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Thursday, 9 August 2018

Vikram Betal ki kahani - चोर क्यों हँसा और क्यों रोया | बेताल की छठी कहानी

एक समय की बात हैं, अयोध्या नगरी में वीरकेतु नामक राजा राज करता था। उसके राज्य में बहुत चोरियाँ हो रही थी, लेकिन चोर पकड़ में नहीं आ रहा था।

एक दिन राजा ने खुद ही चोर को पकड़ने का मन बनाया, उसके सभी मंत्री ने राजा को मना किया लेकिन राजा बहुत वीर और हठी था।

जब रात हुई तो राजा एक चोर का भेष बनाकर राज्य में निकला, कुछ देर बाद उसे एक आदमी ने पकड़ लिया और डाँटते हुए उसका नाम पूछा।

Vikram vetal ki image

राजा भी चोर की तरह घबराते हुए उससे माफी माँगने लगा,
इसपर उस व्यक्ति ने कहा, में भी चोर हूँ, मैंने इस राज्य के सभी धनवान व्यक्ति के यहाँ चोरी की हैं। तुम घबराओ नहीं आज से हम दोनों साथ मिलकर चोरी किया करेंगे।

अब राजा और चोर दोनों मित्र बन गए, उस चोर ने राजा को अपने चोर बनने की परिस्थिति बतायी की मजबूरी में उसे चोर बनना पड़ा, फिर उस चोर ने कहा कि में अब चोरी छोड़ना चाहता हूँ।

इसपर राजा चकित हो गया, उसने चोर से इसका कारण पूछा..? इसपर चोर ने उसे अपनी प्रेमकहानी बतायी।

एक रात चोर जब चोर चोरी करने जा रहा था, तभी उसे एक लड़की दिखी जो छुपकर चोरी से आम तोड़ रही थी।

चोर ने उस लड़की की मदद की फिर दोनों की बहुत बातें हुई, चोर ने उस लड़की से बताया कि वो चोर हैं, और परिस्थिति ने उसे चोर बनाया है, लड़की चोर की बातों से प्रभावित हो गयी और फिर उन दोनों में प्यार हो गया।

चोर अब चोरी छोड़ कर अच्छा इंसान बनना चाहता था, राजा ने देखा कि उसके राज्य में एक भी सिपाही गस्त नहीं लगता था, वह चोर के साथ आसानी से घूम फिर रहा था।

कुछ देर बाद चोर, राजा को एक खंडहर में ले गया, और उसने अपना सारा चोरी किया हुआ धन राजा को दिखाया।

राजा को इसी समय की प्रतीक्षा थी, राजा ने चोर को गिरफ्तार कर लिया, चोर को फांसी की सजा हुई।

जब उस लड़की ने सुना कि चोर को फांसी की सजा होने वाली हैं तो उसने अपने पिता सेठ रतनसेन से अपनी प्रेमकहानी बतायी और चोर को बचाने के लिए निवेदन करने लगी।

सेठ रतनसेन ने अपनी बेटी मनु को रोता देख राजा के गया और राजा से उस चोर को छोड़ देने के लिए निवेदन किया।

सेठ रतनसेन राजा के दरबार में पहुँचा और उसने चोर के द्वारा चोरी किये गए धन को हर्जाना के साथ लौटने की बात कही, लेकिन राजा ने फिर भी उस चोर को माफ नहीं किया।

इसपर चोर बहुत जोर-जोर से रोने लगा और फिर ठहाके लगाकर हँसने भी लगता  हैं।

उसी समय सेठ की पुत्री मनु दरबार में आयी, उसने राजा से कहा, महाराज अगर आप चोर को माफ नहीं कर सकते तो मुझे उनके साथ फांसी दे दीजिए, क्यों कि में  चोर से प्यार करती हूँ, उसके बिना में जीवित नहीं रह सकती हूँ।

यह सुब राजा ने उस चोर को माफ कर दिया, दरअसल राजा यह जानना चाहता था कि जिस लड़की से चोर इतना प्यार करता हैं कि वह चोरी छोड़ अच्छा इंसान बनना हैं।
क्या वह लड़की भी चोर से इतना प्यार करती है कि नहीं।

राजा ने खुद चोर और मनु की शादी करवायी और चोर को अपनी सेना में सेनापति बनाया , इतनी कहानी सुनाने के बाद बेताल ने विक्रम से एक सवाल किया।

सवाल - चोर पहले जोर - जोर से रोया और फिर हंसने भी लगा, तो चोर किसलिए रोया और किसलिए हँसा ?

विक्रम का जबाब - चोर ने देखा कि मनु के पिताजी एक चोर को बचाने के लिए इतना प्रयत्न कर रहे हैं, लेकिन चोर को फाँसी होगी, वह अपनी किस्मत पर रोया।

और चोर ने देखा कि मनु और उसके पिताजी को कोई पसंद नहीं आया शादी करने के लिए एक चोर ही पसंद आया, इन बात पर वह हँसा।

जबाब सुनते ही बेताल उड़ कर वापस उस पेड़ पर जा लटका क्यों कि शर्त यह थी कि विक्रम को कुछ बोलना नहीं है।

Vikram betal stories - बेताल की कहानियाँ

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