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Vikram Betal Story - विक्रम बेताल की पहली कहानी


राजा विक्रमादित्य प्रतिदिन भगवान शिव के मंदिर जाते थे | पूजा करने के बाद वे अपनी जनता से मिलते थे | बहुत से लोग विक्रमादित्य से मिलने के लिए आते थे , उनमें से कोई उन्हें अपनी समस्या सुनाता , कोई उन्हें कुछ भेंट देने के लिए आता था |

लेकिन कुछ महीनों से एक तांत्रिक राजा विक्रमादित्य से रोज मिलने आता था , और उन्हें एक पपीता देकर  चला जाता था |

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विक्रम - बेताल की पहली कहानी


यह बात विक्रमादित्य को समझ नहीं आ रही थी , आखिर वह तांत्रिक कौन हैं ?  एक दिन महाराजा विक्रमादित्य
ने तांत्रिक के दिए हुए पपीते को काट कर देखा , जैसे ही उन्होंने पपीता काटा उन्हें बहुत आश्चर्य हुआ | 
पपीते में दो बहुमूल्य रत्न थे जो बहुत ही चमक रहे थे |

विक्रमादित्य ने तांत्रिक के दिए गए सभी पपीते मंगवाए और उन्हें काट कर देखा , सब में दो - दो बहुमूल्य रत्न थे |

अगले दिन विक्रमादित्य मंदिर में पूजा करने के बाद अपनी जनता से मिलने गए , आज फिर वह तांत्रिक हाथ में पपीता लिए खड़ा था |

विक्रमादित्य ने उस तांत्रिक से पूछा - आप कौन हैं ? आप मुझे प्रतिदिन दो बहुमूल्य रत्ना क्यों भेंट करते हैं , इसमें क्या राज हैं ?

तांत्रिक ने कहा - विक्रमादित्य में आपको दो बहुमूल्य रत्न इसलिए भेंट करता हूँ ,क्यों की में आपसे इसके बदले कुछ मांग सकूँ |

राजा विक्रमादित्य चकित हो गए उन्होंने तांत्रिक के दिए हुए सभी रत्न लौटा दिए और कहा - में अपनी प्रजा से बहुमूल्य रत्न नहीं लेता हूँ  |  आप मांगिये आपको क्या चाहिए ?

तांत्रिक को इसी समय का इतंजार था उसने कहा - महाराज मैं एक पूजा कर रहा हूँ | जिसमें मुझे एक वस्तु की आवश्यकता हैं | लेकिन वह वस्तु आपके आलावा कोई नहीं ला सकता , इसलिए मुझे आप अपना एक रात का समय दे दीजिये | आप जंगल के बीच एक पुराने बरगद के पेड़ के नीचे मुझ से मिलें |

विक्रमादित्य ने कहा - ठीक हैं में आज राज आपके बताये हुए स्थान पर आऊंगा |

रात में विक्रमादित्य तांत्रिक के बताये हुए स्थान पर गये तांत्रिक अपने स्थान पर बैठा हुआ था | उसने विक्रमादित्य से कहा - आओ राजा विक्रमादित्य मुझे तुम्हारा ही इंतजार था |

विक्रमादित्य ने पूछा -बतायें आपने मुझे यहाँ क्यों बुलाया हैं ?

तांत्रिक बोला - यहाँ से आगे जाने पर तुम्हें एक पुराना खंडहर मिलेगा जिसके नजदीक एक सुखा पेड़ हैं , उस पेड़ पर एक मुर्दा उल्टा लटक रहा हैं | तुम उसे उतार के मेरे पास ले कर आओ |

विक्रमादित्य वहाँ से उस मुर्दे को लाने के लिए चल दिये , वह मुर्दा और कोई नहीं बल्कि बेताल था |

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