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Tuesday, 5 June 2018

Vikram Betal - विक्रम बेताल की सम्पूर्ण 25 कहानियाँ हिंदी में पढ़ें

Vikram Betal - विक्रम बेताल की सम्पूर्ण 25 कहानियाँ हिंदी में पढ़ें


विक्रम बेताल की पहली कहानी

Vikram-betal~ प्राचीन समय की बात हैं। विक्रमादित्य नाम के एक महान राजा हुआ करते थे। राजा विक्रमादित्य हमेशा अपनी प्रजा का भला करते थे, उनके यहाँ से कोई भी व्यक्ति खाली हाथ नहीं लौटता था। राज्य के लोग भी अपने राजा से बहुत प्यार और उनका सम्मान करते थे।
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Vikram - betal

विक्रमादित्य प्रतिदिन सुबह पूजा करने के बाद अपनी प्रजा से मिलते थे। कुछ दिनों से उनके यहाँ एक साधु आकर उन्हें एक फल भेंट करता और वापस चला जाता था।

राजा जब फल काटते थे तो उसके अंदर एक बहुमूल्य रत्न मिलता था। एक दिन सुबह जब
विक्रमादित्य उस साधु से मिले, तो उन्होंने साधु के द्वारा भेट किया गया सारा रत्न उन्हें वापस लौटा दिया और इस तरह एक रत्न भेंट करने का कारण पूछा।

साधु ने कहा - "महाराज मुझे आपसे एक महत्वपूर्ण चीज मांगनी थी , इसलिए में आपका ध्यान आकर्षित करने के लिए ये रत्न भेंट कर रहा था"

विक्रमादित्य के कहा - "वैसे तो ये रत्न बहुत महत्त्वपूर्ण हैं। लेकिन आपको इससे भी महत्वपूर्ण चीज क्या चाहिए "

साधु को इसी समय की प्रतीक्षा थी। उस साधु ने राजा विक्रमादित्य से एक रात्रि का समय मांगा। और कहा कि महाराज एक पूरी रात्रि आप मेरे आदेश का पालन करेंगे।

राजा के सैनिक तुरंत उस साधु को बंदी बनाने लगे। लेकिन विक्रमादित्य ने उसे कहा ठीक हैं। आप स्थान बता दीजिए में जरूर आऊँगा।

रात में विक्रमादित्य उस साधु के बताए अनुसार उससे मिलने जंगल पहुँचे। साधु एक पेड़ के नीचे बैठ कर कुछ जादू की सिद्धि कर रहा था। उसके पास एक मुर्दा का कंकाल था। एक तलवार थी। दो मानव की खोपड़ी और नींबू थे , जिसमें से खून बह रहा था।

साधु ने कहा विक्रमादित्य तुम यहाँ से दक्षिण दिशा में जाओ सुनसान जंगल में जाने पर तुम्हें एक खंडहर मिलेगा जहाँ एक सूखा पेड़ हैं। उस पेड़ पर (बेताल) मुर्दा लटक रहा हैं। तुम्हें उस बेताल को मेरे पास लाना हैं।

विक्रमादित्य उस दिशा में चले गए। सुनसान जंगल था।
तरह - तरह की आवाज आ रही थी। लेकिन विक्रमादित्य उस खंडहर के पास पहुंच गए। वे जैसे ही पेड़ पर चढ़े वह मुर्दा नीचे गिर गया। विक्रम नीचे आते तो वह बेताल ऊपर जा लटकता था। 

कुछ ही देर में राजा विक्रम ने उस बेताल को पकड़ लिया और अपने कंधे पर लटका ले जाने लगे।

बेताल जोर - जोर से हंसने लगा। उसने कहा- "सुन विक्रम में तेरे बस में आने वाला नहीं हूं। जिसने तुम्हें मेरे पास भेजा हैं वो महा धूर्त हैं। अब ध्यान से सुन में तुझे एक कहानी सुनाता हूँ अगर फिर एक सवाल पूछुंगा अगर तूने जबाब दे दिया तो ठीक वरना में तेरे सर के टुकड़े - टुकड़े कर डालूंगा"

दोस्तों ये थी राजा विक्रमादित्य और बेताल के मिलने की कहानी इसके बाद बेताल ने राजा विक्रम को एक - एक करके पूरी 24 कहानियाँ सुनायी

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