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कैसे भगवान बुद्ध के उपदेश से अंगुलीमाल ने शांति का मार्ग अपनाया

एक बार भगवान बुद्ध जंगल के रास्ते से कहीं जा रहे थे | उन्हे रास्ते में अंगुलीमाल डाकू ने घेर लिया |
भगवान बुद्ध ने पूछा - तुम कौन हो ..?

अंगुलीमाल बोला - में अंगुलीमाल डाकू हूँ | मैंने प्रतिज्ञा ली हैं की में सौ लोगों की हत्या कर के उनकी अंगुली का माला पहनूँगा |

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भगवान बुद्ध के उपदेश से अंगुलीमाल ने शांति का मार्ग अपनाया
और अब तक में ने निन्यानवे लोगों को मार दिया हैं , अब तुम्हें मार कर मेरी प्रतिज्ञा पूरी हो जायेगी |
भगवान बुद्ध मुस्कुरा रहे थे |

यह देख अंगुलीमाल बोला क्या तुम्हें मुझ से डर नहीं लगता |

भगवान बुद्ध के कहा - मुझे डर नहीं लगता क्यों की में जनता हूँ |  जिसने इस पृथ्वी पर जन्म लिया हैं उसे एक दिन मारना ही हैं | कोई भी इस पृथ्वी पर अमर नहीं हैं |

लेकिन तुम जीवित रहकर भी शांति से नहीं रह सकोगे | तुम्हें हमेशा डर सतायेगा, तुम्हें अपने आप से डर लगेगा|

अंगुलीमाल बोला - तुम यह क्या कह रहे हो में किसी से नहीं डरता मुझ से सब डरते हैं |

भगवान बुद्ध ने कहा - तुम जो हिंसा फैला रहे हो , निर्दोष लोगों को मार रहे हो , यह सब तुम्हारे ऊपर पाप बन 

कर बरसेगी तुम्हारी जिन्दगी से शांति दूर चली जायेगी , तुम हमेसा परेशान रहोगे |

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भगवान बुद्ध के उपदेश से अंगुलीमाल ने शांति का मार्ग अपनाया

यह सुन अंगुलीमाल समझ गया उसने बोला भगवन में आपकी बात समझ गया|

दुसरो को डरा कर और दुःख देकर में शांति से नही रह सकता इसलिए मुझे कोई उपाय बताये जिससे में अपने पाप का प्राश्चित कर सकूँ |

भगवान बुद्ध ने कहा - तुम शांति का मार्ग अपनाओ , लोगों की सहायता करो और सत्य की राह पर चलो |

उसके बाद अंगुलीमाल बुद्ध के बताये मार्ग पर चलने लगा और इस तरह उस डाकू ने शांति का मार्ग अपना लिया |

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