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Wednesday, 17 January 2018

Deshbhakti Kavita | देशभक्ति कविता - पुष्प की अभिलाषा

Deshbhakti Kavita - देशभक्ति कविता - पुष्प की अभिलाषा 

This is a deshbhakti poem and kavita in hindi
देशभक्ति कविता


 चाह नहीं मैं सुरबाला के गहनों में गुंथा जाऊँ

चाह नहीं में प्रेमी माला में बिंध प्यारी को ललचाऊँ

चाह नहीं सम्राटों के सिर पर हे हरि डाला जाऊँ

चाह नही देवों के सर पर चढूं भाग्य पर इठलाऊँ

मुझे तोड़ लेना बनमाली उस पथ देना तुम फ़ेंक

मातृभूमि पर शीश चढ़ाने जिस पथ जावे वीर अनेक

                                         कवि - माखनलाल चतुर्वेदी 

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