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किसान और उसके चार बेटों की कहानी - kisan ke char bete ki kahani

किसान के चार बेटे और लकड़ी का गट्ठर 


सुंदरपुर गाँव में एक बूढ़ा किसान रहता था। उसका नाम मोहनलाल था। उसके चार बेटे थे। वह बहुत सुखी सम्पन्न था। उसके पास किसी चीज की कमी नहीं थी, उसकी गिनती गांव के धनी लोगो में होती थी।

isan ke char bete ki kahani
किसान और उसके चार बेटों की कहानी

मोहनलाल के पास बहुत सारा खेत था, वह अपनी मेहनत से बहुत अनाज उगाता था। उसके अनाजों से गांव की मंडी भरी रहती थी। लेकिन किसान जब भी घर आता वह अपने चारों बेटे को आपस में लड़ते - झगड़ते देखता था।

इस बात से किसान को बहुत दुख होता था। वह अपने चारों बेटों को समझाता लेकिन किसी एक के भी बात समझ में नहीं आती थी।  किसान जैसे ही बाहर जाता वे आपस में झगरने लगते थे।

किसान ने अपने बेटों को समझाने के लिये एक उपाय सोचा, एक दिन की बात हैं, किसान अपने घर एक बड़ा सा लकड़ी का गट्ठर लेकर आया और उसनें अपने चारो बेटों को बुलाया।

किसान ने कहा : तुम्हें इस लकड़ी के गट्ठर को बिना अलग किये एक साथ तोड़ना हैं।

उसके चारों बेटों ने पूरी ताकत से लकड़ी के गट्ठर को तोड़ने का प्रयास किया लेकिन किसी से भी वह गट्ठर टूट नहीं सका। सब थककर बैठ गये। 

अब किसान ने उस गट्ठर को खोल दिया और गट्ठर की एक - एक लकड़ी सबके देते हुये बोला - यह लो एक एक लकड़ी और अब इसे तोड़ दो। 

इस बार चारों ने एक, एक लकड़ी उठायी और उसे बड़े ही आसानी से तोड़ दिया।

लेकिन उसके बेटों को बात समझ में नहीं आयी और एक ने किसान से पूछ लिया , पिताजी आपने हमें ऐसा करने के लिये क्यो कहा...?

किसान ने कहा - जब सभी लकड़ी एक थी। वे आपस में बंधे हुए थे। तो तुमने कितना भी कोशिस किया लेकिन तोड़ नहीं सके।

जैसे ही लकड़ी को अलग कर दिया गया, तो तुमने उसे बड़ी ही आसानी से तोड़ दिया।

ठीक उसी लकड़ी के समान तुम चारों भी हो.......तुम हमेशा आपस में झगड़ते रहते हो तुम्हारे अंदर जरा सी भी एकता नहीं हैं।

तुम ऐसे ही आपस में अलग होकर रहोगे तो किसी भी समस्या में फंस कर हार जाओगे।

लेकिन अगर चारों एक होकर रहोगे, आपस में कभी झगड़ा नहीं करोगे तो तुमें कोई भी नहीं हरा पायेगा।  जैसी तुम उस लकड़ी के गट्ठर को तोड़ नहीं पाए थे। 

अगर तुम आपस में मिलजुल कर रहोगे तो कैसी भी समस्या को तुम आसानी से सुलझा सकते हो।

अब तुम्हें सोचना हैं कि तुम आपस में प्यार से एक होकर रहना चाहते हो कि झगड़ते हुए अलग रहना चाहते हो..?

उसके चारों बेटों को बात समझ में आ गयी। उन्होंने किसान से वादा किया आज के बाद हम भी आपस में कभी भी झाडृ नहीं करेंगे , हम भी मिलजुल कर रहेंगे। 

***

दोस्तों इस कहानी में जो किसान ने समझाया हैं, वो बिल्कुल सच हैं। एक कहावत तो आपने सुनी ही होगी की एकता में बल होती हैं। 

पिता उस नीम के पेड़ की तरह हैं
जिसका पत्ता भले की कड़वा हो 
लेकिन वह छाया हमेशा ठंडी ही देता हैं।

दोस्तों आशा करता हूँ कि ये किसान के चार बेटे कहानी आपको अच्छी लगी होगी। आपको यह कहानी अच्छी लगी हो तो कृपया इसे शेयर करना मत भूलें।
दोस्तों आपसे निवेदन हैं कि इस कहानी का (part -2) पढ़ना ना भूलें, पार्ट -2 में किसान ने अपने चारों बेटों को मेहनत करना सिखाया हैं।

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