कहा - राजा में तुम्हारी बुद्धू की परीक्षा लेना चाहता था, इसलिये में राक्षस बना था, अब तुम यह जादुई संतरा लेकर जाओ और इससे राजकुमारी बहुत जल्दी ठीक हो जाएगी।

राजा ने कहा - साधु बाबा लेकिन आपने जितने भी लोगों को कैद किया हैं उन्हें आजाद कर दीजिये, साधु बाबा ने उन सबको आजाद कर दिया।

उस जादुई संतरा के खाने से वह राजकुमारी कुछ ही दिनों में ठीक हो गयी, सबने उस साधु बाबा का धन्यवाद किया और उस जादुई संतरा से बहुत से लोगों का इलाज किया जाने लगा।

Related Stories -

No comments:

Post a Comment