Saturday, 22 September 2018

शेर की तीन मजेदार कहानियाँ - sher ki kahani

1. चार मित्र और शेर की कहानी


एक समय की बात हैं। किसी गाँव में चार दोस्त रहते थे। उनमें से तीन बहुत ही पढ़ा - लिखा विद्वान था, जबकि चौथा दोस्त मूर्ख था।

चारों में बहुत अच्छी दोस्ती थी। वे हमेशा एक साथ रहते और बातें खूब करते थे।

sher ki kahani
शेर की कहानी

एक दिन की बात हैं। वे एक पेड़ के नीचे बैठे बातें कर रहे थे कि अब हमें कुछ काम करने के लिये पास के नगर में जाना चाहिये।

चारों इस बात से राजी हो गये, अगले दिन वे अपना सामान लेकर नगर की तरफ निकल गये।

रास्ते में सुनसान जंगल पड़ता था। वे पेड़ - पौधें जीव - जंतुओं के बारे में बातें करते जा रहे थे।

रास्ते में उन्हें किसी जानवर के हड्डियों का ढाँचा मिला, वह बिखरा हुआ था।

पहला दोस्त बोला :- में हड्डियों के जोड़ने की जादुई विद्या समझता हूँ। देखो में अभी इन्हें जोड़ देता हूँ।

उसने अपने जादुई विद्या से तुरंत उस बिखरे हड्डियों को आपस में जोड़ दिया।

दूसरा दोस्त बोला :- में हड्डियों में माँस, चमड़े, नाखून यह सब लगाने की जादुई विद्या जनता हूँ।

उसने अपनी जादुई विद्या का से तुरंत उस कंकाल में मांस, चमड़े, नाखून और बाल आदि लगा दिया।

वह एक शेर का कंकाल था। उसके जादू से वह कंकाल अब मरे हुये शेर में परिवर्तित हो गया।

तीसरा दोस्त बोला :- में मरे हुये जानवरों को जिंदा करने की जादुई विद्या जनता हूँ। देखो में अभी इसे जिंदा कर देता हूँ।

यह सुन चौथा दोस्त बोला :- रुको दोस्त, यह शेर जिंदा होते ही हमें खा जायेगा इसलिये तुम इसे जिंदा मत करो।

लेकिन तीसरा दोस्त उसकी बातों पर ध्यान नहीं दिया और उसने उस शेर को जिंदा करने का जादू लगाना शुरू कर दिया 

यह देख चौथा दोस्त भाग कर पेड़ पर चढ़ गया, तीनों शेर के जिंदा होने का इंतजार करने लगे।

कुछ ही देर में वह शेर जिंदा हो गया और जोर - जोर से दहाड़ने लगा, उसे देख तीनों दोस्त भागने लगे, लेकिन शेर ने एक ही छलाँग में उन्हें मार डाला।

शिक्षा :- इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती हैं की हमें हमेशा सोच - समझ कर ही फैसला करना चाहिये।


2. शेर और ख़रगोश की कहानी


एक बहुत ही घना जंगल था, उस जंगल में बहुत सारे जानवर पक्षी पेड़ - पौधें सब आपस में प्यार से रहते थे।

एक दिन उस जंगल में एक बूढ़ा शेर आया। वह जंगल के सभी जानवरों का शिकार करने लगा, वह शेर अपने भोजन से ज्यादा जानवरों को मारने लगा था।

Lion and rabbit
शेर और ख़रगोश की कहानी

उससे परेशान होकर एक दिन सभी जानवरों ने जंगल में एक सभा लगायी और शेर को उस सभा में बुलाया और अपनी फरियाद सुनायी।

जानवरों ने कहा - महाराज अगर आप ऐसे ही जानवरों को मारते रहेंगे तो जल्दी ही सभी जानवर खत्म हो जाएंगे।

शेर दहाड़ते हुए बोला - इसमें में क्या कर सकता हूँ।

जानवरों ने कहा :- महाराज...आप बूढ़े हो चुके हैं, इसलिए आप अपने माद में रहें।

हम रोज एक जानवर आपका भोजन बनने के लिए आ जाया करेंगे, आप उसका शिकार कर लेना जिससे आपकी भूख भी मिट जायेगी।

शेर ने सोचा चलो अच्छा हैं, अब मुझे शिकार करने की मेहनत नहीं करनी पड़ेगी।

यह सोच शेर जानवरों की बात पर राजी हो गया।

उसदिन के बाद प्रतिदिन एक जानवर शेर का शिकार बनने उसके पास जाता था, और शेर उसे खा अपनी भूख मिटाता था।

एक दिन भोजन बनने की बारी ख़रगोश की आयी। ख़रगोश बहुत चालक और होशियार था।

ख़रगोश जानबूझ कर शेर के पास देर से गया, उसे देख शेर गुस्से से लाल हो गया। 

शेर ने पूछा : अरे ख़रगोश तुम इतनी देर से क्यो आये...?

ख़रगोश बोला : महाराज आज दो ख़रगोश आपके भोजन के लिए आ रहे थे। 

लेकिन अचानक जंगल में एक दूसरा शेर मिल गया, उसने एक ख़रगोश को खा लिया। में बहुत ही मुश्किल से आपके पास आया हूँ।

ख़रगोश की बात सुन शेर गुस्से से दहाड़ने लगा, उसने कहा : इस जंगल में मेरे अलावा कौन शेर आ गया हैं। तुम चलो मुझे दिखाओ में अभी उसे मार डालूँगा।

ख़रगोश, शेर को एक कुँआ के पास ले गया, उसने कहा : महाराज वह शेर इसी कुँआ में रहता हैं।

शेर ने कुँआ में देखा तो उसे पानी में अपनी ही परछाई दिखी।
शेर गुस्से में उसे दूसरा शेर समझ बैठा, उसने बिना सोचे समझे कुएँ में छलांग लगा दिया। शेर उस कुएँ में जा गिरा और बेचारा मर गया।

जंगल के सभी जानवर खुशी से झूमने लगे। सभी में उस ख़रगोश को धन्यवाद दिया और फिर से जंगल में सभी जानवर बिना डर के रहने लगे।

शिक्षा - बुद्धि बल से बड़ी होती हैं।


3. शेर और चूहा की कहानी


एक दिन की बात हैं, जंगल का राजा शेर पेड़ के नीचे सोकर खर्राटे भर रहा था।

जिस जगह पर शेर सोया था, वहाँ पास में एक नटखट चूहा का बिल था।

sher ki kahani
शेर और चूहा की कहानी

शेर की तेज खराटे के कारण चूहा परेशान हो बिल से बाहर निकला, शेर को देख चूहा घबरा गया।

लेकिन शेर गहरी नींद में सोया था, शरारती चूहे को शरारत सूझी, वह शेर की पीठ पर चढ़ गया और जोर-जोर से उछलने लगा।

उसकी उछलने से शेर की नींद खुल गयी, उसने झटके से चूहे को पकड़ लिया, और बोला - मूर्ख चूहा....तुमने मेरी नींद खराब की हैं, अब में तुम्हें मार डालूँगा।

शेर को गरजता देख चूहा काँपने लगा, उसके साँसे अटक गई।

चूहा बोला - महाराज, मुझे माफ कर दीजिए, आप तो जंगल के राजा हैं, मुझ जैसे छोटे चूहे को मार कर आपको क्या मिलेगा। लेकिन अगर आप मुझे छोड़ देंगे तो में भी कभी आपके काम जरूर आऊँगा।

चूहे की बात सुनकर शेर को बहुत हंसी आयी, वह हँसते हुए बोला - तुम एक चूहा मेरे क्या काम आओगे, लेकिन तुमने मुझे हँसाया है इसलिए में तुम्हें छोड़ रहा हूं।

कुछ दिन बाद की बात हैं। चूहा बिल के बाहर घूम रहा था, तभी उसकी नजर उस शेर पर गयी, आज वह शिकारी द्वारा बिछाये गए जाल में फँसा था।

चूहा शेर के पास गया और बोला - महाराज...याद आया मैंने कहा था की में जरूर आपके काम आऊँगा। में अभी इस जाल को काट देता हूँ।

चूहे ने अपनी नुकीली दाँतों से जल्दी ही उस जाल को काट दिया, शेर बाहर आ गया।

शेर बोला - मुझे माफ़ करना चूहा, उस दिन मैंने तुमपर हंसा था, लेकिन आज से हम दोनों दोस्त हैं।

उसके बाद चूहा और शेर में दोस्ती हो गयी, चूहा शेर की पीठ पर बैठता और घूमता था, दोनों में गहरी मित्रता हो गयी।

शिक्षा :- इस कहानी से हमें शिक्षा मिलती है कि कभी भी हमें दूसरों को कम नहीं समझना चाहिए, हर छोटी - बड़ी चीज का अपना अलग महत्व होता हैं। जिस चीज को हम छोटा समझते हैं, अक्सर वही चीज मुश्किल वक्त में काम आती हैं।

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