Saturday, 1 September 2018

राजकुमार और बुनकर की बेटी - hindi ki kahani



दोस्तों, ये कहानी एक राजकुमार और बुनकर की बेटी की हैं। दोनों में गुण और हुनर को लेकर शर्त लगायी जाती हैं। इस कहानी से अच्छी प्रेरणा मिलती हैं, और गुण की महत्ता समझ आती हैैन। यह एक रोचक कहानी हैं जिसमें आखरी में एक जीतता हैं।

hindi ki kahani
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एक राजकुमार था। उस राज्य के राजा और रानी उसे बहुत प्यार करते थे। उस राजकुमार के अंदर सिर्फ एक ही बात थी, की वह बहुत अधिक जिद्दी था।

उसे जिस भी चीज की जरूरत होती, तुरंत उपलब्ध करा दिया जाता था, उसके आदेश पर नौकर चाकर सब हमेशा तत्पर रहते थे।

राजकुमार प्रतिदिन अपने घोड़े पर सवार होकर घूमने निकला करता था। उसके साथ उसके अंगरक्षक सैनिक भी होते थे।

एक समय की बात हैं, राजकुमार अपना घोड़ा दौड़ाते हुए, एक बुनकर के घर के द्वार से गुजर रहा था।


उसदिन बुनकर घर पर नहीं था, उसने बहुत सारा धागा सूखने के लिए द्वार के नजदीक डाला हुआ था।

घर पर बुनकर की बेटी थी, वह बहुत ही सुंदर थी, उम्र में राजकुमार के बराबर ही थी। उसने जब घोड़ो के आने की आवाज सुनी तो वह जल्दी से अपना धागा हटाने लगी।

लेकिन राजकुमार घमण्ड से चूर था, उसके धागा पर थोड़ा भी ध्यान नहीं दिया और घोड़ा दौड़ाते आगे निकल गया।

बुनकर का पूरा धागा टूट गया, इसपर बुनकर की बेटी बोली : पिता के धन पर इतना घमण्ड इतना ठीक नहीं हैं।

यह बात राजकुमार ने सुन लिया, वह वापस लौटा और पूछा : तुमने क्या कहा..?

इसपर बुनकर की बेटी ने निडरता से उत्तर दिया - मैंने कहा.....की आपको अपने पिता के धन पर इतना घमण्ड हैं। अगर आपके अंदर कुछ अपना गुण हो तो बताइये।

राजकुमार ने कहा - में अपना गुण बाद में बताउंगा। पहले तुम बताओ कि तुम्हारे अंदर कौन सा गुण है।

इसपर बुनकर की बेटी बोली - मेरे अंदर हुनर हैं। अगर मेरे पिता मुझे एक सुई धागा और थोड़ा कपड़ा देकर छोड़ दे तो में अपने हुनर से कुछ धन कमा सकती हूँ।

लेकिन अगर आपको राजा कुछ देकर छोड़ देंगे तो क्या आप कुछ कर सकते हैं।

राजकुमार के पास इसका कोई उत्तर नहीं था। बहुत सारे सैनिक भी उसके साथ थे, इसलिए राजकुमार वहाँ से लौट गया।

राजकुमार महल लौटकर रूठ गया, वह ना तो खाना खाता और ना ही किसी से बात करता था।

उसके रूठने की बात सुनकर राजा और रानी सबकाम छोड़ उसके पास आये, राजा ने उसके रूठने का कारण पूछा..?

राजकुमार बोला - पिताजी में इस राज्य के बुनकर के बेटी से विवाह करना चाहता हूँ।

राजा बोले - तुमने जब कहा हैं तो ठीक हैं। में कल ही उस बुनकर से जाकर पूछता हूँ और उससे तुम्हारी शादी की बात करता हूँ।

अगले दिन राजा उस बुनकर पास मिलने गए। और राजकुमार और बुनकर की बेटी की शादी ठीक हो गयी।

पूरे राज्य में ये खबर फैल गयी कि राजकुमार बुनकर की बेटी की सुंदरता के कारण उससे शादी कर रहा हैं।

लेकिन शादी के बाद राजकुमार एक सुई धागा और कुछ कपड़े लेकर बुनकर की बेटी के पास पहुँचा।

उसने ये तीनों चीज उसे देते हुये बोला - तुमने कहा था कि में कुछ धन कमा अपना पेट भर सकती हूँ। इसलिए आज से तुम महल की एक भी चीज लिए बिना अपना पेट भरकर दिखाओ।

अगर तुम ऐसा नहीं कर सकती तो अपनी हार स्वीकार कर लेना।

राजकुमार ने पूरे महल में यह घोषणा कर दिया की एक भी चीज उसकी पत्नी को कोई नहीं देगा, जबतक राजकुमार की अनुमति नहीं मिल जाती हैं।

अब बुनकर की बेटी को समझ आ गया कि उसे अपना हुनर दिखाना हैं।

वह सुई धागा और कपड़ा लेकर बैठ गयी, उसने बहुत ही सुंदर एक पर्दा बनाया और अपनी दासी को बोली - इसे बाजार में बेचकर कुछ खाने का समान ले कर आइये।

दासी को पता था, की राजकुमार ने महल की चीज के बारे में बोला हैं। इसलिए उसने वह पर्दा बाजार जाकर बेच दिया और खाने का सामान लेकर आ गयी।

अब इसी तरह बुनकर की बेटी रोज कुछ अच्छा बनाती और दासी उसे बाजार में बेचकर जरूरी सामान ले आती थी।

उस राज्य के राजा कला और हुनर का बहुत आदर करते थे। उनका मानना था कि कला बहुमूल्य चीज हैं। इससे राज्य का विकास हो सकता हैं।

राजा ने एक मंत्री को इस कार्य में लगाया था। मंत्री को जब भी कोई अच्छी चीज कलाकृति मिलती थी। वह तुरंत उसे राजा के सामने पेश करता था।

एक दिन मंत्री ने एक अनोखा पर्दा राजा के सामने पेश किया।लेकिन अभी तक उस पर्दा के बनाने वाले का कुछ पता नहीं चल सका था।

राजा को वह पर्दा बहुत ही अच्छा लगा, वे पर्दा लेकर अपनी रानी और बहू को दिखाने ले गए, रानी ने उस पर्दे की बहुत तारीफ की लेकिन राजकुमार की पत्नी खामोश थी।

राजा के पूछने पर उसने बताया कि यह पर्दा तो मैंने ही बनाया हैं। उसके इस बात पर सभी चकित हो गए।

फिर उसने बोला - अगर आप कहें तो में एक और ऐसा पर्दा आपलोगों के सामने तैयार कर सकती हूँ।

राजा ने सभी जरूरी समान तुरंत मँगवाया और अपनी बहू को दिया। राजकुमार की पत्नी ने एकदम वैसा ही पर्दा कुछ ही घण्टों में तैयार कर के सबको दिखा दिया।

अब तो राजा रानी सब उसकी तारीफ करने लगे। पूरे महल के लोग उसे गुणवान समझने लगे। राजकुमार को महल में हर तरफ अपनी पत्नी की तारीफ सुनायी देने लगी।

एक दिन राजकुमार अपनी पत्नी के पास गया, उसने अपना हार स्वीकार कर लिया और वह मान गया कि उसकी पत्नी गुणवान हैं।

*****

दोस्तों, आपको कहानी तो अच्छी लगी ही होगी। इस कहानी से हमें प्रेरणा मिलती हैं कि व्यक्ति का घमण्ड किसी काम का नहीं होता हैं, जैसा कि राजकुमार के अंदर था।

जबकि अच्छे गुणवान व्यक्ति को लोग उसके गुणों के कारण सम्मान देने लगते हैं। उसका आदर करने लगते हैं, जैसा इस कहानी में बुनकर की बेटी थी। उसके अच्छे गुण के कारण सब उसे स्नेह करने लगे, राजकुमार भी उसका आदर करने लगा।

इसलिए हर किसी को गुणों को अपनाना चाहिए। गुण और हुनर कोई छीन नहीं सकता हैं। यह एक बहुमूल्य चीज हैं, जिसका कोई मूल्य नहीं हैं।

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