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Panchtantra ki kahaniya | पंचतंत्र की कहानी - घोंसला किसका

Panchtantra ki kahaniya

एक जंगल में एक बुलबुल का समूह रहता था | उनका घोंसला एक बरगद के पेड़ पर था |

एक बार बुलबुल का समूह बहुत दूर किसी दुसरे जंगल की तरफ चला गया, वहाँ सभी बुलबुल ने देखा की उस जंगल के पास बहुत सारे खेतों में अनाज लगे हुए थे |
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panchtantra ki kahaniya

सभी ने सोचा क्यों न कुछ दिन इस जंगल में रहें जब यहाँ अनाज ख़तम हो जायेगा तो हम वापस अपने घोसलों में चले जाएंगे |

सभी बुलबुल वहाँ पेड़ो पर रहने लगे और खूब दाना चुनते और खाते थे |

लेकिन इधर एक दिन बरगद के पेड़ पर एक कबूतर का झुंड आया | कबूतरों ने देखा की सभी घोंसले बिखर गए हैं और इनमें कोई नही रहता तो कबूतरों ने सोचा हम इस घोंसले को वापस नया बना देंगे

और इसमें रहेंगे क्यों की यह पेड़ बहुत अच्छा हैं | कबूतर ने सभी घोसलों को ठीक कर दिया उसमें रहने लगे |

कुछ महीनों बाद जब दुसरे जंगल का दाना कम हो गया तो सभी बुलबुल वापस अपने घोसलों में आये लेकिन वहां उन्होने कबूतरों को देखा|
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panchtantra ki kahaniya

बुलबुल ने कहा - इस पेड़ के सभी घोंसले हमारे हैं तुम सब यहाँ क्यों रहते हो ..?

कबूतरों ने कहा - यहाँ सारे घोंसले बिखर गये थे , यहाँ कोई नही रहता था इसलिए हमनें इसे ठीक किया |

बुलबुल और कबूतर झगरने लगे उनको झगरता देख बरगद ने ने बोला - तुम सब क्यों झगड़ रहे हो |

में बताता हूँ यह घोंसला किसका हैं |

बुलबुल ने यह घोंसला बनाया था लेकिन उनके जाने के बाद सभी घोंसले बिखरने लगे थे | कबूतरों ने इसे ठीक किया |

इसलिए पेड़ का आधा घोंसला कबूतर का हैं और आधा घोंसला बुलबुल का |

और सभी मिलकर कुछ नये घोंसले बना लो जिससे सभी के रहने के लिए हो जाए|

सभी ने बरगद की बात मानी और कुछ ही दिन में सबके लिए घोंसला हो गया |

अब कबूतर और बुलबुल का समूह साथ में दाना चुनने जाते थे  , वे ख़ुशी - ख़ुशी रहने लगे |

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती हैं की आपस में झगरना नही चाहिए बल्कि मिलकर उपाय सोचना चाहिए |


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