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Tuesday, 21 August 2018

sher aur chuha ki kahani - शेर और चूहा की कहानी

शेर और चूहा की कहानी


एक दिन की बात हैं, जंगल का राजा शेर पेड़ के नीचे सोकर खर्राटे भर रहा था।

जिस जगह पर शेर सोया था, वहाँ पास में एक नटखट चूहा का बिल था।

शेर की तेज खराटे के कारण चूहा परेशान हो बिल से बाहर निकला, शेर को देख चूहा घबरा गया।

लेकिन शेर गहरी नींद में सोया था, शरारती चूहे को शरारत सूझी, वह शेर की पीठ पर चढ़ गया और जोर-जोर से उछलने लगा।

उसकी उछलने से शेर की नींद खुल गयी, उसने झटके से चूहे को पकड़ लिया, और बोला - मूर्ख चूहा....तुमने मेरी नींद खराब की हैं, अब में तुम्हें मार डालूँगा।

शेर को गरजता देख चूहा काँपने लगा, उसके साँसे अटक गई।

चूहा बोला - महाराज, मुझे माफ कर दीजिए, आप तो जंगल के राजा हैं, मुझ जैसे छोटे चूहे को मार कर आपको क्या मिलेगा। लेकिन अगर आप मुझे छोड़ देंगे तो में भी कभी आपके काम जरूर आऊँगा।

चूहे की बात सुनकर शेर को बहुत हंसी आयी, वह हँसते हुए बोला - तुम एक चूहा मेरे क्या काम आओगे, लेकिन तुमने मुझे हँसाया है इसलिए में तुम्हें छोड़ रहा हूं।

कुछ दिन बाद की बात हैं। चूहा बिल के बाहर घूम रहा था, तभी उसकी नजर उस शेर पर गयी, आज वह शिकारी द्वारा बिछाये गए जाल में फँसा था।

चूहा शेर के पास गया और बोला - महाराज...याद आया मैंने कहा था की में जरूर आपके काम आऊँगा। में अभी इस जाल को काट देता हूँ।

चूहे ने अपनी नुकीली दाँतों से जल्दी ही उस जाल को काट दिया, शेर बाहर आ गया।

शेर बोला - मुझे माफ़ करना चूहा, उस दिन मैंने तुमपर हंसा था, लेकिन आज से हम दोनों दोस्त हैं।

उसके बाद चूहा और शेर में दोस्ती हो गयी, चूहा शेर की पीठ पर बैठता और घूमता था, दोनों में गहरी मित्रता हो गयी।

सिख - इस कहानी से हमें शिक्षा मिलती है कि कभी भी हमें दूसरों को कम नहीं समझना चाहिए, हर छोटी - बड़ी चीज का अपना अलग महत्व होता हैं। जिस चीज को हम छोटा समझते हैं, अक्सर वही चीज मुश्किल वक्त में काम आती हैं।

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