किसान के आलसी बेटे (Farmer and his Lazy Son story in Hindi)


किसी गाँव में एक किसान रहता था। उसके चार बेटे थे, लेकिन चारों बहुत आलसी थे।

किसान अपने बेटों से परेशान रहता था, एक दिन किसान ने सोचा की इनको मेहनती बनाने के लिए कोई उपाय सोचना पड़ेगा।

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एक दिन किसान सुबह उठा और उसने अपने बेटों से कहा - में तीर्थ पर रहा हूँ , वापस कुछ महीने बाद लौटूंगा।

अगर तुम्हें धन की जरुरत पड़े तो खेत में खोदना वहाँ तुम्हें एक घड़ा मिलेगा जिसमें बहुत सारा धन हैं, क्यों कि मैंने चोर के डर से अपना सारा धन एक घड़ा में रखकर, खेत में छुपाया हैं।

किसान के जाने के कुछ दिन बाद उसके बेटों ने सोचा की चलो आज खेत से धन को निकालते हैं।

चारों बेटे हाथ में कुदाल लेकर गए और पूरा खेत खोदा, लेकिन उन्हें कहीं भी धन नहीं मिला।

वे उदास होकर बैठ गए, उनको उदास बैठा देख एक पड़ोसी किसान ने पूछा - क्या हुआ भाई आप चारों भाई क्यों उदास बैठे हो ?

उन्होंने खेत में धन ना मिलने की बात उस किसान को बतायी,  वह किसान बहुत ही समझदार था, वह समझ गया कि किसान ने अपने बेटों को मेहनती बनाने के लिए ये उपाय सोचा हैं।

वह बोला - तुमलोग उदास मत बैठो, जब तुमने इतना मेहनत किया ही हैं, तो जाओ और खेत में बीज डाल दो।

चारों भाइयों ने उस किसान की बात मान लिया और खेत में बीज बो दिया। 

उनके बीज बोने के कुछ दिन बाद खेत में पौधें उग गए, चारों भाइयों को बहुत खुशी हुई, धीरे - धीरे उन्हें काम करना अच्छा लगने लगा।

अब चारों भाई मेहनत करने लगे, वे खाद और पानी समय पर डालते खेत की रखवाली करते, देखते ही देखते उनका खेत बहुत हरा भरा हो गया।

कुछ समय के मेहनत के बाद उनके पौधों में अन्न लगने सुरु हो गए, जैसे - जैसे उनकी फसल तैयार हो रही थी, उन्हें अच्छा लग रहा था।

तीन महीने बाद उनकी फसल पक कर तैयार हो गई, उन्हें बहुत सारा अनाज मिला।

जब फसल के काटने का समय आया तो किसान भी तीर्थ से लौट आया, उसने बेटों से पूछा - क्या तुम्हें धन मिला ?

चारों बेटे किसान को अपने साथ ले गए और फसल से मिला अनाज दिखाकर कहा - हाँ पिताजी हमें बहुत धन मिला।

उन्हें देख किसान बहुत खुश हुआ, उसने अपने चारों बेटों को गले लगा लिया, अब किसान के चारों बेटें मेहनती हो गए थे।

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