Sunday, 2 September 2018

चिड़ियों की बरसात | birds story in hindi | chidiya ki kahani



एक जंगल में एक चिड़ियाँ रहती थी। उसका घोंसला एक झाड़ी में था। इस साल चिड़ियाँ ने दो अंडे दिए थे।

चिड़ियाँ उस अंडों की बहुत देखभाल करती थी। 

वो सोचती की इन अंडों से छोटे - छोटे बच्चें निकलेंगे, में उन्हें उड़ना सिखाऊंगी और फिर हम सब चिड़ियाँ दूर खेतों में जाकर अनाज चुनेंगे, कितना अच्छा लगेगा।

birds story in hindi
birds story in hindi

एक दिन की बात हैं, एक भूखा हाथी आया, उसने झाड़ियाँ और पत्ते तोड़कर खाने लगा।

झाड़ियों के हिलने से उस चिड़ियाँ का घोंसला नीचे गिर गया, उसके अंडे जमीन पर गिरकर फुट गये।

चिड़ियाँ बहुत रोने लगी, उसे रोता हुआ देख हाथी बोला : मुझे माफ़ कर दो चिड़ियाँ रानी, मुझे मालूम नहीं था की इस झाड़ी में तुम्हारा घोंसला हैं।

लेकिन में भी क्या करूँ, बारिश नहीं हो रही हैं। जिसके कारण पेड़ के पत्ते सुख गये हैं। अब तो सभी हाथियों को बस झाड़ियों का ही सहारा हैं।

उसी समय एक दूसरी चिड़ियाँ वहाँ आयी, उसने इस चिड़ियाँ से कहा : चिड़ियाँ रानी, अभी कुछ दिन पहले एक जानवर के कारण मेरे भी अंडे टूट गये थे। 

अब तो हमसब चिड़ियों को ही कुछ करना पड़ेगा, बरसात होगी तभी हमारे अंडे सुरक्षित रहेंगे, चलो बादल से पूछते हैं।

जंगल की सभी चिड़ियाँ उड़ती हुयी बादल के पास गयी और पूछी : बादल भाई, आप पानी क्यों नहीं बरसाते हैं..? बिना पानी के पेड़ सुख रहे हैं। जंगल के जानवर झाड़ियाँ खाने आते हैं, जिससे हमारे अंडे टूट जाते है।

बादल बोला : चिड़ियाँ रानी, इस साल मेंढक बोल ही नहीं रहे, मेंढक की टर्र - टर्र सुनकर ही बादल पानी बरसाते हैं।

अब चिड़ियाँ गयी मेंढक के पास और बोली : मेंढक भाई, इस साल तुम टर्राते क्यों नहीं..? तुम्हारे टर्राने से जंगल में बारिश होगी। चारों तरफ हरियाली आयेगी, और हमारे अंडे टूटने से बच जाएँगे।

मेंढ़क उदास होकर बोला : चिड़ियाँ रानी, पिछले साल बहुत कम बरसात हुयी थी। जिसके कारण सभी मेंढक का गला सुख रहा हैं, वे उदास हो गये हैं। जबतक एक भी बार बारिश नहीं हो जाती, वे नहीं टर्रा सकते हैं।

सभी चिड़ियाँ उदास होकर एक पेड़ पर बैठ गयी। उनको उदास देख वह पेड़ बोला : चिड़ियाँ रानी, में तुम्हारे और मेंढक की बातें सुन रहा था। 

जबतक बरसात नहीं होती हैं, तबतक जंगल सूखा रहेगा।
में एक उपाय बताता हूँ सुनो : तुमसब आज शाम के समय अपनी चोंच में तालाब से पानी भरकर लाना और धीरे - धीरे इन मेंढक पर छिड़कना।

मेंढक को शाम के समय कम दिखायी देता हैं। मेंढक सोचेंगे कि बारिश ही रही हैं। जैसे ही कुछ मेंढक टर्राना शुरू करेंगे पूरा जंगल उनकी टर्र,टर्र से गूँजने लगेगा और बरसात होगी।

जंगल की सभी चिड़ियाँ ने उस पेड़ की बात मानी, जब शाम हुयी तो पूरा जंगल मेंढ़क की आवाज से गूँज उठा।

बादल को भी इसी का इंतजार था। बादल ने बहुत पानी बरसाया, अच्छी बारिश हुयी।

बरसात के कारण पूरा जंगल में हरियाली छा गयी। इस बार सभी चिड़ियों के अंडे सुरक्षित थे।

कुछ दिन बाद चिड़ियों के अंडों में से बच्चें निकले। यह देख चिड़ियाँ बहुत खुश हुयी, उन्होंने बच्चों को उड़ना सिखाया और वे दूर - दूर जाकर अनाज चुनने लगे।

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