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Thursday, 14 June 2018

Vikram And Betal Stories - दोषी कौन विक्रम बेताल की पाँचवी कहानी

Vikram And Betal Stories - दोषी कौन विक्रम बेताल की पाँचवी कहानी

एक समय की बात हैं काशी नगरी के राजकुमार और दिवान के बेटे में गहरी दोस्ती थी।

एक दिन वे शिकार खेलने जंगल गये थे। उन्हें एक भी शिकार नहीं मिला तो थककर वे एक पेड़ के नीचे बैठ गए।

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कुछ ही देर में दीवान के बेटे को नींद आ गयी लेकिन राजकुमार वन में इधर - उधर घूमने लगा।

उसी समय राजकुमार की मुलाकात वन में आयी एक सुंदर लड़की से हुई जो वो अपने सहेलियों के संग वन में घूमने आई थी।

राजकुमार उसपर मोहित हो गया और उसने उस लड़की से उसका नाम और पता पूछा।

उस लड़की ने राजकुमार से कमल का फूल दिखाकर कहा ये हैं मेरा नाम।
फिर उसने अपने कान के गहने को पैरों से लगाया और कहा ये हैं पता।

फिर उसने दाँतों की तरफ इशारा करते हुये कहा - ये हैं मेरे पिताजी की पहचान।

अगर आप ये पहेली सुलझा लें तो आप जरूर मुझसे मिलने आईये।

राजकुमार वापस आया और महल पहुँचकर उसने ये पहेली अपने मित्र को बतायी।

मित्र ने कहा - देखो कमल का फूल यानी कि कमला या पदमा हैं उसका नाम। 

कानों के गहने को पैरों से लगाकर मतलब कि कान के गहने को कनक और पैरों से दिखाया यानी पुर तो उसका पता हैं "कनकपुर"

और दाँतों के तरफ इशारा करते हुए कहा मतलब उसके पिता दाँतों के चिकित्सक हैं।

राजकुमार ने अपने मित्र से कहा - हम आज ही कनकपुर चलते हैं। और वे घूमने का बहाना बना कनकपुर चले गये। 

कनकपुर में उन्हें एक बूढ़ी औरत ने अपने यहाँ ठहरने दिया।

भोजन करते समय राजकुमार ने पूछा - इस नगर में दाँतों के चिकित्सक रहते हैं क्या? उनकि बेटी का नाम पदमा हैं।

उस औरत ने कहा - हाँ बेटा यहाँ से कुछ ही दूरी पर वैद्य का घर हैं, उनकी बेटी का नाम पदमा हैं।

अगले दिन राजकुमार और उसका मित्र वैद्य से मिलने पहुँचा, उसने पदमा से विवाह करने का प्रस्ताव उसके पिता के सामने रखा।

वैद्य ने उसका प्रस्ताव स्वीकार कर लिया और उसने राजकुमार के पिता से मिलने की बात कही।

इधर उस कनकपुर के राजा ने पदमा से शादी का प्रस्ताव उसके पिता को भेज दिया।

अब वैद्य सोच में पड़ गए क्योंकि कनकपुर का राजा बड़ा ही क्रोधी था उसका प्रस्ताव मना करने पर वह इन सबको फाँसी पर चढ़ा देता।

वैद्य ने राजकुमार से सारी बातें बतायी और उससे माफी मांग कर पदमा का विवाह उस राजा के साथ तय दिया।

राजकुमार और उसका मित्र बहुत ही सोच में पड़ गये, उन्होंने उस कनकपुर राज्य के बारे में उस बूढ़ी औरत से पूछा और उस राज्य के नियम के बारे में जानना चाहा।

उस औरत ने बताया इस राज्य में बहुत कठोर नियम हैं। इस राज्य का राजा नियम तोड़ने पर किसी की सजा माफ नहीं करता।

इस राज्य में अगर किसी स्त्री पर या उसके चरित्र पर संदेह हो तो उसे राज्य से बाहर निकाल दिया जाता हैं।

इतनी बात सुनते ही राजकुमार ने कहा - मेरे पास एक उपाय हैं, जिससे हम भी पदमा को इस राज्य और राजा के चंगुल से निकाल लेंगे।

उसने रात्रि में पदमा से उसके गहने मंगवा लिए और सुबह राजा के पास साधु का वेश बनाकर पहुंच गया।

उसने राजा से कहा - राजा देख तेरे राज्य में क्या हो रहा हैं। में रात में जंगल में ध्यान कर रहा था। तभी एक स्त्री मेरे पास आई और मेरे ध्यान में विघ्न डालने लगी।

तो मैंने उस स्त्री पर क्रोध करके उसके सारे गहने छीन लिए और राजा से शिकायत की बात कही तब जाकर वो स्त्री जंगल से वापस लौटी।

साधु के हाथ में वही गहना था जो राजा ने पदमा को विवाह के प्रस्ताव के समय दिया था।

राजा ने पदमा पर संदेह कर के उसे राज्य से निकाल दिया। राज्य के बाहर राजकुमार के लोग पहले से मौजूद थे।

वे पदमा को अपने साथ काशी नगरी ले गये। और बाद में राजकुमार और पदमा का विवाह हुआ।

इतनी कहानी सुनाने के बाद बेताल ने विक्रम से किया एक सवाल , बता विक्रम दोषी कौन राजकुमार जिसने पदमा से विवाह करने के लिये उसके चरित्र पर आरोप लगाया।

की वह राजा जिसने पदमा को बिना सोचे - समझे राज्य से निकल दिया।

बता विक्रम दोषी कौन ?

विक्रम ने कहा - सुन बेताल राजा दोषी हैं। क्यों कि राजकुमार ने पदमा से गहने माँगे और उसने पदमा को राज्य से बाहर निकलने और विवाह करने के लिये ये सब किया।

लेकिन राजा जिसने पदमा को बिना पूछे कुछ सोचे समझे बिना ही उसे राज्य से निकाल दिया इसलिए राजा दोषी हुआ।

बेताल ने कहा - सही उत्तर दिया तुमने विक्रम राजा दोषी हुआ। बहुत अच्छा न्याय करता हैं तू राजा विक्रम मेरी शर्त भूल गया, मेरी शर्त थी कि तू बोलेगा नहीं लेकिन तुमने बोला और में चला।

बेताल फिर उस डाल से जा लटका, अगले बार जब विक्रम बेताल को ले जा रहे थे। बेताल ने उन्हें एक कहानी सुनायी।


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