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हंस किसका - Hindi Kahani For Kids

हंस किसका - Hindi Kahani For Kids


एक दिन सुबह के समय राजकुमार सिद्धार्थ अपने बगीचे में टहल रहा था।

बगीचा में फूलों की सुगंध थी, पक्षी चहचहा रहे थे , चिड़िया गाना गा रही थी। सिद्धार्थ को बहुत अच्छा लग रहा था।

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कुछ देर बाद चिड़ियों का चहचहाना बंद हो गया, वे इधर - उधर भागने लगे।

राजकुमार सिद्धार्थ के पैरों के नजदीक एक हंस आ गिरा, उसे तीर लगी थी. वह दर्द से तड़प रहा था।

सिद्धार्थ ने हंस को अपने गोद में उठाया, उसका तीर निकाला, और आराम से उसके घाव को धोकर उसपर मरहम पट्टी लगाया।

अब हंस को कुछ आराम मिला वह सिद्धार्थ की गोद में आराम से बैठ गया, सिद्धार्थ ने हंस को प्यार से पुचकार उसके पंखों पर हाथ फेरने लगा।

उसी समय सिद्धार्थ का भाई देवदत्त वहाँ आया , उसके हाथ में तीर कमान थे।

उसने कहा सिद्धार्थ इस हंस को मैंने तीर मारा हैं। ये मेरा हैं, तुम इसे मुझे दे दो।

सिद्धार्थ ने कहा इस हंस को मैंने बचाया हैं, इसलिए ये मेरा हंस हैं।

देवदत्त शिकायत ले राजा के दरबार में जा पहुँचा।

राजा ने दोनों की बात सुनी , सिद्धार्थ ने हंस को बचाया था। और देवदत्त ने उसका शिकार किया था।

राजा ने कहा सुनो देवदत्त तुमने इस हंस को तीर मारा लेकिन
सिद्धार्थ ने उसके घाव पर मरहम लगाया इसलिए ये हंस सिद्धार्थ का हुआ।

वो हंस सिद्धार्थ का हो गया, वह हमेशा उनके पास रहा।

शिक्षा - दोस्तों इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती हैं कि मारने वाला से ज्यादा अधिकार बचाने वाला का होता हैं।

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