Wednesday, 27 December 2017

moral story - कबूतर और चूहा

                                                        Best moral story

बहुत पुरानी बात हैं | एक गाँव में एक बहेलिया रहता था | वह रोज जंगल जाकर अपना जाल बिछाता था |

एक दिन उसने अपना जाल एक बरगद के पेड़ के नीचे बिछाया और बहुत सारे दाने डाल दिए ,

 जब कबूतरों का झुंड वहाँ से गुजरा तो देखा की बहुत सारे दाने बिखरे हैं |

 झुंड का एक कबूतर बोला - देखो भाइयो हम कितनी देर से दाना तलाश रहे थे , अब मिला...... बहुत भूख लगी है जल्दी चलो दाना खाते हैं |
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तभी दूसरा कबूतर भी बोला - हाँ चलो ...जल्दी चलो |


उस झुंड में एक बहुत ही बूढा और अनुभवी कबूतर भी था |

बुढे कबूतर ने बोला - रुको कोई मत जाओ | वहां किसी ने जाल बिछाया होगा नही तो जंगल में इतना दाना एक ही जगह पर क्यों गिरा रहेगा |

तभी एक कबूतर बोला - आप बुढे हो वहां  कोई जाल नही हैं | चलो भाइयो हम चलते हैं इन्हें छोड़ दो |

और सभी कबूतर चले गए | वे दाना चुनने लगे और खाने लगे तभी उन्हें ऐहसास हुआ की उनका चंगुल किसी

चीज में फंसा हैं | के अपना पंख फरफराने लगे लेकिन वे जाल में फंस चुके थे |

बुढा कबूतर डाल पे बैठ कर यह सब देख रहा था |

बुढा कबूतर जाल के पास गया और बोला - देखा मैंने बोला था यहाँ जाल हो सकता हैं | अब सुनो मैं जो बोलता हूँ वो करो |

तुम सुब एक साथ अपना पंख फरफराओ |

सभी ने एक साथ अपना पंख फर्फराया और वे जाल के लेकर उड़ गये | अब बुढ़े कबूतर ने उन्हें एक चूहे के बिल

 के पास ले गया और चूहे से बोला - मित्र तुम अपने दांतों से इस जाल को काट दो |
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चूहे ने अपने मित्र की बात मानी और उनका जाल काट दिया |

सारे कबूतर उड़ गए |

सिख -  दोस्तों हमेशा अपने से बड़ो की बात माननी चाहिए | और एक साथ मिलकर करने से कोई भी काम आसान हो जाता हैं जैसे उन कबूतरों ने किया इसीलिए कहते हैं .... एकता में बल होती हैं | 

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