Wednesday, 14 August 2019

मेजर ध्यानचंद सिंह की जीवनी - Major Dhyan Chand Biography in Hindi


Major Dhyan Chand Biography in Hindi


मेजर ध्यानचंद की गेंद इस कदर उनकी स्टिक से चिपकी रहती कि प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी को अक्सर आशंका होती कि वह जादुई स्टिक से खेल रहे हैं। 

यहाँ तक हॉलैंड में उनकी हॉकी स्टिक में चुंबक होने की आशंका में उनकी स्टिक तोड़ कर देखी गई थी। 

जापान में ध्यानचंद की हॉकी स्टिक से जिस तरह गेंद चिपकी रहती थी उसे देख कर उनकी हॉकी स्टिक में गोंद लगे होने की बात कही गई थी। 

उनकी हॉकी की कलाकारी देखकर हॉकी के मुरीद तो वाह-वाह कह ही उठते थे बल्कि प्रतिद्वंद्वी टीम के खिलाड़ी भी अपनी सुधबुध खोकर उनकी कलाकारी को देखने में मशगूल हो जाते थे।

मेजर ध्यानचंद सिंह की जीवनी 




मेजर ध्यानचंद सिंह का जन्म 29 अगस्त 1905 को उत्तरप्रदेश के प्रयागराज में हुआ था। वे भारतीय हॉकी के भूतपूर्व खिलाड़ी एवं कप्तान थे। भारत एवं विश्व हॉकी के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी में उनकी गिनती होती है। 

वे तीन बार ओलम्पिक के स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम के सदस्य रहे, उनकी जन्मतिथि को भारत में "राष्ट्रीय खेल दिवस" के के रूप में मनाया जाता है। 


प्रारंभिक जीवन - 


मेजर ध्यानचंद 1922 से 1926 तक सेना की प्रतियोगिताओं में हॉकी खेला करते थे। दिल्ली में हुई वार्षिक प्रतियोगिता में जब इन्हें सराहा गया तो इनका हौसला बढ़ा। 

13 मई 1926 को न्यूजीलैंड में पहला मैच खेला था। उन्होंने न्यूजीलैंड में 21 मैच खेले जिनमें 3 टेस्ट मैच भी थे।

इन 21 मैचों में से 18 जीते, 2 मैच अनिर्णीत रहे और और एक में हारे। पूरे मैचों में इन्होंने 192 गोल बनाए। उनपर कुल 24 गोल ही हुये थे। 


Monday, 12 August 2019

Happy 100th Birthday Of Dr. Vikram Sarabhai Photo, Image, Picture And the Quotes


Dr.Sarabhai was considered as the Father of the Indian space program; He was a great institution builder and established or helped to establish a large number of institutions in diverse fields. 

He was instrumental in establishing the Physical Research Laboratory (PRL) in Ahmedabad : after returning from Cambridge to an independent India in 1947, he persuaded charitable trusts controlled by his family and friends to endow a research institution near home in Ahmedabad.

 Thus, Vikram Sarabhai founded the Physical Research Laboratory (PRL) in Ahmedabad on November 11, 1947. He was only 28 at that time. Sarabhai was a creator and cultivator of institutions and PRL was the first step in that direction. Vikram Sarabhai served of PRL from 1966-1971. 


Happy Birthday Br. Vikram Sarabhai






Best Quote By Our Great Scientist Vikram Sarabhai in English


vikram sarabhai

Vikram Sarabhai Quotes in English


He who can listen to the music
 in 
the midst of noise 
can 
achieve great things 
                                                                     
                                                               Vikram Sarabhai

विक्रम साराभाई के 5 अनमोल विचार - Vikram Sarabhai Quotes in Hindi


डॉ॰ विक्रम साराभाई (Vikram Sarabhai )  के नाम को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम से अलग नहीं किया जा सकता। यह जगप्रसिद्ध है कि वह विक्रम साराभाई ही थे जिन्होंने अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भारत को अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर स्थान दिलाया। लेकिन इसके साथ-साथ उन्होंने अन्य क्षेत्रों जैसे वस्त्र, भेषज, आणविक ऊर्जा, इलेक्ट्रानिक्स और अन्य अनेक क्षेत्रों में भी बराबर का योगदान किया। 

आज हम आपको महान वैज्ञानिक विक्रम साराभाई के पाँच ऐसे अनमोल विचार देंगे जो आपके जीवन में बड़ा परिवर्तन ला सकता हैं। इस विचार (Vikram Sarabhai Quotes in Hindi) को जितना हो सके शेयर करें क्यों की यह विचार नहीं बल्कि एक अनमोल हिरा हैं जो हमें विक्रम साराभाई दे गए हैं। 


Vikram Sarabhai Quotes in Hindi



Monday, 5 August 2019

आम का पेड़ - About Mango Tree in Hindi


 About Mango Tree in Hindi 


 

आम - About Mango in Hindi

आम एक बहुत ही मीठा फल होता हैं। इसे लोग फलों का राजा कहते हैं। आम सबसे पहले भारतीय उपमहाद्वीप पर ही मिलती थी। आम का वैज्ञानिक नाम मैंगीफेरा इंडिका हैं।

आम भारत, पाकिस्तान और फिलीपींस का राष्ट्रीय फल हैं। बांग्लादेश में आम के पेड़ को राष्ट्रीय वृक्ष का दर्जा प्राप्त हैं।

आम का सबसे अधिक उत्पादन भारत में होता हैं, भारत के बाद आम के उत्पादक देश चीन, थाईलैंड और इंडोनेशिया हैं।

Friday, 2 August 2019

10 Lines About Independence Day in Hindi 2019


10 Lines On Independence Day in Hindi 



1. स्वतंत्रता दिवस हर वर्ष 15 अगस्त को मनाया जाता हैं। 

2. 15 अगस्त 1947 में इसी दिन भारत के लोगों ने अंग्रेजी शासन से स्वतंत्रता प्राप्त की थी।

3. 15 अगस्त 1947 में पहली बार देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने दिल्ली के लाल किले के लाहौरी गेट पर तिरंगा झंडा फहराया था।

4. हर साल स्वतंत्रता दिवस के दिन भारत के प्रधानमंत्री दिल्ली के लाल किले पर तिरंगा झंडा फहराते हैं।


Thursday, 1 August 2019

बच्चों की 5 ज्ञानवर्धक नैतिक कहानियां - Bachchon Ki Kahani


बच्चों की 5 ज्ञानवर्धक कहानियां
Baccho Ki Kahaniya


बच्चों की कहानी (Baccho Ki Kahani) पढ़ने और सुनने में बच्चों को बहुत आनंद आता हैं क्यों की कहानियां में कुछ ऐसी बातें होती है जिससे बच्चो का मनोरंजन भी होता है और उनका ज्ञान भी बढ़ता हैं।

इस लेख में आपको भारती हिंदी.com पर मौजूद बच्चो की कहानियों की लिस्ट मिलेगी जिसमें बहुत ही रोचक अंदाज में नैतिक और प्रेरक बातें समझायी गयी हैं।

Bachchon Ki Kahani #1


सुंदरवन में एक आम का पेड़ था।  उस पेड़ पर एक बंदर बैठा हुआ था।  बंदर की पूंछ बहुत लम्बी थी, वह जमीन से लटक रही थी। 

bachchon ki kahani

पेड़ के निचे एक गिलहरी खेल रही थी।  उसने ऊपर देखा तो उसे एक झूला लटकता हुआ दिखाई दिया, गिलहरी  ने झूले को पकड़ लिया और मस्ती में झूलने लगी।