विक्रम बेताल की कहानी | सोमप्रभा का स्वयंबर | Vikram Betal Ki Kahani


राजा विक्रम ने बेताल को वश में किया और उसे अपनी पीठ पर बिठा तांत्रिक के पास ले जाने लगे, बेताल भी बड़ा अजीब था उसने विक्रम से राखी शर्त की 'तुम्हें कुछ बोलना नहीं हैं, अगर तुमने बोला तो में वापस उस पेड़ से जा लटकूँगा.' इतना बोलने के बाद बेताल ने कहानी शुरू की।


एक समय उज्जैन नगर में राक्षसों ने उत्पात मचा रखा था। राजा और सभी मंत्री इस बात से बहुत चिंतित रहते थे।

उसी राज्य का एक मंत्री था। जिसे राज्य के अलावा अपनी पुत्री का विवाह करने की चिंता थी।

उसकी पुत्री थी सोमप्रभा। वह बहुत ही सुंदर और गुणवान थी।

एक दिन की राक्षस ने उसी मंत्री के घर पर आक्रमण कर दिया। 

सैनिकों ने वीरता दिखाते हुए राक्षस को तो भगा दिया।

लेकिन राक्षस जाते जाते उन्हें यह कह गया कि वो एक दिन आएगा और सोमप्रभा का अपहरण कर ले जाएगा।

मंत्री ने सोचा हमें सोमप्रभा का विवाह जल्दी से कर देना चाहिए। उसके बात से पूरा परिवार सहमत था।

एक दिन मंत्री राज्य के काम से कुछ स्वर्ण जंगल के रास्ते से ले जा रहा था।

रास्ते में लुटेरों ने उस पर हमला कर दिया , सारे सैनिक घायल हो गए। तभी एक युवक जो शिकार खेलने आया था।

वह आया और सभी लुटेरों से अकेले ही युद्ध किया । उसके साथ युद्ध में लुटेरे घायल हो भाग गए।

उस वीर युवक को देख मंत्री ने सोचा क्यों ना हम अपनी पुत्री का विवाह इससे ही कर दें। 

मंत्री के पूछने पर वह वीर राजी हो गया।

इधर एक कवि सोमप्रभा के सुंदरता पर एक कविता लिख उसे भेंट करने आया था।

मंत्री की पत्नी उसकी बुद्धि और कविता से बहुत प्रभावित हुई और उसने सोमप्रभा का विवाह उस कवि से तय कर दिया।

उसी दिन मंत्री का पुत्र जो रिश्तेदार के यहाँ से लौट रहा था। उसने एक ऐसे शिल्पकार को देखा जो लकड़ी का रथ बना रहा था।

वह रथ हवा में उड़ता था। मंत्री पुत्र के निवेदन किया तो उस शिल्पी ने उसे उस रथ में बैठा कर घुमाया।

मंत्री पुत्र ने सोचा सोमप्रभा के लिए ये उपयुक्त वर होगा। और उसने उस सोमप्रभा का विवाह उस शिल्पी से तय कर दिया।

रात में जब तीनो घर आये तब उनको ज्ञात हुआ कि हम तीनों ने सोमप्रभा का विवाह तय कर लिया हैं।

इसलिए मंत्री ने एक स्वयंवर का आयोजन किया। सोमप्रभा जिसके गले में माला पहनती उसी से उसका विवाह होना था।

विवाह के दिन तीनों युवक अपने घर से विवाह के लिए निकले। मंत्री के यहाँ तीन बारात आने वाली थी।

इसी बीच उस राक्षस का आक्रमण हुआ और उस राक्षस ने  सोमप्रभा का अपहरण कर लिया।

जब तीनों युवक विवाह के लिए आये तब उन्हें ये ज्ञात हुआ की सोमप्रभा का अपहरण राक्षस ने कर लिया हैं।

शिल्पी ने अपने रथ को तैयार किया , कवि को राक्षस के विषय में ज्ञान था और वीर अपना अस्त्र - शस्त्र लिए रथ में बैठ गया। 

वे सोमप्रभा को ढूंढने लगे , कवि को पता था राक्षस किस जगह होंगे... शिल्पी के विमान से वे तुरंत राक्षस के पास जा पहुँचे।

वीर ने अपना धनुष निकाला और उस राक्षस के साथ बहुत युद्ध किया। अंत में वह राक्षस मारा गया।

वे सोमप्रभा को अपने साथ लेकर मंत्री के घर पहुँचे।

स्वंवर शुरू हुआ , सोमप्रभा माला लिए हाथों में आ गयी।
मंत्री ने कहा - जिसके गले में सोमप्रभा माला डालेगी उसी से सोमप्रभा का विवाह होगा।

इतनी कहानी सुनाने के बाद बेताल ने विक्रम से किया सवाल......?

बता विक्रम सोमप्रभा किसे अपना वर स्वीकार करेगी ? 

उस शिल्पी को जिसके विमान की मदद से सोमप्रभा को जल्दी ढूंढ लिया गया।

उस वीर से जिसने राक्षस के साथ युद्ध किया।

उस कवि से जिसकी बुद्धि से राक्षस का पता चला।

बोल विक्रम जल्दी बता सोमप्रभा किसे माला डालेगी..?

विक्रम ने कहा - सुन बेताल माना कि विमान से वो जल्दी पहुँच सके। 

ये भी ठीक हैं की कवि की बुद्धि से राक्षस का पता लगा। 

लेकिन क्या होता अगर वीर उस राक्षस से ना युद्ध करता तो।

ये उस राक्षस के पास पहुँच कर भी कुछ नहीं कर सकते थे। 

लेकिन वीर ने सोमप्रभा को राक्षस से बचाया , इसलिए सोमप्रभा वीर के गले में माला डालेगी।

बेताल ने कहा - विक्रम तूने ठीक कहा सोमप्रभा ने वीर के गले में माला डाली. 

लेकिन तू भूल गया मेरी शर्त ये थी कि तू बोलेगा नहीं और तू बोला इसलिए में जा रहा हूँ।

और बेताल का पेड़ से जा लटका , विक्रम वापस उस पेड़ के पास गए और उस बेताल को वश में किया और फिर बेताल ने विक्रम को पाँचवी कहानी सुनायी।

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