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Thursday, 7 June 2018

महान कौन राजा या सेनापति - Vikram Betal Story In Hindi

महान कौन राजा या सेनापति -Vikram Betal Story In Hindi

 विक्रम बेताल की तीसरी कहानी

कनकपुर नगर का राजा बहुत ही प्रतापी और निष्ठावान था। वो हमेशा अपने राज्य के लोगों के भलाई के लिए कार्य करता था।

एक दिन उसके दरबार में एक व्यापारी आया और भेंट के रूप में उसने राजा को दो नर्तकियाँ भेंट की..!!

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राजा को इस बात पर क्रोध आ गया। उसने कहा राज्य के व्यापारी को अपने राज्य की कोई चिंता नहीं, ये नर्तकी भेंट करने आये हैं। इसलिए इनसे पूरा कर वसूल करो..!!

राजा की प्रशंसा पूरे राज्य में होने लगी।
उस राज्य के नगर सेठ की एक सुंदर गुणवान बेटी थी। सेठ ने सोचा की क्यों ना हम अपनी पुत्री का विवाह अपने प्रतापी राजा से करवायें।

विवाह का प्रस्ताव लेकर सेठ अपने राजा से मिले। राजा ने इस विषय पर विचार करने के लिए कुछ समय मांगा।

कुछ दिन बाद राजा की ओर से एक मंत्री को सेठ के घर लड़की देखने भेजा गया।

मंत्री जब सेठ के घर से वापस आ रहे थे। तब वह व्यापारी जिसे राजा ने दंड दिया था। रास्ते में मिल गया। 

उसने मंत्री को उल्टा सीधा सीखा दिया। और मंत्री भी उस व्यापारी की बात समझ नहीं पाये और उन्होंने राजा से यह कहा कि लड़की आपके योग्य नहीं हैं।

राजा के ओर से विवाह से इनकार कर संदेश भेज दिया गया।
यह सुनकर सेठ को बहुत दुख हुआ।

अगले दिन सेठ विवाह प्रस्ताव लेकर उसी राज्य के सेनापति के पास पहुंचा। 

सेनापति ने प्रस्ताव स्वीकार कर लिया और अब सेठ की पुत्री का विवाह उस राज्य के सेनापति से ठीक हो गया।

एक दिन की बात हैं, राजा घूमने के लिये निकले थे। और संयोग से उनकी नजर उसी सेठ की पुत्री पर गयी। 

राजा के पूछने पर पता चला कि ये उसी सेठ की पुत्री हैं। जिसका प्रस्ताव राजा ने इनकार कर दिया था।

राजा को सेनापति से उस लकड़ी का विवाह ठीक होने की बात पता नहीं थी। उसने लकड़ी के पिता के पास विवाह प्रस्ताव भेजवा दिया।

यह बात सेनापति को पता चली तो उसने सेठ को प्रस्ताव स्वीकार करने के लिए कहा और उसने सेठ की पुत्री को भी समझा बुझा कर राजी कर लिया।

अब राजा और सेठ की पुत्री का विवाह एक महीने बाद तय हो गया।

इधर जब उस मंत्री को यह बात पता चली, तो उसने सोचा एक गलती मैंने उस व्यापारी की बातों में आकर कर चुका हूं।
अब अगर राजा को विवाह के बाद यह पता चलेगा कि सेठ की पुत्री का विवाह सेनापति से तय था। तो उनका क्रोध मेरे ऊपर ही होगा।

इस डर से एक दिन उसने अकेले में राजा को पूरी बात बता दी। राजा ने उस व्यापारी से चुप रहने को कहा..!!

विवाह के दिन पूरी तैयारी होने के बाद राजा ने यह बात सबको बतायी और सेनापति का विवाह सेठ की पुत्री से करवा दिया।

यह कहानी सुनाने के बाद बेताल ने विक्रम से किया सवाल -

बता विक्रम किसका त्याग बड़ा कौन महान राजा या सेनापति? जल्दी बता विक्रम कौन महान?

विक्रम ने कहा - सुन बेताल सेनापति का त्याग बड़ा सेनापति महान।

क्यों कि राजा ने इसलिए त्याग किया कि सेठ की पुत्री का विवाह सेनापति से तय हो गया था। लेकिन सेनापति ने सिर्फ अपने राजा के लिये त्याग किया था। वो चाहता तो पहले ही राजा को सब बता देता लेकिन उसने त्याग किया था..!! इसलिए सेनापति महान हुआ उनका त्याग बड़ा हुआ।

बेताल बोला जबाब तो तुमने ठीक दिया विक्रम लेकिन मेरी शर्त थी कि तू बोलेगा नहीं ,पर तु बोला और में चला।

बेताल फिर उस डाल पर जा लटका विक्रम वापस गये बेताल को अपने वश में किया और लाने लगे...फिर बेताल ने चौथी कहानी सुनायी।

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