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Moral Stories - Sant Aaur Bicchu Ki Kahani - संत और बिच्छु की कहानी

एक बार की बात हैं बीच जंगल में एक भगवान् का मंदिर था , उस मंदिर में  प्रतिदिन सुबह एक संत पूजा करने आया करते थे ,

संत जैसे ही नदी से जल लेकर मंदिर में प्रवेश करते उसी समय एक बिच्छु अपने बिल से बाहर निकलता और संत को काट लेता फिर वापस अपने बिल में चला जाता,

Moral Stories - Sant Aaur Bicchu Ki Kahani - संत और बिच्छु की कहानी
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रोज पूजा करने के बाद संत औषधि लगाता फिर वापस चला जाता था , एक दिन पुजारी ने संत से पूछा आपको वह बिच्छु रोज क्यों काट लेता हैं ?
संत ने कहा - " यह बिच्छु की प्रवृति हैं ", संत ने औषधि लगायी और चला गया ,

एक दिन जन संत नदी के पास पहुँचे उन्होंने देखा की वह बिच्छु पानी में गिर गया हैं ,और बहुत कोशिस करने पर भी वह पानी के अंदर डूबता ही जा रहा हैं , संत उस बिच्छु के पास जा उसे पानी से  निकालने लगे , लेकिन बिच्छु ने उन्हें फिर डंक मारा ,

इस पर पुजारी ने कहा यह दुष्ट जीव हैं ....आप  इसकी सहायता कर रहे हैं और ये आपको ही हानि पहुँचा रहा हैं आप इसे छोड़ दीजिये ,

संत ने कहा -" वह अपना धर्म निभा रहा हैं , में अपना धर्म निभा रहा हूँ "

जैसे तुलसीदास जी कहते हैं - उमा संत कइ  इहइ बड़ाई | मंद करत जो कराइ भलाई ||
मलतब - संत बुरा करने वालों का भी भला करते हैं ,

भगवान् श्री कृष्णा ने गीता में कहा हैं - तू कर्म कर फल की चिंता मत कर

संत ने बिच्छु को पानी से बाहर निकला और जंगल में छोड़ दिया ,

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-(Moral Stories - Sant Aaur Bicchu Ki Kahani)

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