Wednesday, 13 June 2018

शिक्षाप्रद हिंदी कहानी- बुद्धिमान मेंढक | Hindi kahani Buddhiman Mendhak

शिक्षाप्रद हिंदी कहानी- बुद्धिमान मेंढक | Hindi kahani Buddhiman Mendhak


एक बहुत ही घाना जंगल था। उस जंगल के एक तालाब में कुछ मेंढक रहते थे। इस साल बरसात ज्यादा हो रही थी, जिससे जंगल में बाढ़ आने वाली थी।नदी के सभी मेंढक ने सोचा अगर पानी की गति तेज होंगी तो हम सब बह जाएंगे, इसलिए हमें पहाड़ पर चले जाना चाहिए। 
Mendhak ki kahani
बुद्धिमान मेंढक



कुछ मेंढक पहाड़ पर चढ़ने लगे, वे कुछ दुरी पर पहुंचे ही थे तभी हल्की बारिश होने लगी।

नीचे खड़े कुछ मेंढक भी थे  जिन्हें बाद में पहाड़ पर चढ़ना था , उन्होनें आवाज दिया , अरे भाइयों बारिश शुरू हो गयी हैं , ज्यादा ऊपर मत चढ़ो , उतर जाओ नहीं तो उपर से गिर जाओगे।

यह सुन के मेंढक उतरने लगे और जो आगे जा सकते थे, वे भी डर के कारण तुरंत नीचे आ गए ।

लेकिन एक मेंढक चढ़ा जा रहा था , सबने उसे बहुत आवाज लगाया। चिल्ला - चिल्ला कर रोकने की कोशिश किया।

लेकिन वह चढ़ा ही जा  रहा था ....सबने कहा यह पागल हैं।
इसे मरना हैं मरने दो।

कुछ देर बाद उसके पैर फिसलने लगे लेकिन वह हाथों के सहारे और बड़ी ही कठिनाइयों के बाद भी पहाड़ पर चढ़ गया।

बाकि मेंढक नीचे ही रह गए, इस साल बारिश तो हुई लेकिन बाढ़ नहीं आई सभी मेंढक मरने से बच गए।

जब बरसात खत्म हुई तो सब मेंढक गए उस मेंढक के पास पहाड़ पर, और जाकर उस मेंढक से जाकर पूछा - भाई तुम पहाड़ पर कैसे चढ़ गए हमें भी बताओ , ताकि आगे से हम भी चढ़ सकें।

उस मेंढक ने कहा - मुझे ये बात मालूम थी कि अगर हल्की बारिश भी हुई तो नीचे खड़े अन्य मेंढक मुझे नीचे आने के लिए कहेंगे जिससे मेरा ध्यान चढ़ने से हट जायेगा और में डर कर नीचे आ जाऊँगा।

इसलिए में जब ऊपर चढ़ने लगा तब मेनें अपने दोनों कान को तिनके से बंद कर लिया था।

इसलिए जब वह पहाड़ पर चढ़ रहा था। तब बाकि के मेंढक यह सुनकर की - 'बारिश में फिसल कर गिर जाओगे' हिम्मत हार गए।

लेकिन मेंने ये सुना ही नहीं कि चढ़ना असंभव हैं।

में तो बस आगे चढ़ता गया, चढ़ता गया और अंत में वह पहाड़ की चोटी तक पहुंच गया।

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