Saturday, 18 August 2018

Hindi Story For Class 2 - हिंदी कहानी कक्षा 2 के लिए



कहानी - साथी की सहायता - Hindi story for class 2


एक बालक था, उसकी उम्र 11 वर्ष थी। एक दिन वो अपने पिता के पास गया और बोला - पिताजी...मुझे 5 - 7 रुपये दे दीजिए।


Hindi story for class 2
Hindi story for class 2

पिताजी ने पूछा - तुम्हें 5 - 7 रुपये किसलिए चाहिए ?

बालक बोला - मुझे इन रुपयों की जरूरत है।

पिताजी ने बालक को 5 रुपये दे दिये, लेकिन वो जानना चाहते थे कि आखिर बालक इन रुपयों को किस काम में खर्च करता है।

बालक सीधा अपने साथी के घर गया, पिताजी भी चुपके से उसके पीछे चल पड़े....बालक ने अपने साथी को बुलाया और फिर दौनों बाजार की ओर चले गए।

बाजार में पुस्तकों की एक दुकान थी, वहां दोनों रुक गए, बालक ने एक पुस्तक खरीदी और अपने साथी को दे दी, उसके साथी को इन पुस्तकों की बहुत जरूरत थी।

पिताजी सबकुछ समझ गये, वे बहुत खुश थे कि उनके बेटे ने साथी की मदत की हैं।

पिताजी ने बेटे को बुलाया और कहा - बेटा, तुमने बहुत अच्छा काम किया है। अपने साथियों की सहायता करना बहुत अच्छी बात है।

इस बालक का नाम चितरंजन दास था। जो बड़े होकर देशबंधु चितरंजन दास कहलाये, उन्होंने देश की बहुत सेवा की, जिसके कारण लोग इन्हें प्यार से देशबंधु कहने लगे।


कहानी - फूल कुमारी - Hindi story for class 2


एक था राजा, एक थी रानी उसकी बेटी थी फूल कुमारी। फूल कुमारी बहुत हँसमुख थी। उसे अगर कुछ भी अजीब दिखता तो वो जोर - जोर से हँसने लगती थी।

Class two hindi story
Hindi story for class 2

एक दिन की बात हैं, राजा रानी और फूल कुमारी राज्य के शाही बग़ीचे में बैठे थे।

उसी समय फूल कुमारी को जोरों की हँसी आ गयी और वो जोर से हंसने लगी।

यह देख राजा ने फूल कुमारी से कहा - बिना बात के इतना क्यों हंसती हो।

छोटी सी फूल कुमारी इस बात से नाराज हो गयी।

अब वह हमेशा अपने घर में ही रहती थी। ना बगीचा जाती ना खेलने जाती, वो उदास रहने लगी थी।

उसे उदास देख राजा रानी और सभी लोग उदास रहने लगे।

एक दिन एक व्यक्ति आय उसने कहा - महाराज इस नगर के पेड़,पौधें, चिड़ियाँ, बच्चें सभी उदास हो गये हैं।

यह सुन राजा गये फूल कुमारी के पास उससे कहा - फूल कुमारी हँसो देखो सब उदास हैं। राजा ने उसे बहुत हँसाने का प्रयास किया लेकिन फूल कुमारी नहीं हंसी।

तब राजा ने ये घोषणा किया कि जो कोई भी फूल कुमारी को हँसा देगा उसे बहुत सारा ईनाम दिया जायेगा।

ये सुन भालू वाला आया, उसने भालू का नाच दिखाया, लेकिन फूल कुमारी नहीं हंसी।

फिर बंदर वाला आया उसने भी बंदर का नाच दिखाया लेकिन फिर भी फूल कुमारी नहीं हँसी।

अब एक पेट वाला बकरी पर बैठ कर आया, उसका बड़ा सा पेट था। उसने अपने बकरी के साथ नाचना सुरु ही किया की उसकी नकली मूंछे जमीन पर गिर गयी।

उसने अपनी नकली मूंछे उठाई तभी उसकी दाढ़ी गिर गयी।

उसने जैसे ही अपनी दाढ़ी उठाई उसका बड़ा सा पेट जमीन पर गिर गया। उसके पेट का सारा कपड़ा खुल गया।

यह देख राजकुमारी जोर - जोर से हँसने लगी। उसके साथ राजा रानी लोग और पेड़ पौधें चिड़ियाँ सभी हँसने लगे।

राजा ने उस पेट वाले जोकर को बहुत सारा ईनाम दिया, और फिर से पूरा नगर हँसी खुशी से रहने लगा।


कहानी - सबकी सुराही - Hindi Story for class 2


एक थी सुराही, बहुत ही सुंदर मजबूत, उसपर सुंदर-सूंदर बेल बूटे बने थे।

भीमा सुराही को बार-बार देख खुश हो सोचने लगा कि मेरी मेहनत से ही यह सुराही इतनी सुंदर बनी है।

hindi story for class two
Hindi story for class two

वह थका हुआ था, सोचते - सोचते उसे नींद आ जाती हैं, और वह जल्दी ही सपना देखने लगता हैं।

उसने सपने में देखा कि सुराही के पास रखी मिट्टी हिली और कहने लगी - सुराही ओ सुराही, मैने तुम्हें बनाया सूंदर रूप तुम्हारा मुझसे ही हैं आया।

मिट्टी की आवाज सुन पास में रखे बाल्टी का पानी छलका और बोला - मिट्टी रानी ओ मिट्टी रानी, मेहनत सारी मेरी मैंने इसे बनाया, तुम तो धूल की ढेरी थी।

मिट्टी और पानी की बात सुनकर भीमा का चाक भी चुप नहीं रह पाया, उसने बोला - तुम दोनों थे कीचड़ मिट्टी इस सचाई को जान लो बनी सुराही मेरे कारण इस बात को तुम मान लो।

पानी मिट्टी और चाक की बात सुनकर बुझती आग भी कहने लगी - तुमसब बातें कच्ची करते, कच्चा है काम तुम्हारा तपकर मुझमे बनी सुराही असली काम हमारा।

भीमा ने सबकी बातें सुनी और बोला - सब चुप हो जाओ,  चलो सुराही से ही पूछते है।

सुराही ने जब यह सवाल सुना तो वह बोली - किसी एक का काम नही ये सबकी मेहनत सबका काम, मिलजुल कर कर सकते है अच्छे-अच्छे सूंदर काम।


साहसी बालक की कहानी - Hindi Story For Class 2


पूर्णचन्द्र नाम का एक बालक था। वो प्रतिदिन अपने गाँव की पाठशाला में पढ़ने जाया करता था।

उसे पढ़ने लिखने का बहुत शौक था, वो पाठशाला से आकर थोड़ा खेलता और फिर पढ़ने बैठ जाता था।

sahasi balak ki kahani
साहसी बालक की कहानी

एक दिन की बात हैं, पूर्णचन्द्र पाठशाला से आकर खेलते-खेलते थक गया था। उसने थोड़ा खाना खाया फिर चारपायी पर लेट गया।

वह थका तो था ही उसे जल्दी ही गहरी नींद आ गयी, नींद में उसे कुछ लोगों के भागने और चिल्लाने की आवाज सुनाई दी।

पूर्णचन्द्र घबराकर उठ गया, उसने देखा कि सचमुच लोग भाग रहे थे, उसके गाँव में आग लग गयी थी।

आग पूरे गाँव में फैल चुकी थी, पूर्णचन्द्र के विद्यालय के नजदीक के झोपड़ी में भी आग लगी हुयी थी।

इतने में एक जलती हुई लकड़ी विद्यालय के ऊपर गिरी, पाठशाला का दरबाजा बन्द था, उसपर ताला लगा हुआ था।

पूर्णचन्द्र ने कुछ सोचा और वह एक बांस के सहारे पाठशाला की छत पर चढ़ गया, पाठशाला की छत फुस की थी।

लेकिन छत में आग पकड़ती उससे पहले ही पूर्णचन्द्र ने जलती लकड़ी नीचे फेंक दिया।

लोगों ने जब एक बालक को इस तरह से अपने पाठशाला की सुरक्षा करते देखा तो वो भी भागना छोड़ आग बुझाने में जुट गये।

और इस तरह पूरे गाँव के लोग इधर-उधर भागना छोड़कर आग पर पानी डालने लगे, इसके कारण कुछ ही समय पूरी आग बुझ गयी।

इस तरह एक साहसी बालक के कारण पूरा गाँव जलने से बच गया, गाँव के लोगों ने पूर्णचन्द्र की तारीफ की, उसे पाठशाला की तरफ से इनाम मिला।

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दोस्तों, ये सभी कहानी कक्षा दो की पुस्तक की हैं। कक्षा दो की अन्य कहानी तथा अन्य सभी कक्षाओं की कहानी भी इस भारती हिंदी वेबसाइट पर अपडेट होती रहेगी, इस वेबसाइट पर बच्चों के लिए अच्छी-अच्छी रोचक कहानियाँ, कविता, फूल, फल जानवर आदि के रोचक तथ्य आदि उपलब्ध हैं।

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