Thursday, 29 March 2018

लकड़हारा और जादुई कुल्हाड़ी - Lakadhara Aaur Jadui Kulhadi


लकड़हारा और जादुई कुल्हाड़ी


एक गांव में एक गरीब लकड़हारा रहता था, वह जंगल से सुखी लकड़ियाँ काटकर उसे बाजार में बेचता और उससे अपना घर चलता था।

उसका पड़ोसी उसे रोज कहता की तुम पेड़ की हरी टहनियाँ काटकर बाजार में बेचो उससे तुम्हें अधिक धन मिलेगा सुखी लकड़ियाँ हलकी होती हैं।

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बच्चों की नई कहानियां - जादुई कुल्हाड़ी

लेकिन वह लकड़हारा बहुत ईमानदार था, वह यह बात समझता था की हरी टहनियाँ काटने से पेड़ों को तकलीफ होती है, इसलिए वह हमेशा सुखी टहनियों को ही काटता था।

एक दिन की बात है, लकड़हारा जंगल में बहुत देर से लकड़ी काट रहा था, दोपहर का समय हो गया था, उसने थोड़ा खाना खाया और उसी पेड़ के निचे आराम करने लगा।

हवा ठंडी चल रही थी, लकड़हारे को नींद आ गयी, कुछ ही देर बाद उसने सपने में देखा की पेड़ से एक वन देवता निचे उतरे हैं।

वन देवता ने लकड़हारे से कहा - में तुम्हारी ईमानदारी से प्रसन्न हूँ, दूसरे लकड़हारे पेड़ की हरी टहनियों को काटते हैं, लेकिन तुम सिर्फ सुखी टहनियाँ काटते हो जिससे पेड़ बहुत प्रसन्न होते हैं।

आज में तुम्हें जादुई कुल्हाड़ी दे रहा हूँ, जिससे तुम बहुत ही जल्दी बहुत सारी सुखी टहनियाँ काट सकते हो, लेकिन कभी भी इस कुल्हाड़ी से हरी टहनी मत काटना, यह एक जादुई कुल्हाड़ी हैं।

इतना बोलकर उस वन देवता ने लकड़हारे को जादुई कुल्हाड़ी दिया, उसी समय लकड़हारा की नींद टूटी उसने देखा की वहाँ सच में एक जादुई कुल्हाड़ी थी।  

लकड़हारा ने उस जादुई कुल्हाड़ी से लकड़ी काटना शुरू किया, उससे लकड़ियाँ तुरंत कट जाया करती थी, आज लकड़हारा ने बहुत साड़ी लकड़ी काटकर बाजार में बेचा और उसे बहुत पैसा मिला। 

अब लकड़हारा रोज उस जादुई कुलहारी से खूब सारी लकड़ी काटता और उसे बाजार में बेचता, जिससे उसे बहुत से पैसे मिलते थे। 

इस तरह कुछ ही दिनों में वह लकड़हारा धनी हो गया, यह बात उसके पड़ोसियों को समझ नहीं आ रही थी। 

एक दिन लकड़हारा उस जादुई कुल्हाड़ी के बारे में बातें कर रहा था, तभी उसके पडोसी ने उसकी बातें छुपकर सुन ली, उसने सोचा की में इसकी जादुई कुल्हाड़ी चुरा लूंगा और उससे में भी बहुत ही जल्दी धनी बन जाऊंगा।

रात में लकड़हारा सोया हुआ था, पड़ोसी लकड़हारा ने छुपकर उसकी जादुई कुल्हारी चुरा लिया और उसके जगह एक वैसी ही नकली कुल्हाड़ी रख दिया। 

अगले दिन जब ईमानदार लकड़हारा कुल्हाड़ी लेकर लकड़ी काटने जंगल गया तो आज उसकी कुल्हाड़ी से लकड़ी पहले की तरह नही कट रही थी। 

ईमानदार लकड़हारा को कुछ समझ में नहीं आया, वह सुखी लकड़ियाँ काटने में लग गया, अचानक उसे एक आवाज सुनाई दिया, उसका पड़ोसी लकड़हारा उसे बुला रहा था। 

वह आवाज की तरफ गया, उसने देखा की उसका पड़ोसी लकड़हारा एक पेड़ के साथ चिपक गया हैं, वह पेड़ की हरी टहनी को कुल्हाड़ी से काट रहा है। 

पड़ोसी लकड़हारे ने कहा - मैंने तुम्हारी जादुई कुल्हाड़ी चुरा लिया था, और जैसे ही मैंने उससे लकड़ी काटना शुरू किया की में इस पेड़ से चिपक गया हूँ, मुझे माफ करदो और मुझे इस पेड़ से छुड़ा दो। 

ईमानदार लकड़हारा सबकुछ समझ चूका था, उसने उसे माफ कर दिया, उसके माफ करते ही वह पडोसी लकड़हारा पेड़ से छूट गया। 

ईमानदार लकड़हारे को उसकी जादुई कुल्हाड़ी वापस मिल गयी, जादुई कुल्हाड़ी से कुछ ही दिनों में वह धनी हो गया, और उसे देख सभी लकड़हारे ने पेड़ों ही हरी टहनियाँ काटना छोड़ दिया। 

सीख - दोस्तों इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है की हमें भी अपना काम पूरी ईमानदारी से करना चाहिये।

***

दोस्तों आज इस लेख में हमने आपको लकड़हारा और जादुई कुल्हाड़ी की कहानी बतायी, आशा है की यह कहानी आपको अच्छी लगी होगी। इस वेबसाइट पर प्रतिदिन एक नयी कहानी अपडेट की जाती है, अगर आप सभी कहानियों का Notification चाहते है तो हमारे Facebook Page को Like 👍 करिये जिससे आपको नयी कहानी का Notification  मिल जायेगा।

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