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Tuesday, 18 September 2018

चार व्यापारी मित्र की कहानी - hindi story for class 4

गंगा नदी के किनारे कंचनपुर नामक एक गाँव बसा हुआ था। उस गाँव में अनेक तरह के काम - धाम करने वाले लोग रहते थे।

उस गाँव में चार बहुत ही अच्छे मित्र रहते थे, उनका नाम गंगाधर, लीलाधर, मुकेश और संजय था। वे रुई का व्यापार करते थे।

hindi story for class 4
चार व्यापारी मित्र की कहानी

एक बार उनके गोदामों में बहुत सारे चूहे रहने लगे। वे प्रतिदिन बहुत सारा रुई खराब कर देते थे।

Saturday, 15 September 2018

सोन चिड़ियाँ की कहानी - chidiya ki kahani

एक समय की बात हैं। गेहूँ के खेत में सोन चिड़ियाँ ने अपना बहुत ही सुन्दर घोंसला बनाया।

chidiya ki kahani
सोन चिड़ियाँ की कहानी

सोन चिड़ियाँ ने घोसला में तीन अंडे दिये, वह अपने अंडों की बहुत देखभाल करती थी।

Thursday, 13 September 2018

बिल्ली और चूहा की कहानी - billi aur chuha ki kahani

एक चूहा था, उसका बिल एक खेत के पास था। उस खेत का मालिक एक किसान था, वह अपने खेत में किसी भी जीव जंतुओं को घुसने नहीं देता था।

billi aur chuha ki kahani
 बिल्ली और चूहा

चूहा तो बहुत ही ज्यादा तेज दौड़ता हैं, इसलिये वह किसान चूहे को कभी भी पकड़ नहीं पाता था।

Tuesday, 11 September 2018

बच्चों की कहानी : स्वार्थी दानव (bachon ki kahani in hindi)

एक दानव था, उस दानव का एक बहुत ही बड़ा और सुन्दर बगीचा था। उसमें नरम, नरम घास की दरियाँ बिछी हुयी थी। क्यारियों में रंग बिरंगे फूल खिले हुये थे।

bachon ki kahani in hindi
बच्चों की कहानी


विद्यालय से लौटते समय सभी बच्चें दानव के बगीचे में खेलने जाते थे। उस बगीचे में आम के कई पेड़ थे। जिसमें गर्मियों में मीठे आम लगते थे।

Wednesday, 5 September 2018

शिक्षा के महत्व की कहानी - education story in hindi

एक छोटा सा गाँव था। उस गाँव में दो दोस्त रहते थे। एक का नाम था अरुण और दूसरे का नाम था मोहन।


अरुण के पिता एक कपड़े के व्यापारी थे। गाँव के लोगों के बीच उनका अच्छा सम्मान था। अपने पिता को देख उनका बेटा अरुण भी शिक्षा से अधिक पैसा को महत्व देता था।


education story in hindi


मोहन के पिताजी एक शिक्षक थे, वे गाँव के विद्यालय में बच्चों को पढ़ते थे। अपने पिता की तरह मोहन शिक्षा को सबसे महत्वपूर्ण मानता था।

Tuesday, 4 September 2018

लघु बाल कहानी : चिड़ियाँ और शिकारी - Laghu Bal kahani in hindi

एक बहुत ही सुन्दर जंगल था। उस जंगल में एक सोन चिड़ियाँ रहती थी।

एक दिन वह चिड़ियाँ डाल पर बैठ कर मधुर आवाज में गीत गा रही थी।

Laghu Bal kahani in hindi

उसी समय एक शिकारी आया उसने चुपके से आकर उस सोन चिड़ियाँ को पकड़ लिया और पिंजरे में बंद कर दिया।

Sunday, 2 September 2018

पक्षियों की कहानी - राजा कबूतर और घमण्डी बाज - pashu pakshi par kahani in hindi

एक बार की बात हैं। जंगल में पक्षियों का राजा बाज हुआ करता था। वह बहुत ही बलवान और घमण्डी था।

वह जरा सी गलती करने पर किसी भी पक्षी को मार देता था। उससे सभी पक्षी परेशान हो गये थे।

pashu pakshi par kahani in hindi
कबूतर और बाज

एक दिन जंगल के सभी पक्षियों ने एक सभा बुलायी, उस सभा में सबने विचार किया कि बाज को हटाकर शांत और सुन्दर कबूतर को नया राजा बनाना चाहिये।

चिड़ियों की बरसात | birds story in hindi | chidiya ki kahani

एक जंगल में एक चिड़ियाँ रहती थी। उसका घोंसला एक झाड़ी में था। इस साल चिड़ियाँ ने दो अंडे दिए थे।

चिड़ियाँ उस अंडों की बहुत देखभाल करती थी। 

वो सोचती की इन अंडों से छोटे - छोटे बच्चें निकलेंगे, में उन्हें उड़ना सिखाऊंगी और फिर हम सब चिड़ियाँ दूर खेतों में जाकर अनाज चुनेंगे, कितना अच्छा लगेगा।

birds story in hindi
birds story in hindi

एक दिन की बात हैं, एक भूखा हाथी आया, उसने झाड़ियाँ और पत्ते तोड़कर खाने लगा।

Saturday, 1 September 2018

राजकुमार और बुनकर की बेटी - hindi ki kahani

दोस्तों, ये कहानी एक राजकुमार और बुनकर की बेटी की हैं। दोनों में गुण और हुनर को लेकर शर्त लगायी जाती हैं। इस कहानी से अच्छी प्रेरणा मिलती हैं, और गुण की महत्ता समझ आती हैैन। यह एक रोचक कहानी हैं जिसमें आखरी में एक जीतता हैं।

hindi ki kahani
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एक राजकुमार था। उस राज्य के राजा और रानी उसे बहुत प्यार करते थे। उस राजकुमार के अंदर सिर्फ एक ही बात थी, की वह बहुत अधिक जिद्दी था।

Sunday, 26 August 2018

बस पाँच मिनट में उठता हूँ - Hindi story for class 2 with moral

एक लकड़ा था। उसका नाम था गोपी। उसकी माँ रोज सुबह उसे उठाती थी।

गोपी ओ गोपी उठ जा स्कूल जाना हैं। लेकिन गोपी आँख बंद किये कहता - बस पाँच मिनट में उठता हूँ। पर वह फिर सो जाता था।

Hindi story for class 2 with moral
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उसकी माँ जब नहाने के लिए कहती, तो वह बोलता - बस पाँच मिनट में नहाता हूँ। पर वह खेलता ही रहता था।

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