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Sunday, 17 June 2018

नर्सरी के बच्चों के लिए अच्छी कहानियाँ - Nursery Stories In Hindi

नर्सरी के बच्चों के लिए अच्छी कहानियाँ - Nursery Stories In Hindi



1. कछुआ और हंस की मित्रता 


एक बहुत ही सुंदर जंगल था। उस जंगल में एक कछुआ और दो हंसों में गहरी मित्रता थी।

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तीनों एक तालाब के पास रहते थे, कछुआ तालाब में रहता था, और हंस तालाब के किनारे जामुन के पेड़ पर रहता था।

वे दिनभर बातें करते और अच्छी-अच्छी कहानियाँ सुनाते और वन के सभी पक्षी इनकी कहानियाँ सुनने आया करते थे।

इस साल बारिश नहीं हुई यही जिसके कारण जंगल में अकाल पड़ गया था।


हंस ने कहा : मित्र कछुआ जंगल के सभी पक्षी और जानवर अब दूसरे जंगल जा रहे हैं, हमें भी चलना चाहिए।

कछुआ ने कहा : मित्र हंस तुम एक लकड़ी का टुकड़ा लेकर आओ उसे दोनों अपनी चोंच से पकड़ लेना और में बीच में पकड़ लूंगा, फिर जब तुम उड़ोगे तो में भी तुम्हारे साथ रहूँगा।

हंस ने कहा : ठीक है मित्र लेकिन तुम कुछ बोलना मत और कभी भी अपना मुंह मत खोलना नहीं तो तुम नीचे गिर जाओगे।

दोनों हंसों ने लकड़ी को किनारे से चोंच में पकड़ लिया और कछुआ बीच में फिर वे उड़ने लगे। कछुआ भी उनके साथ उड़ रहा था। 

कछुआ को इस तरह उड़ते देख गांववालों ने शोर करने लगे, देखो देखो कछुआ उड़ रहा हैं।


कछुआ कुछ देर चुप रहा लेकिन उससे रहा नहीं गया और उसने कहा : अरे क्यों शोर कर रहे हो, हंस उड़ रहा हैं में तो पकड़ा हूँ।

बस इतना बोलते ही उसका मुंह खुल गया, और वह नीचे गिरने लगा और वह जमीन पर आ गिरा, गांव के लोगों ने कछुआ को पकड़ लिया। हंस अपने मित्र से बिछुड़ कर बहुत दुखी हुआ।

शिक्षा - बोलने पर नियंत्रण रखना चाहिए, सोच समझ कर बोलना चाहिए।


 2. आलसी कबूतर 


एक जंगल में एक बरगद का पेड़ था। उस पेड़ पर कबूतरों का झुंड रहता था। 

एक दिन की बात हैं, जंगल में एक शिकारी आया, शिकारी बरगद पेड़ पर चढ़ गया और वह कबूतरों के घोसलों से अंडे निकाल ले गया।

कबूतरों को बहुत दुख हुआ उन्होंने कहा, यह बरगद का पेड़ बहुत छोटा और नीचे हैं, इसपर शिकारी आसानी से चढ़ जाते हैं, हमें दूसरे पेड़ पर घोंसला बनाना चाहिए।

सभी कबूतर एक जामुन के पेड़ पर गए, वह पेड़ बहुत ही ऊंचा और लंबा था।

कबूतरों ने अपना घोंसला उस पेड़ पर बना लिया। उस झुंड में एक बूढ़ा और अनुभवी कबूतर भी था। घोसला बनाने के बाद वह पेड़ के बारें में जानकारी खोज रहा था।

तभी उसने देखा कि पेड़ की जड़ में कुछ जंगली झाड़िया उग रही हैं, और वे पेड़ पर चढ़ रही हैं।

कबूतर ने अपने साथियों से कहा : सुनों मित्रों इस जंगली झाड़ी को अभी उखाड़ दो नहीं तो शिकारी इस झाड़ी के सहारे फिर पेड़ पर चढ़ जायेगा।

सब कबूतर घोसला बना कर आराम कर रहे थे, उन्होंने अपने बुजुर्ग कबूतर की बातें को अनसुनी कर दिया।

कुछ दिन बाद एक शिकारी आया उसने जामुन के पेड़ पर कबूतरों का घोसला देखा। पेड़ बहुत ऊंचा था, इतनी ऊंचाई पर चढ़ पाना मुश्किल था।

फिर उस शिकारी की नजर उस झाड़ पर गयी जो पेड़ से चिपक ऊपर तक गयी थी।

शिकारी उस झाड़ी के सहारे पेड़ पर चढ़ गया और फिर उसने कबूतरों के अंडे निकाल लिए।


सभी कबूतर अपने बुजुर्ग की बात नहीं मानने के कारण पछता रहे थे। 

अगली बार जब उन्होंने एक नए पेड़ पर घोसला बनाया तो उस बुजुर्ग कबूतर की बातें मानी और शिकारी उनके अंडे तक नहीं पहुंच सका।

शिक्षा - अपने से बड़ों की बातें माननी चाहिए।



3. मैना पक्षी और बच्चें


गाँव के पास एक विद्यालय थी। उस विद्यालय में गाँव के छोटे बच्चे पढ़ते थे। 

जब उनकी छुट्टी होती तो रास्ते मे एक जामुन के पेड़ के पास वे रुकते थे। उस पेड़ पर एक मैना ने अपना घोंसला बनाया था।


बच्चें मैना से कहते : सुनो मैना पक्षी हमें कुछ जामुन गिराओ।

मैना बच्चों की आवाज सुनकर पके जामुन गिराती थी। बच्चे जामुन खाकर बहुत खुश होते थे।

एक दिन की बात हैं। मैना पक्षी कही दूर दाना चुनने चली गयी थी। वह वापस लौटते समय अपना रास्ता भूल गयी। 

मैना के घोंसला में उसके बच्चें बहुत चिंतित थे। उन्होंने घोंसला के बाहर देखना चाहा, लेकिन वे जमीन पर गिर गए।

मैना के बच्चों को डर लग रहा था, कहीं कौआ उन्हें देख ना ले. नहीं तो कौआ उन्हें मार डालेगा।

उसी समय विद्यालय की छुट्टी हुयी और विद्यालय के बच्चें उस पेड़ के पास आये।

उन्होंने मैना के बच्चो को देखा, वे समझ गए कि मैना आज पेड़ पर नहीं हैं। 

विद्यालय के बच्चो ने मैना के बच्चों को वापस उनके घोसलों में पहुंचा दिया।

कुछ समय बाद मैना पक्षी वापस उस पेड़ आप आयी। मैना ने अपने बच्चों से उनका हाल पूछा।

उन्होंने बताया कि आज विद्यालय के बच्चों ने उसे घोसलें में सुरक्षित पहुँचाया। मैना ने उन्हें बहुत धन्यवाद दिया।

शिक्षा - कर भला हो भला।


4. किसान और गोरैया पक्षी


एक गाँव में एक किसान रहता था। उसके घर के पास एक आम का पेड़ था जिसपर एक गोरैया का झुंड रहता था।
गोरैया के झुंड को किसान हमेशा अनाज के दाने खिलता था। वो गोरैया से बहुत प्यार करता था।

लेकिन किसान की पत्नी गोरैया के झुंड के शोर से परेशान रहती थी। उसे गोरैयों का शोर पसंद नहीं थी। वो कहती कि इन गोरैयों को हमनें बेकार ही अपने घर के पास रहने दिया हैं।

एक समय की बात हैं। किसान ने खेत में अनाज के दाने बोयें, कुछ दिन बाद उसके खेत में अनाज के पौधें उगे, किसान बहुत खुश था।

एक दिन गोरैया ने देखा कि किसान खेत में उदास बैठा हैं। गोरैया ने किसान से जाकर पूछा, किसान दादा आप उदास क्यों बैठे हो?

किसान ने कहा : क्या करूँ जंगली टिड्डे के आने का समय हैं। आसपास के सभी किसानों ने अपने खेतों में दवा डाल दी हैं। 

अब अगर टिड्डे आएंगे तो वे सिर्फ मेरे खेत के पौधों को नुकशान करेंगे। में टिड्डों को रोकने की दवा लेने गया था, लेकिन दुकान में अभी दवा खत्म हो गयी हैं।

गोरैया ने कहा : किसान दादा आप चिंता मत करो हम आपके खेतों की रक्षा करेंगे।

अगले दिन सुबह टिड्डे का एक बड़ा सा झुंड खेतों में आया। सभी खेतों में दवा की गंध आ रही थी। इसलिए टिड्डे ने किसान के खेत पर आक्रमण कर दिया।

किसान और उसकी पत्नी घबरा गए, उन्होंने एक दो टिड्डों को भगाया लेकिन टिड्डे का पूरा झुंड पौधों को नुकशान पहुँचाने लगा।


उसी समय गोरैया का पूरा झुंड आया। पूरे झुंड की गोरैया ने मिलकर सभी टिड्डे को भगा दिया।

किसान और उसकी पत्नी बहुत खुश हुये, किसान की पत्नी ने गोरैयों से कहा : में गोरैयों को महत्व नहीं देती थी लेकिन आज इन पक्षियों ने मेरा दिल जीत लिया हैं।

शिक्षा - मुश्किल में दूसरों की सहायता करनी चाहिए, जैसे गोरैया के झुंड ने किया।


5. चतुर लोमड़ी 


एक दिन की बात हैं। एक लोमड़ी शाम के समय घूम रही थी। तभी अचानक वो एक कुएं में जा गिरी।

लोमड़ी ने बहुत प्रयास किया लेकिन वो बाहर नहीं निकल पायी, और पूरी रात उसे उस कुएं में ही रहना पड़ा।


सुबह एक बकरी आयी उसने कुएं में देखा तो उसे लोमड़ी दिखी।

बकरी बोली : अरे तुम वहां क्या कर रही हो लोमड़ी ?

लोमड़ी को इसी समय की प्रतीक्षा थी, लोमड़ी मुस्कुराते हुए बोली : इस कुएं में बहुत मीठा पानी हैं। तुम भी आओ पी लो पानी।

बकरी बिना कुछ सोचे समझे कुएं में कूद गई, लेकिन अंदर जाने पर उसे पानी मीठा नहीं लगा।

बकरी बोली अब पानी तो पी लिया लेकिन ऊपर कैसे जाऊँगी।

लोमड़ी ने कहा : सुनो में तुम्हारे ऊपर चढ़ कर ऊपर जाती हूँ , फिर में तुम्हारे भी ऊपर आने का कोई रास्ता बनाऊंगी।

बकरी खड़ी हो गयी और लोमड़ी उसके ऊपर चढ़कर ऊपर आ गयी।

ऊपर आने के बाद लोमड़ी बोली तुम मूर्ख हो कुएं का पानी पीने के लिए कोई नीचे जाता हैं क्या, इतना बोल लोमड़ी जंगल चली गयी। और बकरी कुएं में फंस गई।

शिक्षा - बिना सोचे समझे कोई भी कार्य नहीं करना चाहिए।
Thanks For Reading This Nursery Stories In Hindi

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