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Saturday, 10 February 2018

Vikram Betal Story 03 | विक्रम बेताल

Vikram Betal Story 
कनकपुर नाम की एक सुन्दर नगरी थी | कनकपुर का राजा था यसोधन, राजा यशोधन हमेशा अपने राज्य के अच्छे के बारे में सोचता रहता , प्रजा यसोधन से बहुत प्रसन्न थी | 


एक दिन राजा यशोधन के दरबार में एक व्यापारी आया, वह अपने साथ दो नर्तकी राजा को भेंट देना चाहता था |

राजा ने जब देखा की व्यापारी नर्तकी भेंट देने आया हैं, तो उसे बहुत क्रोध आया | 

Vikram Betal Story विक्रम बेताल image
Vikram Betal

यशोधन ने कहा - व्यापारी महोदय मुझे लगा था की आप कुछ ऐसी वस्तु भेंट में देंगे जिससे राज्य का भला होगा , लेकिन आप एक नृत्य करनेवाली को भेंट देकर यह बता दिया हैं की , आप का राज्य के हित में कोई रूचि नहीं हैं | इसलिए मुझे आपका उपहार नहीं चाहिए | 
राजा के सभी कर्मचारी अपना - अपना कार्य अच्छे से करते थे , राज्य बहुत आगे बढ़ रहा था | 

उसी नगर में एक सेठ रहते थे, जिनकी एक बेटी थी, वह बहुत सुंदर और योग्य थी | 

एक दिन सेठ जी राजा के पास गए और शादी का प्रस्ताव रखा | राजा ने कहा -हम आपकी बेटी को देखने नहीं जा सकते इसलिए मेरे दो मंत्री आपकी पुत्री को देखने जाएंगे |

कुछ दिन बाद राजा ने अपने दो मंत्री को सेठ के घर भेजा , लेकिन यह खबर उस व्यापारी को हो गयी जिसका उपहार राजा यसोधन ने नहीं लिया था |

जब मंत्री सेठ जी की पुत्री को देख महल वापस लौट रहे थे |

वह व्यापारी ने उन्हें रास्ते में रोक लिया और कहा - की आप भूल गए हैं क्या महाराज ने मुझे क्या कहा था ?

राज्य के हित में रूचि रखनी चाहिए ,मैंने राजा को नर्तकी भेंट किया था तो वे क्रोधित हो गए , इसलिए आप कुछ ऐसा करें की यह शादी नहीं हो | 

मंत्री ने उस दुष्ट व्यापारी पर विश्वास कर लिया ,और राजा से कह दिया की वह सुंदर नहीं हैं |

राजा ने अपना दूत भेज शादी से इंकार कर दिया |

कुछ दिन बीत गया सेठ ने अपनी बेटी का विवाह राजा के सेनापति से तय कर दिया |

 सेनापति और सेठ की बेटी ने एक दूसके को देखा और वे शादी को राजी हो गए | उनके विवाह का समय एक महीने बाद तय किया गया |

इसी बीच एक दिन राजा अपने राज्य को देखने निकले संयोग से रास्ते में राजा को सेठ की बेटी मिल गयी | 

राजा उसकी सुन्दरता को देख प्रसन्न हो गया और उससे विवाह करने को सोचा |  इस बार राजा ने अपने सेनापति से कहा - वह जो भी हैं , उसके घर शादी का प्रस्ताव लेकर जाईये |

सेनापति ने जब उस कन्या को खोजा तो यह सेठ की बेटी थी , जिसकी शादी उसी सेनापति से तय हुई थी | 

लेकिन सेनापति ने अपने राजा की खुशी के लिए वह प्रस्ताव लेकर सेठ के पास गया | पहले तो सेठ और उसकी बेटी मानने को तैयार नहीं थे लेकिन सेनापति के समझाने पर वे मान गए |

राजा और कन्या की शादी तय हो गयी | 

इसी बीच राजा को यह पता चला की जिससे उसकी शादी होने वाली हैं | उसकी शादी सेनापति से तय थी |

विवाह के दिन सब कुछ तैयारी हो गयी , राजा और सेठ की बेटी आ गए , लेकिन राजा ने खुद के जगह सेनापति को बैठा दिया और उनकी शादी करा दिया |

इतनी कहानी सुनने के बाद बेताल ने विक्रम से किया सवाल 

किसका त्याग बड़ा हैं किसने ज्यादा बड़ा त्याग किया ?

वह सेनापति जिसकी शादी तय हो गयी थी |

वह राजा जो शादी पर अपनी जगह अपने सेनापति को बैठा दिया |

किसका त्याग बड़ा हैं ?

विक्रम ने कहा - बेताल , उस सेनापति का त्याग बड़ा हैं |

क्यों की राजा ने मात्र एक बार उस सेठ की बेटी को देखा था , अगर एक बार देखने से वह उसे इतना चाहने लगा था |

 सेनापति की शादी उससे तय थी , सेनापति ने सेठ की बेटी को कितनी बार देखा था , वे बात भी करते थे |

 लेकिन उसने राजा के लिए सब कुछ भूल गया  | इसलिए सेनापति ज्यादा बड़ा त्यागी था |

बेताल बोला - सही कहा विक्रम , सेनापति का त्याग बड़ा था |
लेकिन शर्त थी की तू बोलेगा नहीं लेकिन तू बोला तो अब में जा रहा हूँ |

यह बोल बेताल वापस उस पेड़ पर जा लटका |


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