Wednesday, 31 January 2018

जीवनी - बिरसा मुंडा महान जननायक | Birsa Munda Biography In Hindi


Birsa Munda Biography in Hindi 



बिरसा मुंडा 19वीं सदी के एक प्रमुख आदिवासी जननायक थे। उनके नेतृत्व में आदिवासियों ने 19वी सदी के अंत में मुंडाओ का महान आंदोलन उलगुलान को जन्म दिया।

बिरसा मुंडा का प्रारंभिक जीवन -


सुगना मुंडा और करमी हातू के पुत्र बिरसा मुंडा का जन्म रांची के उलीहातू गाँव में हुआ था। बिरसा साल्गा गाँव में प्रारंभिक पढाई करने के बाद चाईबसा माध्यमिक विद्यालय में पढाई करने के लिए गए।

वे हमेशा अपने समाज पर अंग्रेज द्वारा किये जाने वाले बुरी दशा पर सोचते रहते थे। उन्होने अपने समाज को अंग्रेजो से मुक्ति दिलाने के लिए उन्हें अपना नेतृत्व प्रदान किया।

मुंडा विद्रोह -


1 अक्टूबर 1894 को उन्होंने सभी मुंडाओ को एकत्र कर अंग्रेजो से लगान माफी के लिए आन्दोलन किया।

1895 में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और हजारीबाग के केंदीय कारागार में दो साल की कारावास की सजा दी गयी।

लेकिन बिरसा और उनके सहयोगियों ने गरीबी के जूझ रही जनता की सहायता करने की ठान ली थी।

उन्हें अपने जीवन काल में ही महापुरुष का दर्जा मिला था।उनके इलाके के लोग उनको धरती बाबा के नाम से पुकारते थे, और पूरे इलाके के मुंडा उनके साथ थे, वे उन्हें अपना नायक मानने थे।

अंग्रेजो से युद्ध और विद्रोह -


1897 से 1900 के बीच मुंडाओ और अंग्रेज सिपाहियों के बीच युद्ध होते रहे। बिरसा और उनके साथियों ने अपनी वीरता के बल पर अंग्रेजो ने नाक में दम कर रखा था। 

अगस्त 1897 में बिरसा और उनके चार सौ सिपाहियों ने तीर कमानों से लेस होकर  खूंटी थाने पैर धावा बोला।

1898 में तांगा नदी के किनारे मुंडाओ और अंग्रेज सिपाहियों के बीच लड़ाई हुई जिस में पहले तो अंग्रेज सिपाही हार गये लेकिन बाद में अंग्रेजो ने बहुत से मुंडा सिपाही को गिरफ्तार कर लिया था।


जनवरी 1900 डोमबारी पहाड़ी पर अंग्रेज और मुंडाओ के बीच संघर्स हुआ, जिसमें बहुत से औरत और बच्चे मारे गये थे। उस जगह बिरसा अपनी जनसभा को संबोधित कर रहे थे, बाद में अंग्रेजो ने वहाँ आकर बहूत सारे बिरसा मुंडा के साथियो को गिरफ्तार कर लिया, और अंत में बिरसा भी चक्रधर में गिरफ्तार कर लिए गये।

बिरसा मुंडा ने अपनी अंतिम सांसे 9 जून 1900 को रांची कारागार में ली और वे इस दुनिया को छोड़ चले गये।

बिरसा मुंडा ने जिस बहादुरी और साहस के साथ देश और समाज के रक्षा के लिए अंग्रेजों से युद्ध किया वो हमारे लिए गौरव की बात हैं।

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