Saturday, 3 November 2018

चींटी और कबूतर की कहानी - chiti aur kabootar story in hindi



 चींटी और कबूतर की कहानी 


किसी जंगल में एक बरगद का पेड़ था। पेड़ के नीचे से एक नदी बहती थी। एक दिन की बात हैं, एक कबूतर उस नदी में पानी पीने आया, उसने भरपेट पानी पिया और उड़कर पेड़ की डाल पर बैठ गया। 

पेड़ की डाली पर बैठ कबूतर आराम करने लगा, तभी उसकी नजर नदी में डूबती हुयी एक चींटी पर गयी चींटी नदी में गिर गयी थी, वह बहुत कोशिस करने के बाद भी नदी में डूबती ही जा रही थी। 


chiti aur kabootar story in hindi
चींटी और कबूतर की कहानी

कबूतर ने उस चींटी की मदद की सोची, उसने एक सूखा पत्ता चोंच में उठाया और चींटी के पास जाकर रख दिया, चींटी ने तुरंत उस पत्ते को पकड़ लिया और वह उस पर बैठ कर वह धीरे - धीरे किनारे आ गयी। 

चींटी ने कबूतर को बहुत धन्यवाद दिया, उस चींटी का बिल उसी पेड़ के निचे था। वह अपने बिल में चली गयी।

कुछ दिन बाद की बात हैं, चींटी खाने के लिये कुछ ढूंढ रही थी। उसी समय चींटी ने देखा की एक शिकारी पेड़ के पीछे छुपकर निशाना लगा रहा हैं। 

चींटी ने पेड़ की तरफ देखा तो पेड़ पर वही कबूतर बैठा था। जिसने चींटी की मदद की थी। कबूतर शिकारी को नहीं देख रहा था, क्यों की शिकारी पेड़ के पीछे छुपा हुआ था। 

चींटी तुरंत गयी शिकारी के पास और चींटी ने उस शिकारी के पैर को जोर से काटा, शिकारी झटपटाया और उसका निशाना चूक गया।  कबूतर ने जैसे ही शिकारी को देखा वह तुरंत वहाँ से उड़ गया। 

आज चींटी ने कबूतर की जान बचा ली, वह बहुत खुश थी, वह अपने बिल में चली गयी, अगले दिन कबूतर उस बरगद के पेड़ पर आया और उसने चींटी को धन्यवाद दिया। उस दिन के बाद कबूतर और चींटी दोनों अच्छे मित्र बन गये।

शिक्षा - इस कहानी से हमें यह सीख मिलती हैं की मुशीबत में दूसरों की मदद करें। 

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