Friday, 23 August 2019

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खुद पर विश्वास - Moral stories in Hindi for class 10


 Moral stories in Hindi for class 10 


एक समय की बात है। किसी गांव में खरगोश, बकरी, घोड़ा और गधा इन चारों में बहुत अधिक मित्रता थी, वे एक साथ एक ही मैदान में घास चरने के लिये जाया करते थे।


इन सभी जानवरों में सबसे छोटा और सबका नन्हा दोस्त था खरगोश। खरगोश का पेट तो थोड़े से घास से ही भर जाता था, बाकि तीनों जानवरों को अधिक घास खाना होता था। 


Thursday, 22 August 2019

पंचतंत्र की 50 नई कहानियां - Panchatantra stories in Hindi


Panchatantra stories in Hindi


पंचतंत्र की कहानियां जैसे की कौआ, मैना, चिड़ियों की कहानी और हमें सीख देती अनमोल कहानियों का रोचक संग्रह आपके लिए हम लाये हैं।  इस संग्रह में 50 बहुत ही रोचक पंचतंत्र की नई कहानी दिया गया हैं और  सभी कहानियों में अनोखी सीख मौजूद हैं.....चलिये दोस्तों पढ़ते हैं आज पंचतंत्र की एक नई कहानी।




Monday, 19 August 2019

World Mosquito Day 2019 Images, Photos and Picture


World Mosquito Day, observed annually on 20 August, is a commemoration of British doctor Sir Ronald Ross's discovery in 1897 that female mosquitoes transmit malaria between humans. Ross is responsible for the annual observance, having declared shortly after his discovery that the day should be known as World Mosquito Day in the future. Here is the best World Mosquito Day 2019 Images, Photos and Picture You Can Download this images. 


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Hindi short stories for class 3 with Free PDF Download


Moral Stories in Hindi For Class 3 with PDF 


एक घना जंगल था। उस जंगल में एक शेर भोजन करके पेड़ के नीचे आराम कर रहा था। इतने में ही एक मक्खी उड़ती - उड़ती वहाँ आयी, शेर ने दो चार दिनों से स्नान नहीं किया था। 

वह मक्खी शेर के कानों के पास आकर भिनभिनाने करने लगी, उस शेर को बहुत मुश्किल से नींद आयी थी। उसने नींद में ही पंजा उठाया, मक्खी वहाँ से उड़ गयी।

Moral Stories in Hindi For Class 3

लेकिन फिर से मक्खी शेर के कानों के पास आकर भिन भिन करने लगी, अब शेर को गुस्सा आया वह बोला - अरे मुर्ख मक्खी दूर हट जा नहीं तो तुझे अभी जान से मार दूँगा। 


Wednesday, 14 August 2019

मेजर ध्यानचंद सिंह की जीवनी - Major Dhyan Chand Biography in Hindi


Major Dhyan Chand Biography in Hindi


मेजर ध्यानचंद की गेंद इस कदर उनकी स्टिक से चिपकी रहती कि प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी को अक्सर आशंका होती कि वह जादुई स्टिक से खेल रहे हैं। 

यहाँ तक हॉलैंड में उनकी हॉकी स्टिक में चुंबक होने की आशंका में उनकी स्टिक तोड़ कर देखी गई थी। 

जापान में ध्यानचंद की हॉकी स्टिक से जिस तरह गेंद चिपकी रहती थी उसे देख कर उनकी हॉकी स्टिक में गोंद लगे होने की बात कही गई थी। 

उनकी हॉकी की कलाकारी देखकर हॉकी के मुरीद तो वाह-वाह कह ही उठते थे बल्कि प्रतिद्वंद्वी टीम के खिलाड़ी भी अपनी सुधबुध खोकर उनकी कलाकारी को देखने में मशगूल हो जाते थे।

मेजर ध्यानचंद सिंह की जीवनी 




मेजर ध्यानचंद सिंह का जन्म 29 अगस्त 1905 को उत्तरप्रदेश के प्रयागराज में हुआ था। वे भारतीय हॉकी के भूतपूर्व खिलाड़ी एवं कप्तान थे। भारत एवं विश्व हॉकी के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी में उनकी गिनती होती है। 

वे तीन बार ओलम्पिक के स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम के सदस्य रहे, उनकी जन्मतिथि को भारत में "राष्ट्रीय खेल दिवस" के के रूप में मनाया जाता है। 


प्रारंभिक जीवन - 


मेजर ध्यानचंद 1922 से 1926 तक सेना की प्रतियोगिताओं में हॉकी खेला करते थे। दिल्ली में हुई वार्षिक प्रतियोगिता में जब इन्हें सराहा गया तो इनका हौसला बढ़ा। 

13 मई 1926 को न्यूजीलैंड में पहला मैच खेला था। उन्होंने न्यूजीलैंड में 21 मैच खेले जिनमें 3 टेस्ट मैच भी थे।

इन 21 मैचों में से 18 जीते, 2 मैच अनिर्णीत रहे और और एक में हारे। पूरे मैचों में इन्होंने 192 गोल बनाए। उनपर कुल 24 गोल ही हुये थे। 


Monday, 12 August 2019

Happy 100th Birthday Of Dr. Vikram Sarabhai Photo, Image, Picture And the Quotes


Dr.Sarabhai was considered as the Father of the Indian space program; He was a great institution builder and established or helped to establish a large number of institutions in diverse fields. 

He was instrumental in establishing the Physical Research Laboratory (PRL) in Ahmedabad : after returning from Cambridge to an independent India in 1947, he persuaded charitable trusts controlled by his family and friends to endow a research institution near home in Ahmedabad.

 Thus, Vikram Sarabhai founded the Physical Research Laboratory (PRL) in Ahmedabad on November 11, 1947. He was only 28 at that time. Sarabhai was a creator and cultivator of institutions and PRL was the first step in that direction. Vikram Sarabhai served of PRL from 1966-1971. 


Happy Birthday Br. Vikram Sarabhai