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Monday, 28 May 2018

पंचतंत्र की 15 सबसे अच्छी कहानियाँ - panchtantra ki kahaniya

Panchtantra ki kahaniya- पंचतंत्र की 15 प्रसिद्ध कहानियाँ जरूर पढ़ें 


1. ख़रगोश और शिकारी भेड़िया


एक जंगल में एक खरगोश रहता था। वह रोज शाम को खुले मैदान में घूमता और नरम - नरम घास खाता था।

एक दिन एक भेड़िया ने खरगोश को देखा , वह खरगोश का शिकार करने के लिए उसकी तरफ दौरा ,खरगोश जैसे - तैसे जान बचा कर वहाँ से भाग गया।
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Panchatantra

बेचारा इतना डर गया की वह दो दिन तक मैदान में गया ही नहीं ।

एक दिन जब ख़रगोश मैदान गया , उसनें थोड़ी घास खायी की फिर से वह भेड़िया आ धमका।

खरगोश जान बचा कर फिर भाग गया।

लेकिन वह उस भेड़िये से पदेशान हो एक बूढ़े बरगद के पेड़ के पास गया और अपनी समस्या उस पेड़ को सुनायी।

उस अनुभवी पेड़ ने कहा कि मैं यहां वर्षों से खड़ा हूँ , मैनें यही देखा हैं कि जो खरगोश डर जाते हैं , और दौड़ते समय किसी झाड़ी में फंस जाते हैं।

भेड़िया सिर्फ उन्हीं का शिकार करते हैं , क्यों कि खरगोश के दौड़ने की गति भेड़िया से बहुत ज्यादा हैं।

अगर तुम उससे डरना बंद कर दो तो वह तुम्हें कभी भी पकड़ नहीं पायेगा।

उस दिन के बाद वह भेड़िया कितनी भी कोशिस करता रह गया लेकिन वह कभी भी ख़रगोश को पकड़ नहीं सका।

शिक्षा - जिसे अपने आप पर भरोसा होता हैं , दुश्मन उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता हैं।


2. मूर्ख बिल्लियाँ और चालक बंदर


एक बंदर पेड़ की एक डाल पर बंदर बैठा हुआ था।

तभी अचानक दो बिल्लियाँ झगड़ती हुई आई , उनके पास एक रोटी थी और दौनों उस रोटी के लिए झगड़ा कर रही थी।

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पंचतंत्र
बंदर ने जब ये देखा तो वह एक तराजू लेकर आया और बोला - देखो में तुम दौनों को बराबर भाग में बांट देता हूँ ।

बंदर ने रोटी के दो टुकड़े किये और तराजू में रखा , तराजू एक तरफ थोड़ा झुक गया।

बंदर उसे बराबर करने के लिए रोटी से थोड़ा तोड़ खुद खा लिया। अब फिर तराजू उठाया।

इस बार भी तराजू दूसरी तरफ झुक गया , बंदर ने फिर एक टुकड़ा तोड़ा और खा लिया।

इसी तरह बंदर तराजू उठता और जिस तरफ तराजू झुकता उस तरफ से थोड़ा रोटी खा लेता था।

कुछ ही देर में बंदर ने सारा रोटी खा लिया और तराजू लेकर पेड़ पर चढ़ गया , बेचारी बिल्लियाँ देखती राह गयी।

शिक्षा - कभी भी आपस मे झगड़ा नहीं करना चाहिए


3.गिलहरी की नौकरी 


जंगल के राजा शेर की अनुमति से कुछ जानवर नौकरों की भर्ती कर रहे थे।

उस मे सभी छोटे - बड़े जानवर थे।

एक गिलहरी भी शेर की सेवा में जाना चाहती थी।

जंगल की दूसरी गिलहरियों ने उसे रोकने की कोशिश की लेकिन वह नहीं मानी और शेर के यहां नौकरी पर लग गयी।

शेर ने उसे सेवानिवृत होने पर एक थैला काजू देने का वादा किया।
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कहानी

गिलहरी शेर के यहां सारा दिन काम करती थी।

जब कुछ साल बीत गया तब उसे शेर ने सेवानिवृत कर के घर जाने का आदेश दिया।

और एक थैला काजू भी दिया।

लेकिन गिलहरी इससे खुश नहीं थी।

क्यों कि आप उसके दाँत काजू खाने ले लायक नहीं थे।

वह बूढ़ी हो चुकी थी। उसे अपने साथियों द्वारा कहीं गयी बात याद आ रही थी , सबने उसे रोकने की कोशिस की लेकिन वह नहीं मानी थी , उसे इस बात का पछतावा हो रहा था।

 शिक्षा - घर के लोग अगर कुछ कहें तो उसे समझना चाहिए , वे कुछ अच्छा सोच कर ही हमें बोलते हैं। उनकी बातों को अनसुनी नहीं करना चाहिये।


4. व्यपारी और कामचोर गधा


एक व्यापारी अपने गधा पर नमक की बोरी लाद बाजार जा रहा था।

रास्ते में एक नदी आती थी। जिसे पार करना होता था।

एक दिन गधा नदी पार करते समय पानी मे गिर गया।

उसके पीठ पर लदा सारा नमक पानी में घुल गया।

गधा जब बाहर आया तो उसका पीठ बहुत हल्का हो गया था।

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पंचतंत्र

गधा बहुत खुश हुआ , अगले दिन व्यापारी फिर नमक लेकर नदी पार कर रहा था।

उसका गधा जानबूझ कर फिर गिर पड़ा , सारा नमक पानी में घुल गया।

बेचारा व्यापारी बहुत दुखी हुआ। लेकिन उसे अपने गधे की चतुराई समझ आ गयी।

अगले दिन उसनें गधे पर रुई लाद लिया।

गधा जैसे ही नदी के पास पहुँचा वह फिर जानबूझ कर गिर गया , लेकिन इस बार उसके पीठ पर नमक नहीं रुई थी।

रुई पानी मे गीली होकर और भारी हो गयी। अब गधे के पीठ पर इतना वजन हो गया कि वह चल नहीं पा रहा था।

व्यापारी ने उसे सबक सिखाने के लिए कान खींच - खींच कर चलाया।

उसके बाद गधे ने फिर से गिरने की कोशिश भी नहीं किया।

शिक्षा - अपना काम पूरी ईमानदारी से करना चाहिए


5. वेबकूफ कौआ


एक दिन एक कौवे को मोर का कुछ बिखरा हुआ पंख मिल गया।

उसनें वो पंख अपने पंख में लगा लिया और कौए के समूह में गया और पूछा में कैसा दिख रहा हूँ ?

कौए ने उसे समझाया कि तुम बहुत सुंदर हो ,  ये मोर पंख तुम पर अच्छा नहीं दिखता।

लेकिन उसने अपने साथियों से बहुत उल्टा सीधा बोल वहां से उड़ गया।

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पंचतंत्र
वह हंस के पास गया, हंस उसे देख हंसने लगे , देखो इस कौए को मोर का पंख लगा कर घूम रहा हैं।

कौवा फिर वहाँ से उड़ा और चिडियों के पास गया , चिड़ियों ने भी उसका मजाक ही बनाया।

कौवा फिर उड़ा और मोरों के झुंड में गया।

मोर भी उसे देख हँसने लगे , क्या कोई मोर का पंख लग कर मोर बन जाता हैं , देखो इस मूर्ख कौए को।

अब कौआ समझ गया , वह गया अपने साथियों के पास और उनसे माफी मांगी और मोर का पंख निकाल फेंक दिया।

शिक्षा- इस कहानी से हमें ये बात सीखने को मिलती हैं कि हम अपने वास्तविक रूप में ही अच्छे हैं। हमें वैसे ही रहना चाहिए।

6. बुद्धिमान बंदर 


एक जंगल में एक बंदरों की टोली रहती थी। इस टोली में बहुत सारे बंदर रहते थे , एक दिन एक बूढ़े बंदर ने सभा बुलाई,सभी बंदर उस सभा मे आये।

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Panchtantra
अनुभवी और वृद्ध बंदर ने कहा - सुनो साथीयों इस जंगल के फल अब ज्यादा दिन नहीं रहेंगे, और अगर हम यहाँ से दूसरे जंगल नहीं गए यो नदी में पानी भर जाएगा बरसात आने वाली हैं , इसलिए मेरा कहना मानों और सभी दूसरे जंगल चलो।
लेकिन दूसरे बंदरों ने यह बात नहीं मानी और कहा कि जब ऐसा होगा तो सोचेंगे।

कुछ दिन आराम से बंदर उस जंगल मे रहे , लेकिन अब फल कम हो रहे थे। और नदी में पानी भर चुका था , अब सभी बंदर परेशान हो गए , अब जंगल में खाना था नहीं और नदी में पानी के कारण दूसरे जंगल में जाना कठिन था।

अब सभी बंदर को उस अनुभवी बंदर की बात याद आयी , सब उस बंदर के पास गए और समस्या बताई ।
उस बंदर ने कहा - एक तरीका हैं अगर हम सब एक बांस पर एक ही साथ चढ़े तो बांस झुक कर दूसरी तरफ जा पहुंचेगा और सब नदी पार कर लेंगे।

पहले वह बंदर चढ़ा और फिर धीरे - धीरे सभी बंदर उस एक बांस पर चढ़ गए , वह बांस वजन के कारण उस तरह जा झुका और सभी बंदर नदी पार कर गए

शिक्षा- इस कहानी से हमें यह सीख मिलती हैं कि हमेशा बड़ों का कहना मानना चाहिए , और मुश्किल के समय उनसे सलाह लेना चाहिए।


7. घमंडी बाज और मधुमक्खियाँ


एक पुराना बरगद का पेड़ था , उस पेड़ की एक डाल पर मधुमक्खियों का छत्ता था तो दूसरी डाल पर बाज का घोंसला। मधुमक्खियाँ बाज का बहुत आदर करती थी। उसे अपना पड़ोसी समझती थी। लेकिन बाज तो बाज ही था।

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पंचतंत्र

बिल्कुल घमण्डी वह उनसे कहता कि मैं तो बाज हूँ , मुझसे सभी पक्षी डरते हैं , तुम जैसी छोटी मक्खियों से मेरी क्या दोस्ती क्या रिश्ता। वह हमेशा मधुमक्खियों का मजाक बनाता था । एक दिन बाज पेड़ पर बैठ आराम कर रहा था । तभी उसे झाड़ में अपना शिकार दिखा। बाज उस पर झपट पड़ा लेकिन वह जाल में फंस गया...क्यों कि वहाँ शिकारी ने जाल बिछाया था और वह शिकार रुई का था , बेचारा बाज बहुत कोशिश किया लेकिन वह जाल से निकल नहीं पाया । वह तेज आवाज में मधुमक्खियां को बुलाने लगा।

मधुमक्खी ने जब बाज को जाल में देखा तो उन्होनें उस बाज को बचाने के लिए उस शिकारी पर टूट पड़ी , उसे डंक मार वहां से भागा दिया और फिर आराम से बाज ने खुद को जाल से बाहर निकाल लिया। उसके बाद बाज का घमण्ड टूट गया।
उसनें उन्हें धन्यवाद दिया और आगे से मित्रता से रहने लगे।

शिक्षा- दोस्तों सच्चा मित्र या पड़ोसी वही होता हैं जो मुशीबत में साथ दे। इसलिए हमें अपने दोस्तों के साथ पड़ोसी के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए और मुशीबत में उनका साथ देना चाहिए।


8. बुद्धिमान कुत्ता और मूर्ख गधा 


एक गाँव मे एक धोबी रहता था। उसके पास एक गधा और एक कुत्ता था , लेकिन धोबी इनकी चिंता बिल्कुल नहीं करता था , वह ना तो इन्हें अच्छा खाना देता और ना ही प्यार करता।

Panchtantra

गधा और कुत्ता दौनों धोबी से परेशान रहते थे। एक रात की बात हैं , गधा और कुत्ता दौनों एक ही खूंटे से बंधे थे तभी एक चोर घर में घुस आया। कुत्ते ने चोर को देखा लेकिन उसने अपने मालिक को नहीं जगाया, गधे ने कहा - अरे चोर चला जायेगा तुम भोंकते क्यो नहीं हो ?

कुत्ता बोला - जाने दो मालिक हमें ना तो अच्छा खाना देता हैं, और जरा सी गलती पर बहुत पीटता हैं। में नहीं भोकूँगा
गधे  ने कहा - अच्छा लेकिन मैं चुप नहीं रह सकता , इतना बोलकर गधा जोर - जोर से ढेंचू ढेंचू करने लगा।
धोबी बहुत गहरी नींद में सोया था , उसने जैसे ही गधे की आवाज सुनी उसे गुस्सा आ गया और उसने एक डंडा उठाया और गधे को पीटने लगे।
बेचारा गधा मार खाते - खाते बेहोश हो गया।

शिक्षा- दूसरों के काम में टांग नहीं अड़ाना चाहिए , और बुद्धि से काम लेना चााहिये


9. बुद्धिमान खरगोश


एक दिन की बात हैं , एक ख़रगोश झाड़ियों के पास से नरम - नरम मुलायम घास खा रहा था।

Panchtantra

और सोच रहा था कि अब रोज यहाँ आऊंगा और मुलायम घास खाऊंगा , इसी बीच
झाड़ियों से एक बड़ा चिता निकला और उसनें ख़रगोश को घेर लिया। बेचारा ख़रगोश बहुत डर गया लेकिन उसनें बुद्धि का उपयोग किया और कहा चीता महाराज अगर आप मुझे छोड़ देंगे तो में रोज एक ख़रगोश को आपके पास लेकर आऊंगा आप उसका शिकार कर लेना।
मूर्ख चीता ने सोचा कि एक ख़रगोश का शिकार करने से अच्छा हैं , की रोज एक का शिकार करूँ।
चीता ने कहा - ठीक हैं , लेकिन तुम आज से ही एक ख़रगोश को मेरे पास लाओगे।
ख़रगोश बोला - ठीक हैं, में अभी जाता हूँ। ख़रगोश वहां से जान बचा कर भाग गया। उसके बाद वह कभी झाड़ियों के पास नहीं गया।

शिक्षा- इस कहानी से हमें यह सीख मिलती हैं कि मुश्किल वक्त में घबड़ाने से अच्छा हैं कि बुद्धि से काम लेना चाहिए। जैसे उस बुद्धिमान ख़रगोश ने लिया और अपनी जान बचायी।


10. कौआ और चालक लोमड़ी


एक दिन की बात हैं। एक कौआ को एक रोटी मिला। कौआ रोटी लेकर उड़ता हुआ एक पेड़ की डाल पर आ कर बैठा। उसी समय उधर से एक लोमड़ी गुजर रही थी।  लोमड़ी कौए के पास आकर बोली - कौआ भाई कहाँ थे ?

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पंचतंत्र
कौआ कुछ नहीं बोला। लोमड़ी ने फिर कहा -कौआ भाई सुना हैं तुम बहुत अच्छा गाना गाते हो ? एक बार मुझे भी सुनाओ।

कौए ने तारीफ सुनी और उससे रहा नहीं गया, वह गाना गाने लगा।

जैसे ही कौआ ने अपना चोंच खोला रोटी नीचे गिर गया। लोमड़ी तो इसी का इंतजार कर रही थी, जैसे ही रोटी नीचे गिरी चालक लोमड़ी उसे लेकर जंगल भाग गई। मूर्ख कौआ देखता रह गया।

शिक्षा- मूर्ख को सब वेबकूफ बनाते हैं। इसलिए बुद्धिमान बनाना चाहिए।


         12. सोने का अंडा

एक किसान था , जिसके पास एक विशेष मुर्गी थी। वह मुर्गी रोज एक सोने का अंडा देती थी। किसान बहुत खुश था ,वह धीरे - धीरे धनवान होता जा रहा था। एक दिन की बात हैं किसान की पत्नी मुर्गी को दाना खिला रही थी। तभी उसने सोचा कि यह मुर्गी रोज एक अंडा देती हैं, तो इसके पेट मे कितना सारा अंडा होगा अगर हम ये अंडा एक ही दिन निकाल लेंगे तो बहुत जल्दी अमीर बन जाएंगे।

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पंचतंत्र
किसान शाम को घर आया तो उसकी पत्नी ने ये बात किसान को बताई। उसने भी सोचा ये तो सच बोल रही हैं , हम बहुत जल्दी अमीर बन जाएंगे।

किसान गया और उसने मुर्गी को मार डाला , जब उसका पेट देखा तो उसमें एक भी अंडा नहीं था। बेचारा किसान अपने किये पर पछता रहा था।

 शिक्षा- लालच बुरी बला हैं।


12. मूर्ख गधा चालक लोमड़ी


एक गाँव में एक किसान रहता था, उसके पास एक गधा था। एक रात गधा अपनी रस्सी तोड़ गाँव घूमने निकला। गधा कुछ दूर गया कि उसे एक लोमड़ी मिल गयी , अब दोनों साथ में घूम रहे थे ।  तभी उनकी नजर एक खेत पर गयी , खेत मे बहुत सारे पके तरबूज लगे थे। गधा ने कहा - अरे लोमड़ी देखो तरबूज चलो खाते हैं।

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पंचतंत्र
दौनों खेत मे गए और खूब तरबूज खाया , जब पेट भर गया तो गधा गाना गाने लगा।

लोमड़ी ने उसे रोकने की कोशिश की लेकिन गधा नहीं रुका ।
फिर लोमड़ी ने कहा - पहले मुझे चले जाने दो फिर तुम गाना गाना। इतना बोल लोमड़ी वहाँ से भाग गई और एक पेड़ के पास छुपकर देखने लगी।
गधा मस्ती में जोर - जोर से गाने लगा , तभी किसानों की नींद टूटी और उन्होंने गधे की डंडे से खूब पिटाई की।
बेचारा गधा वहां से भागते - भागते वापस अपने खूंटे के पास आ गया।

शिक्षा- समय के अनुसार होशियारी से काम लेना चाहिए , जैसे उस लोमड़ी ने लिया।


13. चींटी और कबूतर


एक दिन एक कबूतर पेड़ की डाल पर बैठा था। पेड़ के नीचे से नदी बहती थी , तभी कबूतर ने देखा कि एक चींटी नदी में डूब रही हैं और जान बचाने की कोशिस में लगी हैं। कबूतर ने एक सूखा पत्ता चोंच में पकड़ा और उस चींटी के पास गिरा दिया। चींटी उस पत्ते पर चढ़ कर किनारे आ गयी।

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कुछ दिन बीत गया एक दिन कबूतर उसी डाल पर बैठा था।

 एक शिकारी उसका शिकार करने के लिए तीर कमान लिए निशाना लगा रहा था।

तभी चींटी ने शिकारी को देख लिया , चींटी गयी और शिकारी के पैर में जोर से काटा शिकारी का निशाना चूक गया वह दर्द से चिल्लाते हुए भाग गया। कबूतर की जान बच गयी।

 शिक्षा- भला करने वालों का भी भला होता हैं।


14. चार ठग और मूर्ख किसान


एक किसान अपने बकरे को कंधे पर लेकर दूसरे गाँव जा रहा था।रास्ते में चार ठग ने कुछ उपाय सोंचा और चारों रास्ते मे खड़े हो गए।

किसान आगे  बढ़ा तो पहले ठग ने कहा - ये क्या किसान भाई इस लोमड़ी को कंधे पर लेकर कहाँ जा रहे हो?
किसान ने कहा - ये बकरा हैं। लोमड़ी नहीं।
आगे रास्ते में दूसरा ठग खड़ा था  , उसने किसान को देखा तो
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पंचतंत्र

बोला - ये क्या कर रहे हो तुम इस लोमड़ी को कंधे पर उठाया हैं। किसान ने कहा - ये तो बकरा हैं।

सब लोमड़ी क्यों बोल रहे हैं। ठग ने कहा नहीं ये बकरा नहीं लोमड़ी हैं। किसान उसकी बात अनसुनी करता हुआ आगे बढ़ा।
तीसरा ठग ने कहा - अरे भैया ये कैसा जमाना आ गया हैं। लोमड़ी को कंधे पर उठाया हैं।
किसान चुप चाप आगे बढ़ गया।
फिर किसान ने आगे जा कर एक आदमी से पूछा क्या ये सच मे लोमड़ी हैं। वो आदमी ठग था , उस चौथे ठग ने कहा हाँ ये लोमड़ी हैं। किसान को विश्वास हो गया और उसने वो बकरा उस ठग को देते हुए बोला - भाई मुझे दूसरे गाँव जाना हैं। आप इस लोमड़ी को जंगल मे छोड़ आओ।
ठग की योजना सफल हो गयी वह बकरा लेकर घर आ गया और चारों खूब हँसे उस किसान की मूर्खता पर।

शिक्षा- दूसरों के कहने पर आंख बन्द कर के विश्वास नहीं करना चाहिए।


15. प्यासा कौआ 


एक कौआ था। वह बहुत ही प्यासा था , पानी की खोज में यहाँ से वहाँ भटक रहा था। बहुत देर ढूंढने के बाद उसे एक पानी का घड़ा दिखा। कौए ने पास जाकर देखा तो उसमें
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आधा ही पानी था , कौए की चोंच वहाँ तक नहीं पहुंच सकती थी। फिर कौए ने पानी पीने के लिए एक उपाय सोच। उसनें पास में बिखरे कुछ कंकड़ को उठा उस घड़ा में डालने लगा।

कुछ ही देर में कौआ ने बहुत सारे कंकड़ घड़े में डाल दिया। और घड़ा का पानी धीरे - धीरे ऊपर आ गया। कौआ ने भर पेट पानी पिया और खुशी - खुशी उड़ गया।

शिक्षा- समस्या को बुद्धि से सुलझाना चाहिए।

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