Thursday, 31 May 2018

Panchtantra ki kahaniya in hindi | पंचतंत्र की कहानियाँ - शेर और बुद्धिमान सियार

Panchtantra ki kahaniya in hindi-

एक जंगल मे एक शेर रहता था। वह बहुत ही बलवान था। शेर का एक नौकर था सियार , वह बहुत ही चालक था। वह हमेशा शेर की आज्ञा मानता था , जिसके बदले शेर उसे अपने शिकार का कुछ हिस्सा खाने को देता था। एक दिन शेर की लड़ाई एक हाथी से हो गयी। शेर हाथी से लड़ते हुए बहुत घायल हो गया और हाथी के दांतों से उसे ऐसा घाव लगा कि अब वह चल भी नहीं पा रहा था।

Kahaniya in hindi

ऐसे में शेर और सियार दौनों भूखे रहने लगे। कुछ दिन बाद सियार ने कहा - महाराज आप यहाँ बैठिये , में किसी जानवर को आपके पास लाता हूँ , आप उसका शिकार कर लेना।


शेर एक पत्थर पर बैठ गया , सियार जानवर को ढूंढ रहा था। कुछ देर बाद उठाए एक गधा दिखाई दिया।


सियार ने गधे से कहा - अरे मित्र गधा...तुम यहाँ ये सुखी घास खा रहे हो इससे अच्छा हैं कि हमारे महाराज शेर के पास चलो वहाँ महाराज के उपवन में तुम्हें हरी - हरी घास खाने को मिलेगा और तुम्हें शेर की सेवा करने का मौका मिलेगा।

इसपर गधा बोला - तुमने मुझे मूर्ख समझा हैं क्या ? शेर मुझे खा जाएगा।

सियार ने कहा - मित्र शेर महाराज छोटे जानवरों का शिकार नहीं करते हैं। वे सिर्फ बड़े जानवरों का शिकार करते हैं।

गधे को सियार की बात पर विश्वास हो गया और वह सियार के साथ चलने लगा।

शेर उसी पत्थर पर बैठा था। गधा सावधान होकर शेर के पास गया। तभी शेर ने उसपर पंजे से वार किया। लेकिन गधा सावधान था , वह बचकर भाग गया। घायल होने के कारण शेर उसका पीछा नहीं कर सकता था।

इसपर सियार को गुस्सा आ गया। उसने गुस्से में शेर से कहा - क्या आप एक गधे का शिकार नहीं कर सकते।

शेर ने कहा - देखो मैंने वार किया लेकिन वह गधा सावधान था , इसलिए तुम एक बार फिर उसे लेकर आओ में इस बार उसका शिकार कर लूंगा।

सियार फिर गधे के पीछे - पीछे गया। कुछ दूर पर वही गधा उसे मिल गया। सियार ने कहा - अरे मित्र ...तुम डर क्यों गए।शेर तो पंजो से तुम्हारा स्वागत कर रहा था। चालों शेर ने तुम्हें बुलाया हैं , और इस बार वे पंजो से तुम्हारा स्वागत नहीं करेंगे।

सियार की बातों में गधा फंस गया...वह शेर के पास दोबारा गया। इस बार शेर तैयार बैठा था। उसने झट ही उस गधे का शिकार कर लिया।

अब उसे खाने की बारी थी। सियार ने शेर से कहा - महाराज आप पहले स्नान कर लें फिर इसे खायें।

शेर इधर स्नान करने गया और इधर सियार ने गधे का दिमाग खुद ही चट कर गया।

शेर जब वापस आया ,  उसने गधे से कहा - अरे मूर्ख सियार  तुमने इसे झूठा कर दिया।

सियार बहुत चालक था , वह झट बोला नहीं महाराज ऐसा नहीं हैं , मैंने इसका दिमाग नहीं खाया। यह गधा तो बिना दिमाग वाला था। अगर इसके पास थोड़ा भी दिमाग होता तो क्या ये दोबारा आपके पास आता। शेर भी सियार की चालाकी नहीं समझ सका और उसे अपने साथ खाने दिया।
इस तरह उस सियार ने गधा और शेर दौनों को मूर्ख बना दिया।

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