Thursday, 18 January 2018

प्रेरणादायक कहानी - राजा और मकड़ी - Inspirational story - Raja Aaur Makdi

एक समय की बात हैं। सुन्दर नगर नामक एक राज्य था। वहाँ वीरकेतु नामक एक राजा राज्य करता था।

एक दिन उसने अपने सभी मंत्रिको बुलाया और कहा कि ऐसी कोई चीज का पता लगाये जो किसी काम का नहीं हैं। जिसका कोई महत्व नहीं हैं।

जिसका कोई उपयोग नहीं होता हैं, और जो राज्य के विकास में कोई योगदान नहीं करते हैं।

अपने राजा की बात सुन राज्य के सभी मंत्री और सेनापति इस काम में जुट गये, वे दिन - रात ऐसी किसी चीज का पता लगाने लगे जिसका कोई उपयोग नहीं होता हैं।

जब भी कोई एक मंत्री कोई ऐसी चीज ढूंढता तो अन्य मंत्री उस चीज का महत्व बता देते थे।

This is an image of Raja Aaur Makdi
राजा और मकड़ी की कहानी

राजा को भी इस कार्य में बहुत आनंद आ रहा था। राज्य के सभी मंत्री राजा के सामने अपनी जीत चाहते थे।


इसी तरह एक महीना बीत गया, फिर अंत में सभी मंत्री एक बात पर सहमत हो गये। उन्हें ऐसी चीज मिल गयी जिसका कोई महत्व नहीं था।

सभी मंत्री राजा के पास पहुँचे और बोले :- महाराज ऐसी दो चीजें हैं। जिनका कोई उपयोग नहीं होता हैं। और ना ही उसका कुछ महत्व हैं।


राजा वीरकेतु ने पूछा :-  क्या हैं वह चीज जल्दी बताओ।


मंत्रियों ने कहा :- महाराज......मक्खी और मकड़ी, इन दोनों का कोई उपयोग नही हैं।

यह दोनों ना तो राज्य के किसी काम आते हैं और ना ही इन छोटे - मोटे किट पतंग का कुछ महत्व हैं।

राजा वीरकेतु बोला :- तब तो हमें मकड़ी और जंगली मक्खियों को समाप्त कर देना चाहिए।

सैनिकों जाओ और सभी मकड़ियो और मक्खियों को मार दो, या उन्हें राज्य से बाहर निकाल दो।

राज्य के सभी सैनिक इस काम में जुट गएवे कहीं आग जलाकर तो कहीं धुआँ फैलाकर इन मक्खियों और मकड़ियों को भगाने लगे।

उसी समय पड़ोस के दुश्मन राजा को खबर मिली की इस राजा के सारे सैनिक मकड़ी और मक्खियों को मारने में व्यस्त हैं।

उसने अच्छा मौका पाकर इस राज्य पर बहुत सारी सेनाओं के साथ आक्रमण कर दिया।


राजा वीरकेतु के सभी सैनिक पूरे राज्य में बिखरे हुए थे, उनके सैनिक छोटी - छोटी टुकड़ियाँ बनाकर राज्य में मक्खी और मकड़ियों को मारने में व्यस्त थे।

राजा वीरकेतु ने बहुत कम सैनिकों के साथ दुश्मन सैनिकों को रोकने का प्रयास किया, लेकिन दुश्मन राजा के पास बहुत बड़ी सेना थी।

वीरकेतु के मंत्रियों ने उसे किले से दूर निकल जाने की सलाह दी, उनकी बात मान राजा किले से सुरक्षित स्थान पर निकल गया। 

वह भागते - भागते एक पेड़ के नीचे पहुँचा और बैठ गया, थके होने की वजह से उसे नींद आ गयी।


कुछ देर बाद एक जंगली मक्खी ने राजा को जोर का डंक मारा और राजा की नींद अचानक खुल गयी।

राजा की नींद खुल तब उसे याद आया की दुश्मन सैनिक उसका पीछा कर रहे हैं। इस तरह खुले में सोना खतरों से खाली नहीं हैं। 

वह उठा और जंगल की तरफ भाग गया, वहां उसने एक पुरानी गुफा देखी, वह गुफा को सुरक्षित समझ उसमें छुप गया।

राजा के गुफा में जाने के बाद मकड़ियों ने द्वार पर जाल बुन दिया।

कुछ समय बाद दुश्मन सैनिक उसे खोजते - खोजते वहां भी पहुँच गए, उनकी आवाज सुन राजा घबरा गया।

वे गुफा में घुसने वाले थे, लेकिन तभी उनके सेनापति की नजर उस मकड़ी के जाल पर गयी, जाल गुफा के द्वार पर बना हुआ था।


सेनापति बोला :- सैनिकों वीरकेतु यहाँ नहीं आया होगा, अंदर मत जाओ क्यों कि अगर राजा यहाँ गया होता तो गुफा के द्वार पर बना यह मकड़ी का जाल टूट जाता था।

यह बोल सभी दुश्मन सैनिक गुफा के बाहर से ही लौट गये, उनकी बात गुफा के अंदर छुपा राजा सुन रहा था।

अबतक राज्य के सभी सैनिक को यह खबर हो गयी थी की उसके राज्य पर आक्रमण हुआ हैं।

उन्होंने एकजुट होकर युद्ध लड़ा और अपनी एकता के कारण कुछ ही दिन में वे जीत गए, सभी दुश्मन सैनिक भाग चुके थे।

राजा वीरकेतु वापस अपने महल लौटा उसने अपने सभी सैनिकों को धन्यवाद किया, उन्हें बहुत सारा ईनाम दिया।


फिर उसने सबको यह बात बताई की कैसे मुश्किल में मक्खी और मकड़ी ने उसकी सहायता की और दुश्मन सैनिकों से उसकी जान बचाई।

अगर मक्खी और मकड़ियों ने उसकी सहायता नहीं किया होता तो शायद आज राजा दुश्मन सैनिकों से कैद में होता और उसकी पूरी सेना हार जाती थी।

अब राजा सभी छोटे - छोटे चीजों का महत्व समझ गया था। उसे अपनी गलती समझ आ चुकी थी।


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दोस्तों इस कहानी का उद्देश्य लोगों को यह बताना हैं कि सभी चीजों का अपना एक अलग महत्व होता हैं।

चाहे वह चीज छोटी हो या बड़ी इस दुनिया में ऐसा कोई भी चीज नही  जिसका कोई उपयोग या महत्व नहीं हैं।

अक्सर मुश्किल में वही चीज काम आती हैं, जिसे हम बेकार समझते हैं। 

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