गुण और अवगुण की परख - achi achi kahaniya


एक समय की बात हैं , गुरुकुल के सभी छात्र आपस में द्वेष रखने लगे थे , सब एक दुसरे पर आरोप लगाते रहते थे। 

एक दिन यह बात गुरूजी को पता चली, वे इस बात से बहुत दुखी हुये उन्होंने शियों को समझने का कोई उपाय सोचा। एक दिन की बात हैं, गुरूजी पेड़ के निचे बैठकर शिष्यों को पढ़ा रहे थे। 

उन्होंने अपने दो शिष्यों को खड़ा किया और एक से कहा - तुम्हें इस जंगल का एक फूल तोर कर लाना हैं, लेकिन वह जंगल में सबसे अच्छा फूल होना चाहिये।

achi achi kahani
गुण और अवगुण की परख 



अब गुरूजी ने दुसरे शिष्य से कहा - तुम जंगल जाओ और इस जंगल के सबसे खतरनाक काँटे तोड़ कर लाओ, लेकिन याद रखना की वह जंगल का सबसे खतरनाक काँटा हो। 

वहाँ उपस्थित सभी शिष्य हैरान थे, शिष्य सोच में पर गये आज गुरूजी ऐसा क्या बताने वाले हैं। 


कुछ समय बाद पहला शिष्य जंगल से लौटा,  उसके हाथ में एक नहीं बहुत सारे फूल थे। 



गुरूजी ने पूछा - मैंने तो तुम्हें जंगल का सबसे अच्छा फूल तोड़ कर लाने के लिए कहा था, लेकिन तुम बहुत सारे फूल ले आये ?



शिष्य ने कहा - गुरूजी इस जंगल में फूल का भंडार हैं, कोई फूल देखने में बहुत सुन्दर हैं, तो किसी की सुगंध बहुत सुन्दर हैं, इसलिए मैंने सबसे सुन्दर फूल तोड़ कर लाया आप खुद इसमे से एक चुन लीजिये। 


गुरूजी ने फिर पूछा  - क्या जंगल में काँटे थे ?


शिष्य बोला - गुरूजी मेरा ध्यान तो बस फूल पर था, मुझे ज्यादा कांटा दिखा ही नहीं, शायद इस जंगल में कांटा कम हैं।  



उसी समय दूसरा शिष्य लौटा उसके हाथ में अनेक तरह के बहुत ही खतरनाक कांटे थे, उसके हाथ से बहुत ही खून बह रहा था। 



गुरूजी ने दुसरे छात्र से पूछा - मैंने तो तुम्हें एक सबसे खतरनाक कांटा लाने के लिए कहा था, लेकिन तुम इतना कांटा क्यों लाये ?



शिष्य ने कहा - गुरूजी इस जंगल में तरह - तरह के खतरनाक कांटे है, यह जंगल तो काँटों से भरा है, मुझे यह समझ नहीं आ रहा था की कौन सा कांटा ज्यादा खतरनाक हैं ?



गुरूजी ने पूछा - जंगल में फूल था की नहीं ?



शिष्य ने कहा - गुरूजी में तो यह खोज रहा था की कौन सा काँटा खतरनाक हैं, फूल तो मुझे दिखा ही नहीं बस काँटा ही दिख रहे थे। 



तब गुरूजी ने कहा - देखा शिष्यों जंगल तो वही था, लेकिन जो फूल ढूंढने गया उसे फूल मिला  उसके नजर में एक से अच्छे एक फूल दिखे। 


जिसने कांटे ढूंढा उसे तरह - तरह के कांटे दिखे, वह इस जंगल के फूल को देख भी नहीं सका |

जीवन में भी कुछ ऐसा ही हैं, अगर हम किसी चीज को पसंद करते हैं, तो हमें उस चीज में मौजूद कमियाँ नहीं दिखती हैं। 


और अगर आप किसी चीज को नापसंद करते हैं, तो आपको उस चीज में कुछ अच्छा नहीं दिखता हैं, लेकिन हमें यह समझना चाहिए की अच्छाई और बुराई हर जगह होती हैं। 

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