Friday, 8 June 2018

अच्छी कहानियाँ - "ख़रीदी गयी बात" | Achi Kahaniya

अच्छी कहानियाँ - "ख़रीदी गयी बात" - Achi Kahaniya


प्राचिन काल की बात हैं। एक व्यापारी का लड़का जंगल घूमने जा रहा था।

उसी समय उसकी नजर एक व्यक्ति पर गयी जो कि "बातों की दुकान चला रहा था."

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उसके यहाँ लोग जाते और मूल्य देकर एक बात खरीदते थे।
व्यापारी का लड़का भी वहाँ गया और उसने सौ स्वर्ण मुद्रा की बात ख़रीदी..!!

सौ स्वर्ण मुद्रा की बात ये थी - " अगर दो लोगों के झगड़े से सुरक्षित निकलना हो तो तीसरी बात बीच में छेड़ देनी चाहिए"

व्यापारी का लड़का ख़रीदी गयी बात से संतुष्ट नहीं था। वह बिना कुछ बोले आगे बढ़ गया।

जंगल पहुँच कर वह इधर - उधर घूम रहा था। तभी उसने देखा कि शिकार खेलने आये मंत्री पुत्र ने एक हिरण को तीर मारा, वह हिरण तीर लगने से झाड़ियों में भागने लगा।

ठीक उसी समय राजकुमार भी आया और उसने एक दूसरा तीर हिरण पर चलाया..!!

हिरण वही मर गया। लेकिन मंत्री पुत्र और राजकुमार दोनों हिरण पर अपना हक बताने लगे।

दोनों फ़ैसले के लिए राजा के दरबार में पहुँचे...!! और साक्ष्य के रूप में दोनों इस व्यापारी के लड़के को ले गये।

मंत्री पुत्र का कहना था कि हिरण जी पहले तीर मैंने मारा था।

राजकुमार का कहना था कि हिरण मेरे तीर से मरा..!!

राजा ने इन दोनों की बात सुनी लेकिन कोई फैसला नहीं आ रहा था।

राजा के कुछ सलाहकार मंत्री पुत्र को सच बता रहे थे। और कुछ राजकुमार को सच बता रहे थे।

राजा जब किसी नतीजे पर नहीं पहुँचे तो दोनों ने साक्ष्य के रूप में व्यापारी पुत्र को बुलाया।

राजा ने व्यापारी पुत्र से पूछा कि बताओ - हिरण का शिकार किसने किया..?

व्यापारी पुत्र की तरफ राजकुमार और मंत्री पुत्र दोनों देखने लगे..!! 

उसी समय व्यापारी पुत्र को खरीदी गयी बात याद आयी।

व्यापारी पुत्र ने बीच में तीसरी बात छेड़ते हुये कहा -" महाराज सच तो ये हैं कि हिरण को मैंने तीर मारा था और वह झाड़ियों में जाकर गिरा था।

लेकिन व्यापारी पुत्र के पास ना तो तीर था , ना ही धनुष।

इसलिए झूठ बोलने के अपराध में उसे पंद्रह कोड़े लगाकर छोड़ दिया गया।

व्यापारी का पुत्र गुस्से में सीधा उस व्यक्ति के पास पहुँचा जिसने उसने वो बात खरीदी थी।

उस ज्ञानी ने कहा - देखो तुम दो लोगों के झगड़े से सुरक्षित आ गये। अगर वहाँ तुम राजकुमार का पक्ष लेते तो बाद में मंत्री पुत्र तुम्हें नहीं छोड़ता 

अगर तुम मंत्री पुत्र का पक्ष लेते तो राजकुमार तुम्हें बाद नहीं छोड़ता।

तुमने बीच में तीसरी बात छेड़ दी और पंद्रह कोड़े खाकर सुरक्षित आ गए। अब कोई तुम्हारा शत्रु नहीं बना।

व्यापारी पुत्र को बात समझ में आ गयी। उसने ज्ञानी व्यक्ति को धन्यवाद दिया और घर वापस आ गया।

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