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Hindi Short Stories With Moral - तितली के संघर्ष की कहानी

तितली के संघर्ष की कहानी


मदन नाम का एक पाँच साल का लड़का था। वह शाम के समय अपने बगीचे में टहल रहा था।

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तितली का संघर्ष

उसी समय उसकी नजर एक पत्ते पर बने तितली के छत्ते पर गयी। जिसमें से एक तितली का बच्चा बाहर पत्ते पर गिर गया। शायद वह अपने अंडे से बाहर निकलने का प्रयास कर रहा था।

वह बहुत कोशिश कर रहा था , लेकिन अंडे के खोल से बाहर निकलना उसके लिए बड़ा कार्य था।

मदन उस बच्चे को बहुत ध्यान से देख रहा था। लेकिन बहुत देर बाद भी गया वह बच्चा अभी थोड़ा ही बाहर निकल पाया था।

मदन को उस तितली के बच्चे पर तरस आ गया। उसने एक तिनका उठाया और बहुत ही आराम से अंडे के खोल को अलग कर दिया।

तितली का बच्चा अब बाहर तो निकल गया, कुछ देर वह पत्ते पर चला लेकिन फिर मर गया। मदन को बहुत आश्चर्य हुआ। उसनें तो उस बच्चे की मदद की थी।

उसी समय मदन अपनी माँ के पास गया और पूरी बात बताई और पूछा कि वो तितली का बच्चा क्यों मर गया ?

मदन की माँ ने बताया - संघर्ष...जब वह तितली का बच्चा अपने खोल से निकलने की कोशिश कर रहा था , ठीक उसी समय उसके पंख और टांग मजबूत हो रहे थे।

तुमने उसे अंडे से तो बाहर निकाल दिया, लेकिन उसके पंख अभी उस लायक नहीं थे कि वह उड़ता और ना उसके टांग  इतने मजबूत थे की वह चलता, इसलिए वह बाहर आने के तुरंत बाद मर गया।

तुम्हें उसे प्रयास करने देना चाहिए था। अगर वो खुद प्रयास कर के अंडे से बाहर निकलता तो वह कभी भी नहीं मरता।

यह संघर्ष ही हैं जो मजबूत बनाता हैं, संघर्ष करने वाले को हमेशा सफलता प्राप्त होती हैं, इसलिए जीवन में संघर्ष जरूरी हैं।

दो लकड़हारे की कहानी


एक बार की बात हैं। लकड़ी के व्यापारी ने दो लकड़हारों को अपने यहां काम पर रखा। 

उन्हें नई कुल्हाड़ियाँ दी और कहा कि जो जितनी ज्यादा लकड़ी कटेगा उसे उतना ज्यादा पैसा मिलेगा।

पहले दिन दोनों लकड़हारे जंगल गये और दस-दस पेड़ काट कर लाये, व्यापारी बहुत खुश हुआ।

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दूसरे दिन फिर दोनों जंगल गए, एक लकड़हारे ने 10 लकड़ी काटी और दूसरे ने 9 लकड़ी काटकर व्यापारी को दिया।

तीसरे दिन फिर वे गए जंगल एक ने 10 लकड़ी काटी दूसरे ने 8 काटकर व्यापारी को दिया।

और इस तरह पहला लकड़हारा तो रोज 10 लकड़ी लाता था, लेकिन दूसरा काम होकर सिर्फ 3 लकड़ी रोज लाने लगा, जबकि वो भी दिनभर उतनी ही मेहनत से लकड़ी काटता था।

एक दिन व्यापारी ने उस पहले लकड़हारे से पूछा - तुम रोज 10 लकड़ी कैसे काटते हो ? दूसरा तुम्हारे जितना मेहनत कर के सिर्फ 3 लकड़ी लाता हैं।

उसने कहा - में पूरे दिनभर का एक चौथाई समय बैठकर पत्थर से अपनी कुल्हाड़ी को धारदार बनाता हूँ।

जिससे में नई कुल्हाड़ी जितना लकड़ी काट पता हूँ। अगर लकड़ी काटना हैं तो सिर्फ मेहनत से नहीं होगा कुछ दिमाग भी लगाना पड़ेगा।

साधु और बिच्छू की कहानी


एक मंदिर में एक साधु रहते थे। वे रोज सुबह स्नान करने के लिए नदी जाते थे।

एक दिन वे स्नान करने पहुंचे तो उन्होंने एक बिच्छू को पानी मे डूबते देखा।

साधु ने उस बिच्छू को पानी से निकालना चाहा , तभी उस बिच्छू ने उन्हें डंक मार दिया।

साधु फिर से उसे निकालने लगे, लेकिन वह फिर साधु को डंक मारने लगा। 

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नजदीक खड़े एक व्यक्ति ने कहा - इस मूर्ख बिच्छू को देखो, ये उसे बचा रहे हैं और मूर्ख बिच्छू उन्हीं को डंक मार रहा है।

साधु ने बहुत प्रयास करने के बाद उस बिच्छू को बाहर निकाल लिया और उसे डूबने से बचा लिया।

उस व्यक्ति ने साधु से पूछा - जब आपको वह बिच्छू डंक मार रहा था, फिर आपने उसे क्यों बचाया ?

साधु ने सरलता से उत्तर दिया- यह तो स्वभाव हैं। बिच्छू का स्वभाव डंक मारने का होता हैं। और इंसान का स्वभाव हैं मुश्किल में दूसरों की सहायता करना है।

जब वह छोटा जीव अपना स्वभाव नहीं छोड़ सकता, तो में अपना स्वभाव कैसे छोड़ दूँ।

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दोस्तों इस कहानी से हमें बहुत अधिक प्रेरणा मिलती हैं, ये तीन बहुत ही प्रेरक कहानी हैं जो संघर्स की महत्ता, बुद्धि का उपयोग और इंसान के अंदर के गुणों को बताती हैं।

अगर आपको भी ये कहानियाँ अच्छी लगी हो तो इसे Share जरूर करें, नीचे भी कुछ प्रेरक कहानियाँ दी गयी है उसे जरूर पढ़ें।

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