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Vikram Betal Story 2 , विक्रम - बेताल की कहानी

Vikram  Betal Story
तांत्रिक के कहने पर राजा विक्रमादित्य उस खंडहर के पास गये, विक्रम ने देखा वहाँ एक सुखा पेड़ हैं और उस पर एक मुर्दा उल्टा लटक रहा हैं |

वे मुर्दा को पेड़ से उतारने के लिए पेड़ पर चढ़ने लगे , अँधेरी रात थी |

वह मुर्दा जोर - जोर से हँसने लगा और जमीन पर गिर पड़ा | विक्रम जैसे ही उसे पकड़ने पेड़ से नीचे उतरे बेताल फिर उस पेड़ से से लटक गया |

विक्रमादित्य फिर पेड़ पर चढ़े और बेताल फिर नीचे गिर पड़ा | अगली बार वह जैसे ही नीचे गिरा विक्रम ने छलांग लगा उसे पकड़ लिया और अपने पीठ पर लाद कर ले जाने लगे |

image Vikram - Betal story 2| विक्रम - बेताल की कहानी
विक्रम - बेताल


बेताल ने विक्रमादित्य से कहा - रास्ता काटने के लिए में तुम्हें एक कहानी सुनाता हूँ | लेकिन मेरी यह सर्त हैं की तू कुछ बोलेगा नहीं , अगर तू कुछ बोला तो में वापस उड़ कर उस पेड़ पर जा लटकूँगा |



एक समय की बात हैं | एक बहुत ही समृद्ध नगर था बर्धवान , वहाँ का राजा था रूपसेन , रूपसेन बहुत समृद्ध था  , जबतक वह दुखियों की सहायता नहीं करता उसका मन नहीं लगता था | हमेशा अपनी प्रजा के लिए अच्छा कम करता रहता था |

उसके राज्य में एक वीर रहता था उसका नाम था वीरवर | वीरवर हर तरह के लड़ाई में योग्य एक बहुत ही शक्तिशाली योद्धा था | वह राजा रूपसेन का अंगरक्षक बनना चाहता था | 

एक दिन वह अस्त्र - सस्त्र लेकर राजा से मिलने गया | उसने अपनी वीरता राजा को दिखाया , राजा रूपसेन ने वीरवर को अपना अंगरक्षक बना लिया | 

अब वीरवर दिन हो या रात राजा रूपसेन की रखवाली करने लगा | एक रात उसे एक औरत के रोने की आवाज सुनाई दिया राजा ने कहा 
जाओ वीरवर और देखो यह कौन औरत हैं ,  जो रो रही हैं | 

वीरवर यह देखने चला गया , राजा भी वीरवर के पीछे - पीछे निकला | वीरवर ने एक पेड़ ने नीचे एक औरत को देखा जो रो रही थी , उसने उसे पूछा 
आप कौन हो और यहाँ क्यों रो रही हो ? 

वह औरत बोली में इस राज्य की लक्ष्मी हूँ , इस राज्य पर बहुत बड़ा संकट आने वाला हैं , इस राज्य का काल देवता भूखा हैं वह कुछ ही दिनों में पूरे राज्य को निगल जायेगा |

वीरवर ने कहा - माँ आप मुझे बतायें की वह काल देवता कहाँ रहता हैं ?  में उसका आहार बन उसकी भूख मिटा दूंगा और और यह राज्य बच जायेगा  |

लक्ष्मी ने कहा - यहाँ से कुछ दुरी पर जो गुफा हैं उसमे वह काल देवता रहता हैं |

वीरवर तुरंत गया और उस गुफा में प्रवेश कर गया काल देवता ने उसे अपना भोजन बना लिया |

राजा भी वीरवर के पीछे - पीछे निकला था , वह भी सारी बातें चुप कर सुन रहा था | उसने वीरवर को बचाने के लिए उस गुफा से जाकर बोला - काल देवता में इस राज्य का राजा हूँ | आप मेरा भोजन कीजिये और वीरवर को छोड़ दीजिये | इतना बोल वह भी उस गुफा में प्रवेश कर गया |

इतनी कहानी सुनाने के बाद बेताल के विक्रम से किया सवाल |

बता विक्रम त्याग किसका बड़ा ? 

कौन ज्यादा महान था ? 

वह वीरवर जिसने बिना सोचे अपने और अपने परिवार की जान दे दी या वह राजा जो बिना अपनी जान की परवाह किये गुफा में प्रवेश कर गया ? 

बता विक्रमादित्य ?

विक्रमादित्य ने कहा - सुन बेताल वह राजा ज्यादा बड़ा त्यागी था | क्यों की सैनिक का तो कर्त्तव्य होता हैं अपने राजा के लिए अपनी जान की परवाह ना करें |

लेकिन राजा रूपसेन ने वीरवर को बचाने के लिए अपनी जान दे दी , राजा ने बड़ा त्याग किया | इसलिए राजा का त्याग बड़ा |

बेताल बोला - सही कहा विक्रम राजा का त्याग बड़ा था | 

विक्रम ने पूछा फिर क्या हुआ  ?  बेताल ने कहा यह तो उस लक्ष्मी की माया थी , वह जानना चाहती थी की वीरवर और राजा कितने कर्त्तव्य निभाते हैं | और दोनों ने अपना कर्त्तव्य निभाया , वे सब जिन्दा बाहर आ गये और माँ लक्ष्मी ने उन्हें आशीर्वाद दिया |

लेकिन इस कहानी में विक्रम ने कुछ बोला और शर्त यह थी की विक्रम तू कुछ बोलेगा नहीं, अगर बोला तो में वापस उस डाल से जा लटकूँगा | और यह बोल बेताल वापस उस डाल से जा लटका |  
       
                      




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